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ITI building in Hansi's Sisay ready for 10 years, yet classes have not started; villagers submit memorandum to the DC.
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हांसी के सिसाय में 10 साल से ITI भवन तैयार, फिर भी शुरू नहीं हुई कक्षाएं; ग्रामीणों ने DC को सौंपा ज्ञापन
हांसी। हरियाणा के हांसी जिले का सिसाय गांव ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ अपने विशाल क्षेत्रफल के लिए भी जाना जाता है। क्षेत्रफल के मामले में इसे हरियाणा का सबसे बड़ा गांव माना जाता है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव को पहलवानों की धरती भी कहा जाता है। हिंद केसरी पहलवान मास्टर चंदगीराम इसी गांव से थे। इसके अलावा गांव की कई बेटियों ने भी कुश्ती और अन्य खेलों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
आपको बता दे कि सिसाय गांव मुख्य रूप से सिसाय कालिरामण और सिसाय बोलान दो पानों में बंटा हुआ है। लेकिन गांव के सिसाय बोलान हिस्से में करीब 10 साल पहले बनाई गई आईटीआई आज तक शुरू न हो पाने का आरोप है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर आईटीआई की बिल्डिंग बनाई गई थी, वह गांव ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि यहां गांव और आसपास के युवाओं को तकनीकी शिक्षा मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। लेकिन दस साल बीतने के बाद भी आईटीआई का संचालन शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से बंद पड़ी बिल्डिंग अब जर्जर होती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर आईटीआई को जल्द शुरू करवाने की मांग की।
गांव निवासी सेना से रिटायर्ड पूर्व सूबेदार कृष्ण सिहाग ने कहा कि आईटीआई के लिए गांव ने अपनी जमीन दी थी। जमीन देने का मकसद यही था कि गांव के बच्चे पढ़ेंगे, तकनीकी शिक्षा हासिल करेंगे और आगे बढ़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 10 साल बीत जाने के बावजूद आईटीआई शुरू नहीं हुई। कृष्ण सिहाग ने कहा कि बिल्डिंग खाली पड़ी है और कोई भी मौके पर जाकर इसकी स्थिति देख सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि खाली पड़ी बिल्डिंग में असामाजिक गतिविधियां और नशा करने वालों का जमावड़ा होने की शिकायतें हैं।
ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा में सुधार की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ गांव में 10 साल पहले तैयार की गई आईटीआई का संचालन नहीं हो पाया है। उन्होंने प्रशासन से मौके का अचानक निरीक्षण करवाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण उपायुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंप रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांग को गंभीरता से लेगा। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आगे की रणनीति तय करेंगे।
वहीं राजेंद्र सोरखी ने कहा कि आईटीआई शुरू नहीं होने के कारण ग्रामीण पिछले 10 वर्षों से परेशान हैं। कई बार समस्या उठाने के बावजूद अभी तक समाधान नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की। वही रणबीर लोहान ने कहा कि आईटीआई को अब और इंतजार करवाने के बजाय जल्द शुरू किया जाना चाहिए। लंबे समय से बंद पड़ी बिल्डिंग जर्जर हो रही है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो सरकारी भवन और अधिक खराब हो जाएगा।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन आईटीआई भवन का निरीक्षण करवाए, इसकी स्थिति की जांच करे और 10 साल से बंद पड़े संस्थान को जल्द से जल्द शुरू करवाकर गांव के युवाओं को तकनीकी शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराए।
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