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क्या है निठारी कांड?: बकरी चराने से पंढेर की कोठी तक, एक कॉल से हुआ था खुलासा; इस काम में माहिर था कोली
Sat, 19 Sep 2026 09:54 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 19 Sep 2026 09:54 AM IST
सार
निठारी कांड के पीड़ितों ने कहा कि हमें न्याय नहीं मिला। एजेंसियों की जांच पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि फंदे से लटकना होता तो कोली जेल में ही जान दे देता। सुरेंद्र कोली का अल्मोड़ा के गांव में गरीबी में बचपन बीता था। कोली खाना बनाने में माहिर था। उसे दिल्ली में पहली नौकरी मिली थी। आइए जानते हैं कोली कैसे बकरियां चराने से पंढेर की कोठी तक पहुंचा?
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Nithari case
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नोएडा के निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की आत्महत्या की सूचना मिलते ही शुक्रवार को सेक्टर-31 स्थित मोनिंदर सिंह पढ़ेर की कोठी डी-5 के सामने लोग इकट्ठा हो गए। मौके पर जुटे पीड़ितों ने कहा कि करीब 20 बीस साल भी उन्हें न्याय नहीं मिला। अपनों को गंवाने वाले झब्बूलाल और सुनीता कहते हैं कि एजेंसियों ने मामले की सही से जांच की होती तो दोनों आरोपियों को फांसी की सजा होती।
पीड़ितों ने आत्महत्या की बात संदिग्ध बताते हुए कहा कि कोली को जान देनी होती तो वह जेल में ही दे देता। 19 साल बाद जेल से निकलने के बाद कोली परिवार के साथ रहने लगा था। ऐसे में वह जान क्यों देगा। उनका दावा है कि कोली केस के बारे में बड़ा खुलासा करने वाला था इसलिए उसकी हत्या कर दी गई।
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पीड़ितों ने आत्महत्या की बात संदिग्ध बताते हुए कहा कि कोली को जान देनी होती तो वह जेल में ही दे देता। 19 साल बाद जेल से निकलने के बाद कोली परिवार के साथ रहने लगा था। ऐसे में वह जान क्यों देगा। उनका दावा है कि कोली केस के बारे में बड़ा खुलासा करने वाला था इसलिए उसकी हत्या कर दी गई।
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निठारी कांड के पीड़ित झब्बूलाल कहते हैं कि जांच एजेंसियां सही से काम कर रहीं होतीं तो मोनिंदर और सुरेंद्र दोषमुक्त नहीं होते। वहीं निठारी कांड में लापता हुई ज्योति की मां सुनीता कहती हैं कि बेटी दुपट्टा पीको कराने गई थी। उसके बाद नहीं लौटी। सुनीता का कहना है कि मामले की जांच शुरू होने पर पुलिस ने मोनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली को पकड़ लिया था। तब थाने में आरोपियों ने उनके पैर पकड़ कर कहा था कि उनसे गलती हो गई। सुनीता का कहना है कि अब तक हम लोगों को न्याय नहीं मिला।
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Nithari Case
- फोटो : फाइल फोटो
एक कॉल से हुआ था निठारी कांड का खुलासा
साल 2005-06 के दौरान निठारी और आसपास के इलाके से बड़ी संख्या में बच्चे व बच्चियां गुमशुदा हो रहे थे। पुलिस के पास लगातार शिकायतें आ रही थी। उस वक्त के कप्तान ने एसओजी के प्रभारी विनोद पांडेय को मामले की जांच सौंपी थी। करीब पांच माह की जांच के बाद गुमशुदा युवती पायल के मोबाइल पर आई कॉल से मामले का खुलासा हुआ था। इसके बाद सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया गया।
साल 2005-06 के दौरान निठारी और आसपास के इलाके से बड़ी संख्या में बच्चे व बच्चियां गुमशुदा हो रहे थे। पुलिस के पास लगातार शिकायतें आ रही थी। उस वक्त के कप्तान ने एसओजी के प्रभारी विनोद पांडेय को मामले की जांच सौंपी थी। करीब पांच माह की जांच के बाद गुमशुदा युवती पायल के मोबाइल पर आई कॉल से मामले का खुलासा हुआ था। इसके बाद सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया गया।
विनोद कहते हैं कि उन्होंने सबसे पहले सभी अनाथालय, रेलवे स्टेशन, होटल, ढाबे से लेकर अन्य जगहों पर पता किया। घरवालों से बातचीत में पता चला कि लगभग सभी बच्चे सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के सौ से दो सौ मीटर की परिधि में अंतिम बार दिखे थे। सभी लापता लोगों में पायल बड़ी थी व उसके पास मोबाइल था। पायल के गायब होने के बाद से मोबाइल बंद था। दिसंबर 2008 में पायल के मोबाइल पर घंटी बजी और पुलिस सुरेंद्र कोली तक पहुंच गई।
13 दिन बाद से सीबीआई ने शुरू की थी जांच
29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड का खुलासा हुआ था। इसके 13 दिन बाद 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने केस अपने हाथ में ले लिया। 12 से अधिक टीम ने जांच की। सीबीआई ने सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया। इस मामले में कुल 19 एफआईआर दर्ज की गई थी। शुरुआत में तीन मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। करीब 17 वर्षों तक मामले में सुनवाई जारी रही।
29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड का खुलासा हुआ था। इसके 13 दिन बाद 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने केस अपने हाथ में ले लिया। 12 से अधिक टीम ने जांच की। सीबीआई ने सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया। इस मामले में कुल 19 एफआईआर दर्ज की गई थी। शुरुआत में तीन मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। करीब 17 वर्षों तक मामले में सुनवाई जारी रही।
Nithari Case
- फोटो : अमर उजाला
बकरियां चराने से पंढेर की कोठी तक पहुंचा कोली
निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली अल्मोड़ा के एक गांव में कभी बकरियां चराता था। सुरेंद्र कोली कभी स्वादिष्ट खाना बनाने की कला के कारण दिल्ली पहुंचा था। गरीबी में पला-बढ़ा कोली वर्ष 2000 के आसपास दिल्ली में ब्रिगेडियर के घर नौकरी करने लगा। करीब तीन साल बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि वह नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में मोनिंदर सिंह पंढेर के यहां काम करने लगा।
निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली अल्मोड़ा के एक गांव में कभी बकरियां चराता था। सुरेंद्र कोली कभी स्वादिष्ट खाना बनाने की कला के कारण दिल्ली पहुंचा था। गरीबी में पला-बढ़ा कोली वर्ष 2000 के आसपास दिल्ली में ब्रिगेडियर के घर नौकरी करने लगा। करीब तीन साल बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि वह नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में मोनिंदर सिंह पंढेर के यहां काम करने लगा।
वर्ष 2006 में निठारी कांड सामने आने के बाद उसका नाम देशभर में चर्चित हो गया। करीब 19 साल जेल में रहने के बाद वह पिछले वर्ष जेल से बाहर आया था। शुक्रवार को हरिद्वार में चाय की दुकान के भीतर उसका शव फंदे से लटका मिला। कोली का बचपन बेहद गरीबी में बीता। अल्मोड़ा के पास स्थित गांव में परिवार किसी तरह गुजर-बसर करता था। किशोरावस्था में वह गांव में बकरियों की देखरेख करता था। उसे खाना बनाने में रुचि थी और धीरे-धीरे वह इस काम में माहिर हो गया।
वर्ष 2000 में उसकी मुलाकात दिल्ली में रहने वाले एक ब्रिगेडियर से हुई। कोली के खाना बनाने की जानकारी मिलने पर ब्रिगेडियर ने उसे अपने यहां काम पर रख लिया। इसके बाद वह गांव से दिल्ली आ गया। वह घर में रहकर खाना बनाने के साथ साफ-सफाई का काम करता था। पुलिस जांच से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, उस समय तक उसकी जिंदगी सामान्य थी और उसके खिलाफ किसी आपराधिक गतिविधि का रिकॉर्ड सामने नहीं आया था।
सुरेंद्र कोली
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
वर्ष 2003 में ब्रिगेडियर को दिल्ली से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद कोली नोएडा में मोनिंदर सिंह पंढेर के संपर्क में आया। वह दिल्ली-एनसीआर में ही काम करना चाहता था। इसी वजह से वह सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में पंढेर के यहां काम करने लगा। बताया जाता है कि पंढेर के कहने पर कोली अपनी पत्नी को भी नोएडा ले आया था। वर्ष 2004 में पंढेर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया। इसके बाद कोली की पत्नी भी गांव लौट गई। कोठी में पंढेर और कोली के रहने के दौरान कोली का अधिकतर समय वहीं गुजरने लगा। बाद में इसी कोठी और आसपास की घटनाओं ने निठारी कांड को जन्म दिया।
निठारी कांड के बाद 19 साल जेल में रहा
दिसंबर 2006 में निठारी कांड का खुलासा होने के बाद पंढेर की कोठी के पीछे नाले से बच्चों और महिलाओं के अवशेष मिलने से सनसनी फैल गई। कोली और पंढेर को गिरफ्तार किया गया। कोली के खिलाफ कई मामलों में मुकदमे चले और उसे अलग-अलग मामलों में मौत की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में कई मामलों में उसे बरी कर दिया गया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी उसकी सजा को रद्द कर दिया, जिसके बाद करीब 19 साल जेल में रहने के बाद वह बाहर आया।
दिसंबर 2006 में निठारी कांड का खुलासा होने के बाद पंढेर की कोठी के पीछे नाले से बच्चों और महिलाओं के अवशेष मिलने से सनसनी फैल गई। कोली और पंढेर को गिरफ्तार किया गया। कोली के खिलाफ कई मामलों में मुकदमे चले और उसे अलग-अलग मामलों में मौत की सजा भी सुनाई गई थी। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में कई मामलों में उसे बरी कर दिया गया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी उसकी सजा को रद्द कर दिया, जिसके बाद करीब 19 साल जेल में रहने के बाद वह बाहर आया।
पत्नी के जाने के बाद बदली परिस्थितियां
वर्ष 2004 में पंढेर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया। इसके बाद कोली ने भी अपनी पत्नी को गांव भेज दिया। इस तरह कोठी में पंढेर और कोली ही अब रहने लगे थे। कई महीनों तक अकेले रहने के दौरान ही सामान्य रहने वाले कोली की जिंदगी में हैवानियत की शुरुआत हुई थी। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कोठी में अक्सर कॉल गर्ल आया करती थीं। उनके लिए कोली ही खाने से लेकर अन्य व्यवस्था करता था। इसी दौरान वह उनसे भी नजदीकी बढ़ाना चाहता था लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था। इसलिए वह धीरे-धीरे नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया था।
वर्ष 2004 में पंढेर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया। इसके बाद कोली ने भी अपनी पत्नी को गांव भेज दिया। इस तरह कोठी में पंढेर और कोली ही अब रहने लगे थे। कई महीनों तक अकेले रहने के दौरान ही सामान्य रहने वाले कोली की जिंदगी में हैवानियत की शुरुआत हुई थी। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कोठी में अक्सर कॉल गर्ल आया करती थीं। उनके लिए कोली ही खाने से लेकर अन्य व्यवस्था करता था। इसी दौरान वह उनसे भी नजदीकी बढ़ाना चाहता था लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था। इसलिए वह धीरे-धीरे नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया था।
यहीं मिला था निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र का शव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जब रातोंरात टल गई थी फांसी
9 सितंबर 2014, सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्योरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को तड़के तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिये मिला। इस बात की जानकारी खुद तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने दी थी।
9 सितंबर 2014, सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्योरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को तड़के तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिये मिला। इस बात की जानकारी खुद तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने दी थी।
क्या है निठारी कांड
निठारी गांव में रहने वाले लोगों के बच्चे वर्ष 2004 से लापता हो रहे थे। परिजनों की शिकायत पर सेक्टर-20 मामला दर्ज नहीं कर रही थी। गायब होने वाले बच्चों में अधिकतर लड़कियां थीं। निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता पालय के पिता सेक्टर-19 में निवासी नंदलाल ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर पर अपहरण का शक जाहिर करते हुए पुलिस से शिकायत की।
निठारी गांव में रहने वाले लोगों के बच्चे वर्ष 2004 से लापता हो रहे थे। परिजनों की शिकायत पर सेक्टर-20 मामला दर्ज नहीं कर रही थी। गायब होने वाले बच्चों में अधिकतर लड़कियां थीं। निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता पालय के पिता सेक्टर-19 में निवासी नंदलाल ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर पर अपहरण का शक जाहिर करते हुए पुलिस से शिकायत की।
सुनवाई नहीं होने पर नंदलाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश देकर सीओ स्तर के अधिकारी को प्रगति आख्या के साथ कोर्ट में बुलाया। 15 दिसंबर को अधिकारियों ने कोठी मालिक मोनिंदर सिंह व नौकर सुरेंद्र कोली से पूछताछ की लेकिन रात में ही छोड़ दिया।
यहीं मिला था निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र का शव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हाईकोर्ट ने एक बार फिर नंदलाल के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की और पुलिस को प्रगति आख्या देने के लिए कहा। इसी बीच लापता हुई पायल का मोबाइल फोन चालू हो गया। पुलिस टीम उस मोबाइल फोन तक पहुंच गई। 29 दिसंबर को डी-5 कोठी के नौकर सुरेंद्र कोली तक पहुंच गई। पुलिस पूछताछ के बाद सुबह पुलिस बच्चों के कंकाल बरामद करने पहुंच गई जिन्हें देख कर निठारी के लोग भड़क गए।
यहीं मिला था निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र का शव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
निठारी कांड से बरी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या
देशभर में चर्चित निठारी कांड से बरी हुए सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान के अंदर उसका शव फंदे से लटका मिला। कोली की मौत की खबर के बाद अल्मोड़ा के स्याल्दे ब्लॉक स्थित मंगरूखाल गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। गांव में अब कोली के नाम पर उसका खंडहर हो चुका पैतृक मकान ही बचा है।
देशभर में चर्चित निठारी कांड से बरी हुए सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान के अंदर उसका शव फंदे से लटका मिला। कोली की मौत की खबर के बाद अल्मोड़ा के स्याल्दे ब्लॉक स्थित मंगरूखाल गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। गांव में अब कोली के नाम पर उसका खंडहर हो चुका पैतृक मकान ही बचा है।
निठारी कांड
- फोटो : अमर उजाला
निठारी कांड: कब क्या हुआ
29 दिसंबर 2006- सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पास बच्चों के नरकंकाल मिले।
14 जनवरी 2006: निठारी कांड की जांच सीबीआई ने शुरू की।
13 फरवरी 2009 - सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर सजा-ए-मौत। हाईकोर्ट से पंढेर बरी
12 मई 2010 - सुरेंद्र कोली दूसरे मामले में सजा-ए-मौत
24 दिसंबर 2012- एक अन्य मामले में अदालत ने सुरेंद्र कोली को फिर फांसी की सजा सुनाई।
20 जुलाई 2014- तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सुरेंद्र कोली की दया याचिका खारिज कर दी।
8 सितंबर 2014- सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने देर रात करीब डेढ़ बजे कोली की फांसी पर रोक लगाई
16 जनवरी 2021- कोली को 12वें निठारी मामले में मौत की सजा मिली, जबकि इसी मामले में पंढेर को बरी कर दिया गया।
26 मार्च 2021- गाजियाबाद की अदालत ने साक्ष्य नष्ट करने से जुड़े 13वें मामले में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया।
16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा वाले सभी 12 मामलों में बरी किया; पंढेर को भी फांसी वाले दो मामलों में राहत मिली।
4 मई 2024: सुप्रीम कोर्ट में सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई।
30 जुलाई 2025- सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपील खारिज करते हुए मोनिंदर पंढेर व सुरेंद्र कोली को हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
18 सितंबर 2026- निठारी कांड में बरी हो चुके सुरेंद्र कोली का हरिद्वार में शव फंदे से लटका मिला।
29 दिसंबर 2006- सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पास बच्चों के नरकंकाल मिले।
14 जनवरी 2006: निठारी कांड की जांच सीबीआई ने शुरू की।
13 फरवरी 2009 - सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर सजा-ए-मौत। हाईकोर्ट से पंढेर बरी
12 मई 2010 - सुरेंद्र कोली दूसरे मामले में सजा-ए-मौत
24 दिसंबर 2012- एक अन्य मामले में अदालत ने सुरेंद्र कोली को फिर फांसी की सजा सुनाई।
20 जुलाई 2014- तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सुरेंद्र कोली की दया याचिका खारिज कर दी।
8 सितंबर 2014- सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने देर रात करीब डेढ़ बजे कोली की फांसी पर रोक लगाई
16 जनवरी 2021- कोली को 12वें निठारी मामले में मौत की सजा मिली, जबकि इसी मामले में पंढेर को बरी कर दिया गया।
26 मार्च 2021- गाजियाबाद की अदालत ने साक्ष्य नष्ट करने से जुड़े 13वें मामले में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया।
16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा वाले सभी 12 मामलों में बरी किया; पंढेर को भी फांसी वाले दो मामलों में राहत मिली।
4 मई 2024: सुप्रीम कोर्ट में सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई।
30 जुलाई 2025- सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपील खारिज करते हुए मोनिंदर पंढेर व सुरेंद्र कोली को हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
18 सितंबर 2026- निठारी कांड में बरी हो चुके सुरेंद्र कोली का हरिद्वार में शव फंदे से लटका मिला।