Hindi News
›
Video
›
Haryana
›
Yamuna Nagar News
›
Yamunanagar: Anganwadi workers stage a protest against the GPS system, demanding government employee status.
{"_id":"6aa92e0d1d85612e3506c9d6","slug":"video-yamunanagar-anganwadi-workers-stage-a-protest-against-the-gps-system-demanding-government-employee-status-2026-09-15","type":"video","status":"publish","title_hn":"यमुनानगर: जीपीएस व्यवस्था के विरोध में आंगनबाड़ी वर्करों का धरना, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमुनानगर: जीपीएस व्यवस्था के विरोध में आंगनबाड़ी वर्करों का धरना, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
यमुनानगर।
जीपीएस व्यवस्था लागू करने के विरोध में आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर यूनियन का सीडीपीओ कार्यालय के बाहर धरना सोमवार को भी जारी रहा। धरने की अध्यक्षता जिला उपप्रधान अंग्रेजो देवी ने की। प्रदर्शनकारी वर्करों और हेल्परों ने सरकार के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि यदि सरकार उन पर समय की पाबंदी और जीपीएस व्यवस्था लागू करना चाहती है तो पहले उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार उन्हें समाजसेविका बताती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों जैसी निगरानी की जा रही है।
समाजसेविका हैं तो जीपीएस की पाबंदी क्यों
ब्लॉक प्रधान जगाधरी सुनीता, जिला उपप्रधान अंग्रेजो देवी व रीटा कत्याल और जिला प्रेस प्रवक्ता रितू गुप्ता ने कहा कि जब आंगनबाड़ी वर्कर सरकार से ग्रेड देने की मांग करती हैं तो उन्हें समाजसेविका बताया जाता है। ऐसे में उन पर समय की पाबंदी और जीपीएस की व्यवस्था लागू करने का क्या औचित्य है। उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर इस तरह की जीपीएस व्यवस्था लागू नहीं है तो आंगनबाड़ी वर्करों पर इसे क्यों थोपा जा रहा है। जीपीएस व्यवस्था लागू करनी है तो पहले वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। इसके बाद अधिकारियों से लेकर वर्करों तक सभी पर समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
5जी फोन का दावा, दिए 3जी फोन
वर्करों ने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें 5जी फोन उपलब्ध कराने की बात कही थी, लेकिन उन्हें 3जी फोन दिए गए। इसके बावजूद उनसे ऑनलाइन और अन्य बड़े स्तर के काम लिए जा रहे हैं। पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण काम पूरा करने में परेशानी होती है। वर्करों ने सरकार से मांग की कि काम के अनुसार उन्हें पर्याप्त सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध करवाए जाएं।
कुसुम, सुरजीत, पायल, सिमरन, कमलेश, रेनू बाला, माधुरी, ज्योति, सुरूचि, वंदना, निर्मल, सुधा, रूमन, आशा, श्वेता, आरती, सुमित, राजरानी, गुलशन, अनीता और रवि सहित अन्य वर्कर व हेल्पर ने कहा कि विभाग की और से चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी वर्करों ने खराब बताई। उनके अनुसार इन भवनों का किराया तीन से चार हजार रुपये तक है, लेकिन विभाग से किराये की राशि समय पर नहीं आती। कई-कई महीने भुगतान लंबित रहने पर वर्कर और हेल्पर आपस में राशि जुटाकर मकान मालिक को किराया देती हैं। सुनीता देवी ने सवाल उठाया कि जब वर्कर अपनी जेब से भुगतान करती हैं तो विभाग किराये की राशि सीधे भवन मालिक के खाते में क्यों भेजता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।