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Hisar News: मैदान मिला तो कोच नहीं, कोच मिला तो मैदान नहीं
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हिसार के महाबीर स्टेडियम में बना स्केटिंग मैदान। अमर उजाला
हिसार। जिले के खेल विभाग में अव्यवस्था के चलते खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई खेलों में या तो कोच उपलब्ध नहीं हैं या अभ्यास के लिए मैदान और जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। इससे खिलाड़ियों को अपनी खेल क्षमता निखारने के लिए निजी तौर पर खर्च करना पड़ रहा है और उनकी खेल प्रतिभा प्रभावित हो रही है।
स्केटिंग के लिए महाबीर स्टेडियम में मैदान उपलब्ध है लेकिन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए कोच नहीं है। वहीं तैराकी, साइकिलिंग, फुटबाल और क्रिकेट के प्रशिक्षित कोच तो हैं लेकिन इन खेलों के लिए उपयुक्त मैदान या अन्य सुविधाओं का अभाव है। इससे कोच की उपलब्धता का पूरा लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा।
महाबीर स्टेडियम में मुख्य रूप से एथलेटिक्स मैदान है। यहां क्रिकेट और फुटबाल खेलने के दौरान किनारे बनी नालियों में गेंद गिरने से उसके भीगने का खतरा रहता है। पिछले साल कई माह तक जलभराव रहा था जबकि इस साल नालियों में पानी भरा हुआ है। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) ने भी कई खेल संसाधन जुटाए हैं लेकिन अपंजीकृत खिलाड़ियों को वहां अभ्यास की अनुमति नहीं मिल पाती।
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निजी खर्च पर निर्भर खिलाड़ी
निशानेबाजी, तीरंदाजी, तलवारबाजी, गोल्फ, घुड़सवारी, स्कीइंग, पर्वतारोहण, कयाकिंग और केनोइंग जैसी जलक्रीड़ाओं के खिलाड़ियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन खेलों के लिए विभाग की ओर से सुविधा या कोच उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को निजी अकादमियों या दूरदराज के शहरों में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और गरीब पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों के लिए खेल जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
खेल प्रतिभाओं का भविष्य अधर में
उचित प्रशिक्षण और सुविधाओं के अभाव में कई खिलाड़ी अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय खेल संघों और अभिभावकों ने विभाग से समस्याओं के समाधान की मांग की है। गांव डाबड़ा और धान्सू के ग्रामीण कई बार विभागीय अधिकारियों को मांगपत्र दे चुके हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि सात मैदानों का सुधार किया जा चुका है और चार अन्य मैदानों को सुधारने की तैयारी है।
विभाग की ओर से दो नए प्रशिक्षकों की तैनाती
खेल विभाग मुख्यालय ने जिले के लिए दो प्रशिक्षकों की तैनाती के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत फुटबाल कोच दीपिका और पेंचक सिलाट प्रशिक्षक सिमरन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देंगी। सुरेश, प्रमोद, रोशनी, कविता और सुमन समेत ग्रामीण खिलाड़ियों ने कहा कि विभागीय ढांचा खंडस्तर तक बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि नवसृजित हांसी जिले में अब तक विभागीय कार्यालय तक नहीं खोला जा सका है।
खिलाड़ियों को हरसंभव सुविधा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। जिले की 200 खेल नर्सरियों में पंजीकृत करीब 5,000 खिलाड़ियों को विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। ग्रेडेशन और कैश अवॉर्ड भी दिलाए जा रहे हैं। इस साल बास्केटबाल का नया कोर्ट बनाया गया है। विधायक सावित्री जिंदल के सहयोग से नए वाटर कूलर लगाए गए हैं। जर्जर खंभे और भवन हटाकर ग्रामीण क्षेत्रों के राजीव गांधी खेल मैदानों की भी मरम्मत करवाई जा रही है।
- नरेश कुमार, जिला खेल अधिकारी, हिसार।
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स्केटिंग के लिए महाबीर स्टेडियम में मैदान उपलब्ध है लेकिन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए कोच नहीं है। वहीं तैराकी, साइकिलिंग, फुटबाल और क्रिकेट के प्रशिक्षित कोच तो हैं लेकिन इन खेलों के लिए उपयुक्त मैदान या अन्य सुविधाओं का अभाव है। इससे कोच की उपलब्धता का पूरा लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल पा रहा।
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महाबीर स्टेडियम में मुख्य रूप से एथलेटिक्स मैदान है। यहां क्रिकेट और फुटबाल खेलने के दौरान किनारे बनी नालियों में गेंद गिरने से उसके भीगने का खतरा रहता है। पिछले साल कई माह तक जलभराव रहा था जबकि इस साल नालियों में पानी भरा हुआ है। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) ने भी कई खेल संसाधन जुटाए हैं लेकिन अपंजीकृत खिलाड़ियों को वहां अभ्यास की अनुमति नहीं मिल पाती।
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निजी खर्च पर निर्भर खिलाड़ी
निशानेबाजी, तीरंदाजी, तलवारबाजी, गोल्फ, घुड़सवारी, स्कीइंग, पर्वतारोहण, कयाकिंग और केनोइंग जैसी जलक्रीड़ाओं के खिलाड़ियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन खेलों के लिए विभाग की ओर से सुविधा या कोच उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिलाड़ियों को निजी अकादमियों या दूरदराज के शहरों में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और गरीब पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों के लिए खेल जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
खेल प्रतिभाओं का भविष्य अधर में
उचित प्रशिक्षण और सुविधाओं के अभाव में कई खिलाड़ी अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय खेल संघों और अभिभावकों ने विभाग से समस्याओं के समाधान की मांग की है। गांव डाबड़ा और धान्सू के ग्रामीण कई बार विभागीय अधिकारियों को मांगपत्र दे चुके हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि सात मैदानों का सुधार किया जा चुका है और चार अन्य मैदानों को सुधारने की तैयारी है।
विभाग की ओर से दो नए प्रशिक्षकों की तैनाती
खेल विभाग मुख्यालय ने जिले के लिए दो प्रशिक्षकों की तैनाती के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत फुटबाल कोच दीपिका और पेंचक सिलाट प्रशिक्षक सिमरन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देंगी। सुरेश, प्रमोद, रोशनी, कविता और सुमन समेत ग्रामीण खिलाड़ियों ने कहा कि विभागीय ढांचा खंडस्तर तक बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि नवसृजित हांसी जिले में अब तक विभागीय कार्यालय तक नहीं खोला जा सका है।
खिलाड़ियों को हरसंभव सुविधा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। जिले की 200 खेल नर्सरियों में पंजीकृत करीब 5,000 खिलाड़ियों को विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। ग्रेडेशन और कैश अवॉर्ड भी दिलाए जा रहे हैं। इस साल बास्केटबाल का नया कोर्ट बनाया गया है। विधायक सावित्री जिंदल के सहयोग से नए वाटर कूलर लगाए गए हैं। जर्जर खंभे और भवन हटाकर ग्रामीण क्षेत्रों के राजीव गांधी खेल मैदानों की भी मरम्मत करवाई जा रही है।
- नरेश कुमार, जिला खेल अधिकारी, हिसार।