दमोह शहर में होली के पर्व के लिए बाजार सज चुका है और तीन दिन ही शेष हैं। घंटाघर, बकौली चौराहा, कचौरा बाजार, उमा मिस्त्री की तलैया और टाउन हाल जैसे प्रमुख स्थानों पर रंग, गुलाल और पिचकारियों की दुकानें सज गई हैं। इस बार बच्चों के लिए लेटेस्ट ट्रेंड में वाटर गन, टैंक गन, एके-47 गन, हथौड़ा और फरसा जैसी पिचकारियां खासतौर पर आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा, डोरीमान, स्पाइडर मैन और आयरन मैन जैसे कार्टून किरदारों वाली पिचकारियां भी बच्चे खरीद रहे हैं।
इस बार स्कूल बैग के आकार की टैंकर पिचकारी आई है, जिसमें बच्चे पानी भरकर पिचकारी चला सकते हैं। इसकी कीमत लगभग 800 रुपये है। एके-47 बंदूक जैसी पिचकारी भी बाजार में उपलब्ध है, जिसकी कीमत 700 रुपये है। हथौड़ा और फरसा वाली पिचकारियां 80 से 150 रुपये में मिल रही हैं। इस बार बाजार में 10 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक की पिचकारियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा, बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के रंगीन टोपी और मुखौटे भी बिक रहे हैं।
विक्रेता शुभम असाटी के अनुसार, इस बार पानी के टैंक की कई नई वैरायटी उपलब्ध हैं, जिनमें छोटे बच्चों के लिए आधे से एक लीटर के टैंक शामिल हैं। इसके अलावा, इस बार पहली बार फायर गुलाल टैंक आया है, जो 3 किलो से लेकर 6 किलो तक के सिलेंडर में उपलब्ध है। इसकी कीमत 400 से 1200 रुपये तक है। यह टैंक धुएं के रूप में गुलाल फेंकता है और 5 से 8 फीट की दूरी तक रंगों को फैलाता है।
रंग-गुलाल की मांग में भी बदलाव आया है। पहले लोग एक-दूसरे पर रंग डालते थे, लेकिन अब गुलाल की मांग बढ़ गई है, खासकर हर्बल गुलाल की। विभिन्न कंपनियों के हर्बल गुलाल पैकेट 50 से 100 रुपये में मिल रहे हैं, जबकि खुला गुलाल 200 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है।
महंगाई का असर भी होली के बाजार पर नजर आ रहा है। पिचकारियों और रंग-गुलाल की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विक्रेताओं के अनुसार, इस बार स्वदेशी पिचकारियां ज्यादा बिक रही हैं।