सीहोर के अरनिया पठार गांव की काली रात में सोमवार रात करीब 2 बजे एक महिला की कराहती आवाज गूंज रही थी। गर्भवती सरिता प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। घबराए परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन जर्जर सड़क और पथरीले रास्तों के आगे सरकारी व्यवस्था ने हार मान ली। एंबुलेंस गांव से करीब दो किलोमीटर पहले ही रुक गई।
साड़ी बनी सहारा, कंधे बने पहिए
उस वक्त न कोई वाहन था, न रोशनी सिर्फ अंधेरा, कीचड़ और पथरीला रास्ता। मजबूर परिजनों और ग्रामीणों ने साड़ी की झोली बनाई, जिसमें सरिता को लिटाया गया। चार लोगों के कंधे इस “अस्पताल” के पहिए बने और टॉर्च की हल्की रोशनी में पथरीले, ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार कर एंबुलेंस तक पहुंचे।
अस्पताल में डॉक्टर नहीं, दर्द का सिलसिला जारी
एंबुलेंस सरिता को सिद्धिगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई, लेकिन वहां न डॉक्टर था, न नर्स। मौत से जूझते हुए इलाज का दरवाजा बंद मिलना किसी भी इंसान के लिए सबसे भयावह अनुभव है। आखिरकार उसे आष्टा सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां सुबह होते-होते उसने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
घर लौटते वक्त भी नहीं मिला सहारा
खुशी के इस पल में भी बदहाली का जहर घुला रहा। अस्पताल से छुट्टी के बाद 108 एंबुलेंस कर्मियों ने घर छोड़ने के लिए 500 रुपये मांगे। जब परिजनों ने वजह पूछी, तो जवाब मिलालाने का पैसा नहीं लगता, छोड़ने के पैसे लगते हैं। मजबूरन सरिता को फिर पैदल और कंधों के सहारे घर लाना पड़ा।
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गांव की पुरानी पीड़ा
अरनिया पठार निवासी केदार सिंह, सरिता के पति, ने बताया कि सोमवार रात 2 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को फोन किया, जो सुबह 4 बजे पीथापुरा रोड पर पहुंची। एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए परिजनों को साड़ी की झोली में सरिता को उठाकर जंगल और खराब रास्तों से गुजरना पड़ा। गांव के बुजुर्ग बताते हैं, यह पहली घटना नहीं है। सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण कई गर्भवती महिलाएं समय पर इलाज न मिलने से दम तोड़ चुकी हैं। शिकायतें विधायक से लेकर प्रशासन तक गईं, लेकिन जवाब में सिर्फ खामोशी और आश्वासन मिला।
वायरल वीडियो ने जगाई टीस
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आजादी के बाद भी क्यों एक मां को जिंदगी देने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है? अरनिया पठार की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की है, जो कागजों पर चमकता है, लेकिन जमीनी हकीकत में दम तोड़ देता है।