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बिलासपुर: दो महीने मछली पकड़ने पर रोक, फिर भी नहीं रुकेगी मछुआरों की कमाई की चिंता; सरकार दे रही ₹3500 की सम्मान निधि
गोबिंद सागर झील समेत जिले के जलाशयों में मछली पकड़कर परिवार चलाने वाले मछुआरों के लिए मछली पकड़ने पर लगने वाला दो महीने का प्रतिबंध अब पहले जैसी आर्थिक परेशानी नहीं लाएगा। मछली के प्रजनन और संरक्षण के लिए 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर रोक रहती है। इस दौरान आय का प्रमुख जरिया बंद होने से मछुआरा परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता था। अब प्रदेश सरकार की मछुआरा सम्मान निधि योजना इस अवधि में परिवारों को आर्थिक संबल दे रही है।
योजना के तहत पात्र मछुआरा परिवारों को प्रतिबंधित अवधि के दौरान 3500 रुपये की सम्मान राहत राशि दी जा रही है। बिलासपुर जिले में करीब 1500 मछुआरा परिवारों को 52 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। मछुआरा समुदाय इसे केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उनके श्रम और योगदान के सम्मान के तौर पर भी देख रहा है।
मछुआरों के लिए जून से अगस्त तक का प्रतिबंधित समय आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहता है। मछली पकड़ने का काम बंद होने के कारण परिवार की नियमित आमदनी प्रभावित होती है। ऐसे में 3500 रुपये की राहत राशि से उन्हें इस अवधि में कुछ आर्थिक सहारा मिल रहा है।
झंडूता विकास खंड की दाड़ी-भाड़ी मत्स्य सोसायटी के विक्रेता गुरदास करीब 40 से 45 वर्षों से मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऑफ सीजन में दो महीने काम बंद रहने से परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती थी।
गुरदास के अनुसार, मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में पहली बार मछुआरों के लिए ऐसी योजना शुरू की गई है, जिससे प्रतिबंधित अवधि में परिवार की रोजी-रोटी की चिंता कम हुई है।
गुरदास ने मछुआरों के हित में रॉयल्टी दर 15 फीसदी से घटाकर एक फीसदी किए जाने को भी बड़ा फैसला बताया। उनके अनुसार इससे मछली पकड़ने के काम से जुड़े लोगों को आर्थिक राहत मिली है।
योजना और रॉयल्टी में बदलाव को मछुआरा समुदाय अपने काम और आय से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों के तौर पर देख रहा है।
स्वारघाट विकास खंड की ज्योर मत्स्य सोसायटी से जुड़े चेतराम भी लंबे समय से मछली पकड़ने के काम से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1978 से गोबिंद सागर झील में मछली पकड़ रहे हैं और इसी आय से परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं।
चेतराम ने कहा कि रॉयल्टी को एक फीसदी किए जाने और ऑफ सीजन में 3500 रुपये की सम्मान निधि मिलने से मछुआरा परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
बिलासपुर जिले में 1500 के करीब मछुआरा परिवारों तक 52 लाख रुपये से अधिक की सहायता पहुंचना योजना के प्रभाव को बताता है। प्रतिबंधित दो महीने की अवधि में मिलने वाली यह राशि उन परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बन रही है, जिनकी आय सीधे मछली पकड़ने के काम पर निर्भर है।
मछुआरा समुदाय के अनुसार, आर्थिक सहायता के साथ रॉयल्टी में कमी जैसे फैसले उनके पारंपरिक काम को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं।
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