कोटा नगर निगम चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गए हैं। हालांकि, कुछ जगहों पर छिटपुट घटनाएं सामने आईं, लेकिन प्रशासन ने शहर के सभी 100 वार्डों पर चुनाव को पूरी तरह से संपन्न कर दिया है। ऐसे में अब 100 वार्डों पर खड़े हुए 373 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है, जिनके भाग्य का फैसला 14 सितंबर को हो जाएगा। चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों ने भी राहत की सांस ली है, लेकिन जब तक मतगणना के परिणाम नहीं आ जाते, तब तक प्रत्याशियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें भी साफ दिखाई दे रही हैं।
दोनों विपक्षी दलों की टेंशन बढ़ी
कोटा में इस बार 67.66 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो पिछले नगर निकाय चुनाव के लगभग बराबर ही सामने आया है। ऐसे में इस चुनाव ने पार्टियों के दिलों की धड़कन भी बढ़ा दी है। अगर जानकारों की मानें तो इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी अब अपना दमखम दिखा सकते हैं। कोटा में साल 2014 में सबसे ज्यादा 67 प्रतिशत मतदान हुआ था। लेकिन उसके बाद हुए चुनाव में मतदान प्रतिशत कम रहा था। ऐसे में इस बार प्रमुख दल भी निर्दलीयों को मनाने में अपना दमखम दिखाएंगे।
8.26 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने किया मतदान
इस बार नगर निगम के 100 वार्डों पर हुए निकाय चुनाव में 8 लाख 26 हजार 923 मतदाताओं में से 5 लाख 59 हजार 485 मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया है। हालांकि, सुबह के मुकाबले मतदान केंद्रों पर काफी कम भीड़ थी, लेकिन शाम होते-होते अचानक भीड़ बढ़ गई। अंतिम समय शाम 6 बजे सभी मतदान केंद्रों पर गेटों को बंद कर दिया गया और अंदर मौजूद मतदाताओं को मतदान करवाया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी और कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने भी अपने-अपने क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर जाकर मतदान किया।
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वार्ड 34 में सबसे ज्यादा, वार्ड 1 में सबसे कम मतदाता
कोटा शहर के वार्डों की बात की जाए तो वार्ड नंबर 34 में सबसे ज्यादा 23 हजार 779 मतदाता हैं, जबकि सबसे कम मतदाता वार्ड नंबर 1 में 3,858 हैं। अगर इस चुनाव में वार्डों के मुद्दों की बात की जाए तो सबसे बड़ा मुद्दा वार्डों में सड़कों का सामने आया है। कई जगह गहरे गड्ढे और सड़कें खुदी हुई हैं। इसके अलावा चंबल नदी किनारे बसे कोटा शहर में आज भी कई वार्डों में पीने के पानी की समस्या बनी हुई है।
केईडीएल की मनमानी भी चुनावी मुद्दा
अगर बिजली से संबंधित समस्या को देखा जाए तो कोटा शहर में निजी विद्युत कंपनी KEDL की मनमानी से शहरवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बार चुनाव में खड़े हुए कई प्रत्याशियों ने चुनाव जीतने के बाद निजी विद्युत कंपनी को सबक सिखाने और कोटा से भगाने का वादा भी किया है।