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VIDEO: नैय्या नाले के उफान से स्कूलों में भरा पानी, गांवों को आने वाले रास्ते भी हुए जलमग्न
हलोर (रायबरेली)। लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित हुलासखेड़ा झील से निकलने वाले नैय्या नाले के उफनाने से जहां दर्जनों गांवों को आने जाने वाले रास्ते जलमग्न हो गए हैं, वहीं इन गांवों में बने स्कूलों में भी पानी भर गया है। जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। महराजगंज ब्लाक क्षेत्र के कम्पोजिट विद्यालय अलीपुर, प्राथमिक विद्यालय मंझिगवां, प्राथमिक विद्यालय अकबरगंज, बसकटा, कुसुढ़ी सागरपुर समेत आधा दर्जन स्कूलों में पानी भर गया है। स्कूल परिसर व वहां आने-जाने वाले रास्तों पर जलभराव से अब छात्रों की उपस्थित बेहद कम हो गई है।
अलीपुर स्कूल के शिक्षक श्रीकांत यादव ने बताया कि यहां डेढ़ सौ छात्र पंजीकृत हैं। आसपास के गांव पहाड़गंज, मंझिगवां, कटरा, जंगलिन, ढकिया, आदि गांवों से आने वाले रास्तों पर दो फिट से अधिक जलभराव होने से छात्रों की उपस्थित प्रभावित हो गई है। प्राथमिक विद्यालय अकबरगंज के शिक्षक संदीप कुमार ने बताया यहां 42 छात्र पंजीकृत हैं। शिवगढ़ ड्रेन के उफनाने से रास्ते डूब गए हैं। जिससे छात्रों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है। कम्पोजिट विद्यालय कुसुढ़ी सागरपुर की प्रधानाध्यापक सावित्री दीवान का कहना है कि उनके यहां बसकटा, जमुरंवा, पुरासी, सुखलिया आदि गांवों के छात्र आते हैं। यहां कुल 120 छात्र पंजीकृत हैं।
स्कूल परिसर में पानी जमा होने से प्रार्थना खड़ंजे पर ही कराई जाती है। हालांकि पठन पाठन के लिए कक्षा कक्ष सुरक्षित है। प्राथमिक विद्यालय बसकटा की प्रधानाध्यापक आरती जायसवाल ने बताया कि उनके यहां 30 छात्र नामांकित हैं। स्कूल परिसर में हल्का फुल्का जलभराव रहता है। अधिक पानी भरने पर पाइप से निकल जाता है। शिक्षकों ने बताया कि सत्र परीक्षा चल रही है, इस वजह से उपस्थित पर्याप्त है। परंतु अगर परिसर से पानी नहीं कम उठा तो परीक्षा के बाद उपस्थित घट जाएगी।
खण्ड शिक्षा अधिकारी राममिलन यादव का कहना है कि जलभराव वाले स्कूलों को सावधानी व छात्रों की सुरक्षा के दिशा निर्देश दिए गए हैं। ऐसे जलभराव वाले स्कूलों को चिन्हित कर कायाकल्प व मिट्टी भराई के लिए खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय को रिपोर्ट भेजी गई है।
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