रतलाम शहर सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सावन माह के दूसरे सोमवार को झमाझम बारिश हुई। रतलाम शहर और सैलाना में जोरदार बारिश के चलते निचले इलाकों में पानी भर गया। वहीं, सैलाना के अडवानिया क्षेत्र में स्थित प्राचीन केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना भी बहने लगा। झरने का नजारा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सावन सोमवार होने के कारण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। चारों तरफ हरियाली और झरने के बहने का प्राकृतिक नजारा श्रद्धालुओं को आकर्षित करता रहा।
रतलाम में करीब दो इंच बारिश
रतलाम जिले में इस साल मानसून विलंब से आया है और अब तक बारिश भी कम हुई है। जिले में अभी तक मात्र 15.02 इंच बारिश हुई है, जबकि गत वर्ष इस अवधि तक 22.42 इंच बारिश हो चुकी थी। इस वर्ष पिछले साल की तुलना में 7.32 इंच बारिश कम हुई है। पिछले दो सप्ताह से रुक-रुककर कभी रिमझिम तो कभी बूंदाबांदी हो रही थी और फसलों को तेज बारिश का इंतजार था। सोमवार को तेज बारिश का इंतजार खत्म हुआ। सुबह करीब छह बजे से दोपहर एक बजे तक रुक-रुककर तेज बारिश होती रही। इससे रतलाम शहर के घास बाजार, ओझाखाली, न्यू रोड और दो बत्ती क्षेत्र सहित कई इलाकों की सड़कों पर पानी भर गया। लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
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तेज बारिश से शहर तरबतर हो गया और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। दोपहर बाद रात आठ बजे तक रुक-रुककर रिमझिम बारिश होती रही। शहर में दिनभर में 49 मिलीमीटर यानी करीब दो इंच बारिश दर्ज की गई। उधर, जिले की सैलाना तहसील में भी जोरदार बारिश हुई। इससे नदी-नालों में पानी बह निकला और अडवानिया क्षेत्र स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना भी बहने लगा। झरने का नजारा देखते ही बनता है। ऊपर से नीचे गिरता पानी वहां पहुंचे श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस साल पहली बार झरने से पानी बहने लगा है। पिछले साल 28 जुलाई 2025 को हुई जोरदार बारिश के बाद भी झरना बह निकला था और भारी बारिश के कारण उसने रौद्र रूप धारण कर लिया था।
चट्टानों से रिसकर झरने की शक्ल में गिरता है पानी
रतलाम शहर से करीब 24 किलोमीटर दूर कल्याण-केदारेश्वर और शिवगढ़ मार्ग पर ग्राम अडवानिया क्षेत्र में स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना बारिश के मौसम में आकर्षण का केंद्र बना रहता है। बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्र में चारों ओर हरियाली की चादर छा गई है, जिसे निहारने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से घिरी इस जगह पर आसपास की चट्टानों से रिसता पानी इकट्ठा होता है और फिर झरने की शक्ल में मंदिर के आंगन में गिरता है। बारिश का पानी जब ऊंचाई से मंदिर के पास स्थित कुंड में गिरता है तो पानी की छोटी-छोटी बूंदें इंद्रधनुषी रंग बिखेरती हैं।
बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 290 साल पुराना है और इसका अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। यहां मौजूद शिवलिंग प्राकृतिक यानी स्वयंभू है। लोगों के अनुसार, यहां पहले केवल एक शिवलिंग हुआ करता था। वर्ष 1736 में सैलाना के महाराज जयसिंह ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया था। बाद में यह 'केदारेश्वर महादेव मंदिर' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 'केदारेश्वर महादेव मंदिर' में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि, वैशाख पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर मेले का आयोजन होता है। सावन महीने में बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री और भगवान भोले के भक्त यहां पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं। सोमवार को भी हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक किया।