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अयोध्या: कारसेवकपुरम सभागार में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के 62वें स्थापना दिवस
नरेंद्र आर्य
Updated Mon, 07 Sep 2026 07:30 PM IST
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कारसेवकपुरम सभागार में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद के 62वें स्थापना दिवस पर मुख्यवक्ता एवं विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने कहा कि देश के 15 हजार से अधिक संतों ने जब हिन्दू पर से आलस्य की राख हटाई उसकी परिणिति श्रीराम जन्म भूमि मंदिर के रूप में हुई।
इस अवसर पर विभिन्न वेद एवं संस्कृत विद्यालय के बटुकों को विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना का कारण एवं कार्यप्रणाली की जानकारी दी।
चम्पत राय ने कहा कि हिन्दू को किसी एक परिभाषा, वेष या पूजा पद्धति में नहीं बांधा जा सकता है।
हमारे त्योहार, उत्सव हमें एक सूत्र में पिरोते हैं। बीते 200 वर्ष की चर्चा करते हुए बताया कि एक समाज ऐसा भी है जिसे अंग्रेज पानी के जहाज में भरकर विश्व के विभिन्न समुद्री टापुओं पर मजदूरी कराने ले गए और वहीं छोड़ दिया। वे लोग अपने साथ गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस या गीता लेकर गए।
उसी पुस्तक ने उन्हें आज भी हिन्दुत्व से जोड़ रखा है। वे भारत की धरती से दूर हैं, हिन्दी नहीं जानते पर स्वयं को हिन्दू मानते हैं। मॉरिशस, त्रिनिडाड, म्यामार, सूरीनाम, फिजी कुछ ऐसे ही देश हैं जहां वे आज राज सत्ता संभाल रहे हैं और स्वयं को हिन्दू भी मानते हैं।
श्रीराय ने बताया कि गुरु गोलवलकर जी के मन में विचार आया कि विश्व के समस्त हिन्दुओं को एक सूत्र में बांधने के लिए एक गैर राजनीतिक संगठन बने जो हिन्दुओं की भलाई के काम करे।
वर्ष 1964 की जन्माष्टमी के दिन सांदीपनी साधनालय मुंबई स्वामी चिन्मयानंद जी के आश्रम में इस विश्व हिन्दू परिषद नामक संस्था की नींव पड़ी। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से हिन्दू समाज में धर्मान्तरण रोकना, परावर्तन, छुआछूत की कुरीति दूर करना साक्षर, संस्कारवान व आर्थिक रूप से विकसित बनाना रखे गए।
यह संगठन आज भारत के 75 हजार से अधिक गांवों शहरों के अलावा विश्व के 25 देशों में वहां के कायदे कानून मानते हुए काम कर रहा है। इसके लिए मार्ग दर्शक संतों को बनाया गया।15 हजार संतों ने देश में जो अलख जगाई उसका परिणाम श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के रूप में देखने को मिल रहा है।
कार्यक्रम का प्रारंभ रामवल्लभा कुंज के महंत राजकुमार दास व चम्पत राय ने भारत माता तथा राम परिवार के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री हरिशंकर ने विषय अवधारणा प्रस्तुत की। इस अवसर पर महानगर संघ चालक विक्रमा प्रसाद पाण्डेय, कारसेवकपुरम प्रभारी शिवदास सिंह, क्षेत्रीय गो सेवा प्रमुख प्रेमशंकर भारद्वाज, उमेश पोरवाल, वीरेंद्र वर्मा, वेद विद्यालय के समस्त आचार्य, उपस्थि रहे। महंत राजकुमार दास जी ने आशीर्वचन में कहा कि हमें एक ही प्रयास में चिंतन करना चाहिए कि “तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें”। संचालन आचार्य ऋषभ व प्रदीप ने किया। विद्यालय के बटुकों ने मंगला चरण प्रस्तुत किया।
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