बदायूं के उझानी में दिल्ली हाईवे पर गांव कुड़ानरसिंहपुर के पास पिछले करीब चार महीने से जलभराव की गंभीर समस्या है। नाले के पानी से सड़क डूब गई है, जिससे वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो रही है और लगातार हादसे का खतरा बना हुआ है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने हाईवे की एक लेन पर आवागमन बंद कर दिया था, लेकिन जल निकासी या सड़क के उच्चीकरण का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
इस जलभराव से कुड़ानरसिंहपुर के ग्रामीण और हाईवे से गुजरने वाले लोग परेशान हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी समस्या से अच्छी तरह वाकिफ हैं। तत्कालीन एसडीएम के साथ अधिकारियों ने शुरुआती दिनों में मौके का मुआयना किया था। उन्हें बड़े हादसे की आशंका थी, इसलिए प्रभावित लेन पर संकेतक लगाकर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। हालांकि, इसके बाद पानी के निकास की व्यवस्था या गड्ढों की मरम्मत नहीं की गई।
जलभराव से लगातार हादसे
जलभराव के कारण दिल्ली हाईवे पर कई हादसे हुए हैं। ई-रिक्शा पलटने और बाइक फिसलने से कई लोग घायल हुए। समाजसेवी श्याम शर्मा ने बताया कि उन्होंने सहसवान, बदायूं और मुजरिया के आठ-नौ घायल लोगों का निजी क्लीनिक पर इलाज कराया है। शुरुआती दिनों में गेहूं लदी एक ट्रॉली पलट गई थी। इसके आठ दिन बाद केमिकल के ड्रमों से भरा एक कैंटर भी पलट गया। गनीमत रही कि ड्रम फटे नहीं, वरना बड़ा खतरा हो सकता था।
अधिकारियों की अनदेखी और ग्रामीणों की परेशानी
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी समस्या से वाकिफ होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कुड़ानरसिंहपुर के नेतराम ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पिछले साल भी नाले का पानी सड़क पर बहा था, तब अस्थायी नाले की खोदाई हुई थी, लेकिन इस बार चार महीने से हालात ज्यादा खराब हैं। बुजुर्ग रामदीन ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि चार महीना गुजर जाने के बाद भी इंतजाम नहीं किए जाने से सवाल पूछना लाजिमी है। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने दिक्कतें बताई थीं, लेकिन मौके से लौटने के बाद किसी ने सुनवाई नहीं की।
आंबेडकर चौराहे के पास भी गड्ढे
आंबेडकर चौराहे और कुड़ानरसिंहपुर गांव के बीच भी सड़क की हालत खराब है। यहां दो महीने पहले जलभराव हुआ था, जिससे गहरे गड्ढे बन गए हैं। भारी वाहनों के गुजरने से इन गड्ढों की गहराई डेढ़-दो फीट और चौड़ाई एक मीटर से अधिक हो गई है। पीडब्ल्यूडी ने इन गड्ढों के पास भी केवल संकेतक रखवाए हैं, लेकिन मरम्मत का कोई काम नहीं किया गया है। हाईवे किनारे पानी के निकास की व्यवस्था न होने से यह समस्या बनी हुई है। कुड़ानरसिंहपुर की आबादी दो हजार से अधिक है। नालियों का पानी प्रभावित लेन तक पहुंचता है, जिससे आगे निकास नहीं है।