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सीजेपी के बहाने जेन जी पर नजर: यूपी में पार्टियों ने बदली रणनीति; सपा ने बनाया नया प्लान, बसपा को हाईजैक का डर
Mon, 07 Sep 2026 05:56 PM IST
प्रशांत तिवारी
अजीत खरे, अमर उजाला
अजीत खरे, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Mon, 07 Sep 2026 05:56 PM IST
सार
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सीजेपी के छात्र-युवा आंदोलन को लेकर सियासी दलों में सक्रियता बढ़ गई है। सपा सीजेपी के जरिए जेन जी वोटरों को साधने की कोशिश में है, जबकि बसपा आंदोलन के ‘हाईजैक’ होने की आशंका जता रही है। चंद्रशेखर आजाद खुलकर समर्थन कर रहे हैं और कांग्रेस भी मुद्दों के समर्थन में दिख रही है। भाजपा सरकार सीजेपी नेताओं से संवाद कर युवाओं की नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रही है।
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अमर उजाला ग्राफिक्स
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गैर सियासी मंच के जरिए सियासत साधने की होड़ शुरू हो गई है। इसका बड़ा असर सबसे बड़े चुनावी अखाड़े यूपी में दिखेगा। समाजवादी पार्टी की जहां कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के छात्र- युवा आंदोलन से नजदीकी दिखने लगी है, वहीं बहुजन समाज पार्टी इसे युवा आंदोलन को हाईजैक किया जाना बता रही है। इस वर्ग के बीच दलित वोटर तलाशने वाले भी पीछे नहीं हैं।
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अभी खुल कर सामने की हिचक
विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही दावेदार छात्रों व युवाओं को साधने की कोशिश में लगे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी की सियासी अहमियत व उसकी आगे की रणनीति को समझा- तौला जा रहा है। दावेदारों को अहसास हो रहा है कि इस गैर राजनीतिक मंच से निकटता का संदेश अगर युवा वोटरों में चला गया तो उन्हें इसका फायदा चुनावी अखाड़े में हो सकता है। अभी खुल कर सामने की हिचक है, इसलिए पर्दे के पीछे भी मेल मुलाकात का खेल चल रहा है। खास बात यह कि सीजेपी के आंदोलन में स्वत: स्फूर्त जय भीम का नारा लगता रहता है, वहीं तमाम युवा प्रदर्शनकारी डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर व संविधान की प्रतियां भी लिए दिखते हैं। इस आधार पर तमाम पार्टियां इसमें दलित वर्ग का समर्थन तलाश रही हैं।
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कोई कर रहा समर्थन तो किसी ने की बैठक
इस मुहिम में समाजवादी पार्टी सबसे आगे है तो बहुजन समाज पार्टी अब जेन-जी व जेन-अल्फा की बात करते करते सीजेपी के प्रति हमदर्दी दिखाती दिख रही है। वहीं आजाद समाज पार्टी- कांशीराम के प्रमुख व उत्तरप्रदेश की नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद तो इसका पूरा साथ दे रहे हैं। कांग्रेस ने भले जंतर मंतर के आंदोलन से दूरी बनाई लेकिन बाद में सीजेपी के आंदोलन व मुद्दों का समर्थन करती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी की केंद्र की सरकार तो बकायदा इस पार्टी के नेताओं से मुलाकात व बैठकें कर उन्हें विश्वास में लेने व उनकी मांगो को पूरा करने का काम कर रही है ताकि युवाओं की नाराजगी खत्म की जा सके।
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आंदोलन के हाईजैक की आशंका
बसपा तो इस बात से चिन्तित है कि सीजेपी के आंदोलन को कुछ दलों ने हाईजैक कर लिया है, उसका इशारा उसकी धुर विरोधी समाजवादी पार्टी की ओर खास तौर पर है। बसपा प्रमुख मायावती अब खुल कर जेन जी व जेन अल्फा की बात कर उनके सम र्थन में बयान तो जारी कर रही हैं, साथ ही इस वर्ग के लिए अपनी पिछली सरकारों में किए गए कामों की भी याद दिला रही हैं।
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सीजेपी से समर्थन की चाहत
आगामी चुनाव में सपा सीजेपी के जरिए परोक्ष रूप से सम र्थन चाहती है कि इसके लिए जरूरी है कि सीजेपी अपना आंदोलन की धार तेज रखे। काकरोच जनता पार्टी के नेता पिछले दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लखनऊ में आकर मिले और करीब दो घंटे लंबी बैठक हुई। हालांकि सीजेपी तो इस चर्चा का विषय युवाओं की बेरोजगारी, शिक्षा में सुधार आदि बता रही है। सपा चाहती है कि यूपी के जेन जी वोटर सपा कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में आ जाएं।