Rajasthan: RGHS में करोड़ों का घोटाला उजागर, फर्जी जांच से सरकार को लगाया चूना, डॉक्टर और लैब संचालक गिरफ्तार
राजस्थान की RGHS योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। एसओजी ने सीकर के एक डॉक्टर और लैब संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि फर्जी जांच रिपोर्ट और क्लेम के जरिए सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
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राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जांच के बाद एक डॉक्टर और एक लैब संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने मिलीभगत कर फर्जी जांच रिपोर्ट और परामर्श पर्चियों के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि यह योजना आमजन और सरकारी कर्मचारियों को नि:शुल्क एवं सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन कुछ डॉक्टरों और लैब संचालकों की मिलीभगत से इसका दुरुपयोग किया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि सीकर स्थित बी. लाल लैब के संचालक डॉ. बनवारी लाल उर्फ बी. लाल और एस.के. अस्पताल, सीकर में पदस्थापित डॉ. कमल कुमार अग्रवाल उर्फ के.के. अग्रवाल ने अन्य लोगों के साथ मिलकर आरजीएचएस योजना में फर्जी क्लेम तैयार किए। एसओजी ने 4 मई 2026 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- डॉ. कमल कुमार अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर (ऑर्थो), एस.के. अस्पताल, सीकर
- डॉ. बनवारी लाल उर्फ बी. लाल, संचालक, बी. लाल लैब, सीकर
जांच में कई चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं। आरोपियों पर बिना मरीज को देखे फर्जी परामर्श पर्चियां बनाने और अनावश्यक महंगी जांचें लिखने का आरोप है। इन जांचों की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड की जाती थी और सरकार से भुगतान लिया जाता था।
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- बिना इलाज या परामर्श के फर्जी पर्चियां बनाकर पोर्टल पर अपलोड करना
- सामान्य एमआरआई को “कॉन्ट्रास्ट एमआरआई” दिखाकर अधिक भुगतान लेना
- एक जांच को कई जांच बताकर अतिरिक्त क्लेम उठाना
- डॉक्टर की अनुपस्थिति वाले दिन भी फर्जी परामर्श दिखाना
- रिपोर्ट की तारीख बदलकर भुगतान हासिल करना
- निजी डॉक्टर के रेफरल को सरकारी डॉक्टर के नाम से दिखाना
जांच के दौरान एक मामले में मरीज की एमआरआई रिपोर्ट की तारीख बदलकर सरकारी डॉक्टर की पर्ची के आधार पर भुगतान लेने का खुलासा हुआ, जबकि मरीज उस दिन सीकर आया ही नहीं था।
एक अन्य मामले में मरीज किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती था, लेकिन उसके नाम पर फर्जी जांच रिपोर्ट अपलोड कर क्लेम लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित दिन डॉक्टर अस्पताल में मौजूद ही नहीं थे।
सरकार को करोड़ों का नुकसानएसओजी के अनुसार इस संगठित फर्जीवाड़े से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि हुई है। साथ ही जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले ने आरजीएचएस जैसी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच जारी, और लोगों की भूमिका की पड़ताल
एसओजी ने बताया कि मामले में अन्य डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।