प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में अपनी लंबित मांगों को लेकर गहरा असंतोष उभरकर सामने आया है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के नेतृत्व में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के रवैये पर कड़ा विरोध दर्ज किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों की वाजिब मांगों की लगातार अनदेखी के विरोध में प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से कर्मचारियों के वेतन से नियमित कटौती होने के बावजूद राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत निजी अस्पतालों में उपचार सुविधा लगभग ठप हो चुकी है। इसका सबसे अधिक असर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ रहा है। कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसे गंभीर मरीज इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इसके अलावा वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी समर्पित अवकाश (Surrendered Leave) का नकद भुगतान नहीं किया जाना भी कर्मचारियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। महासंघ ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल भुगतान की मांग की है।
आंदोलन के प्रथम चरण के तहत 5 मई 2026 से प्रदेशभर के कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर काम करेंगे। इसके साथ ही प्रतिदिन एक घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं की गंभीरता समझनी होगी।
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महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आगामी चरणों में उग्र प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इससे प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है कि वह कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय ले।