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कुंडली के यह योग दिलाते है राजयोग, फ्री जन्मकुंडली बनवाएं और जानें क्या आपकी कुंडली में है यह योग ?
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दिल्लीः ऑनलाइन क्लास न कर पाने वाले बच्चों के लिए कांस्टेबल बने सहारा, मंदिर में ले रहे क्लास

दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों के लिए मदद का बड़ा हाथ बनकर सामने आया है। कांस्टेबल ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और जरूरतमंद...

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

किसान नेताओं ने कहा, जब तक नए कृषि कानून रद्द नहीं हो जाते जारी रहेगा धरना, अहिंसा परमो धर्म: के सिद्धांत रहेंगे डटे

नए कृषि कानूनों के विरोध में शुक्रवार को नौवें दिन भी किसान सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार इन कानूनों को रद्द नहीं करती आंदोलन जारी रहेगा। अपनी मांगे पूरी कराने के लिए वह किसी भी प्रकार से कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे यह आंदोलन इसी प्रकार शांतीपूर्वक चलता रहेगा। भले ही कई महीनों तक उन्हें यहां रहना पड़े। 

अमृतसर किसान संगठन के रवनीत सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं। इनसे किसानों का भला नहीं होगा, बल्कि उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस समय करीब एक लाख किसान सिंघु बॉर्डर पर मौजूद हैं। देश के कई राज्यों से उनको समर्थन मिल रहा है। यह एक देशव्यापी आंदोलन बन रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसानों का दिल्ली कूच करने का इरादा नहीं हैं। क्योकि सभी किसान कानून का पालन करते हुए ही उनकी मांगों को पूरी कराना चाहते हैं। 

किसान नेताओं का कहना था कि वह 6 महीने की रसद लेकर आएं हैं। इसलिए जब तक सरकार कानून वापस नहीं लेती। किसान इसी तरह बॉर्डर पर जमे रहेंगे। रवनीत ने कहा कि शनिवार को किसान संगठनों और सरकार के बीच होने वाली बैठक में जो निर्णय आएगा। उसके हिसाब से ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। 




अमृतसर किसान यूनियन के प्रधान बलवीर सिंह ने बताया कि नए कृषि बिल में  कंट्रैक्ट फार्मिंग वाले कानून से किसान की जमीन का मालिकाना हक खतरे में पड़ जाएगा। इससे कंट्रैक्ट और कंपनियों के बीच कर्ज का मकड़जाल फैलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस कानून में विवादों के निपटारा के लिए एसडीएम कोर्ट को ही अखिरी विकल्प बनाया है। उनकी मांग है कि उन्हें उच्च अदालतों में अपील का अधिकार मिलना चाहिए। नए कृषि कानूनों में काफी कमिया हैं। इसलिए यह वापस होने चाहिए। 

कई महीनों पहले बनाई गई थी आंदोलन की रूपरेखा
किसान नेताओं ने कहा कि इस आंदोलन की रूपरेखा महीनों पहले बना ली गई थी। इसके लिए घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया गया था।  साथ ही उन्हें इन नए अध्यादेश के विषय में भी समझाया गया था। 
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किसान आंदोलन किसान आंदोलन

फिर बिगड़ी दिल्ली- एनसीआर की हवा, गाजियाबाद, नोएडा व ग्रेटर नोएडा की वायु गंभीर श्रेणी में

पिछले कुछ दिनों से बहुत खराब श्रेणी में नीचले स्तर पर बनी हुई दिल्ली की हवा शुक्रवार को  48 अंकों की बढ़ोतरी के साथ फिर बिगड़ गई। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में शामिल गाजियाबाद, नोएडा ग्रेटर व नोएडा की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। शनिवार सुबह तक दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में भी पहुंच सकती है। हालांकि, शाम तक इसमें सुधार होने की संभावना है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शुक्रवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यह 341, बुधवार को 373, मंगलवार को 367, सोमवार को 318, रविवार को 256, शनिवार को 236 व शुक्रवार को 137 रहा था।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, पिछले 24 घंटों में दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में करीब 302 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई हैं, हालांकि इससे उत्पन्न होने वाले पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की प्रदूषण में कोई हिस्सेदारी दर्ज नहीं की गई, जबकि इससे एक दिन पहले 249 पराली जलाने की घटनाओं के साथ यह 2 फ़ीसदी और बुधवार को 316 घटनाओं के साथ 3 फ़ीसदी दर्ज की गई थी।

सफर के अनुसार, पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में भी पिछले 24 घंटों में इजाफा हुआ है। इस कड़ी में पीएम 10 का स्तर 348 और पीएम 2.5 का स्तर 203 के साथ बहुत खराब श्रेणी में रहा है। इससे एक दिन पहले पीएम 10 का स्तर 270 और पीएम 2.5 का स्तर 170 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा था। पीएम 10 का स्तर 100 से कम पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम होने पर सुरक्षित श्रेणी में माना जाता है।

 शुक्रवार को बढ़े हुए प्रदूषण की वजह से दिन भर दिल्ली- एनसीआर स्मॉग की चादर में दिखा। वहीं, लोगों को आंखों में जलन के साथ गले में खराश के दिक्कत भी हुई। सफर के अनुसार, शनिवार की सुबह तक प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने की संभावना है। हालांकि, शाम तक इसमें थोड़ा सुधार हो सकता है। इसके बाद वेंटिलेशन इंडेक्स के बेहतर होने की वजह से आगामी 6 और 7 दिसंबर को हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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डीएसजीएमसी ने किसानों के खिलाफ 'आपत्तिजनक' ट्वीट पर कंगना रनौत को भेजा नोटिस

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध समिति (डीएसजीएमसी) ने अभिनेत्री कंगना रनौत को कानूनी नोटिस जारी किया है। कंगना को केन्द्र के कृषि कानूनों के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट पर बिना किसी शर्त माफी मांगने को कहा है। साथ ही अभिनेत्री कंगना से उन ट्वीट को हटाने के लिए भी कहा है।

डीएसजीएमसी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट किया कि हमने कंगना रनौत को एक किसान की बुजुर्ग मां के 100 रुपये में उपलब्ध होने संबंधी टिप्पणी वाले आपत्तिजनक ट्वीट पर उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है। उनके ट्वीट किसानों के प्रदर्शन को राष्ट्र विरोधी दिखाते हैं। हम किसानों के विरोध पर उनकी संवेदनहीन टिप्पणी के लिए उनसे बिना शर्त माफी की मांग करते हैं।
 

आपको बता दें कि कंगना ने इस हफ्ते की शुरुआत में किसान आंदोलन में शामिल एक बुजुर्ग महिला को शाहीन बाग आंदोलन से प्रसिद्ध हुईं दादी बिल्किस बानो बताया था। उन्होंने रीट्वीट करते हुए दोनों बुजुर्ग महिलाओं की तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा कि यह शाहीन बाग वाली दादी हैं जो 100 रुपये में प्रदर्शन करने के लिए उपलब्ध हैं।

पोस्ट में दो तस्वीरें भी दिख रही थीं, इनमें से एक शाहीन बाग में बैठीं बिलकिस बानो की थी जबकि दूसरी किसानों के धरने में शामिल बठिंडा की बुजुर्ग महिला महिंदर कौर की। कंगना ने दोनों को एक ही करार दिया था। 

इस तस्वीर को शेयर करते हुए कंगना ने लिखा कि यह वही दादी है जो टाइम मैग्जीन में सबसे ज्यादा शक्तिशाली भारतीय के तौर पर फीचर की गई थीं और ये 100 रुपये में उपलब्ध हो जाती हैं। हमें हमारे लिए अंतरराष्ट्रीय तौर पर बोलने के लिए हमारे ही किसी अपने की जरूरत है।


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सिंघु बॉर्डर पर सर्द रातों में स्थानीय लोग कर रहे हैं अन्नदाताओं की सेवा, बांट रहे चाय, चल रहा है मीठे चावल का लंगर

कृषि कानूनों के विरोध में सिंघु बॉर्ड पर जमे आंदोलनकारियों की सेवा स्थानीय लोग कर रहे हैं। सर्द रातों में वे हमदर्दी के साथ किसानों को चाय बांट रहे हैं। इस सेवादारी में उनका परिवार भी साथ है। 



किसानों की सेवा करने वाले एक शख्स प्रणीत सिंह का कहना है कि किसानों ने बुरी स्थितियां झेली हैं। वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी तरह किसानों की सेवा कर रहे एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि किसान ठंड मे अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए में अपने परिवार के साथ इनकी सेवा कर रहा हूं। 

गौरतलब है कि वीरवार को सरकार के साथ हुई चौथे दौर की वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकल सका। अब अगले दौर की बातचीत कल यानी 5 तारीख को होगी। ऐसे में किसान हौसले के साथ बॉर्डर पर जमे हुए हैं। 

मुसलिम समुदाय के लोग बांटते दिखे मीठा चावल
प्रदर्शन स्थल पर मुसलिम समुदाय के चार-पांच लोग दिखे। पंजाब के मलेर कोटला से यह लोग सिंघु बार्डर पहुंचे है। पेशे से वकील मुबीन फारूखी ने बताया कि वह अपने किसान भाईयों के लिए अपने गांव से यहां पहुंचे हैं। जब तक इनका प्रदर्शन चलेगा, वह अपने किसान भाई को मीठे चावल का लंगर चलता रहेगा।

अपने जत्थे के साथ बार्डर पर निहंग सिख
केंद्र सरकार के बिल के विरोध में बृहस्पतिवार को सिंघु बार्डर पर निहंग सिख का जत्था भी पहुंच गया है। किसानों के हक में आए निहंग सिखों का कहना है कि सरकार तीनों कानून वापस ले। जब तक ऐसा नहीं होता, वह वापस नहीं लौटेंगे। खास बात यह कि यह अपने घोड़े पर प्रदर्शन स्थल पर चक्कर लगाते रहे। एक बार निहंग सिखों का जत्था बैरीकेड तक पहुंच ग या था, इसे देख पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए थे। हालांकि, थोड़ी देर बाद वह लौट गए।

पैर चोटिल, घुटनों में तेज मालिश करते दिखे 80 साल के बुजुर्ग सुखचैन सिंह
लुधियाना से सिंघु बार्डर पहुंचे 80 वर्षीय किसान सुखचैन से धूप में पैर मालिश करने दिखे। बातचीत में उन्होंने अपना चोटिल पैर दिखा। साथ ही इस तरह की चोटों का दर्द सहने की बात भी कही। सुखचैन सिंह ने बताया कि वह दिल्ली किसान बिल को वापस करवाने के लिए आए हैं। बगैर इसके वह वापस नहीं जाएंगे। भले ही इसके बाद जान तक चली जाए।

पंजाब पुलिस का एएसआई पंगत में बांटा खाना
पंजाब पुलिस के एएसआई बलविंदर सिंह सिंघु बार्डर पर लंगर में खाना बांटते नजर आए। खाकी वर्दी के साथ हाथ में सब्जी की बाल्टी उठाए बलविंदर का कहना था कि वह सेवादार के तौर पर आए हैं। हालांकि, उन्होंने तस्वीर खिंचाने और अपनी सेवा के बारे में बात करने में काफी हीलाहवाली की। उनका कहना था कि इस काम से उनको सुकून मिल रहा है। अपने घर परिवार के लोगों के साथ विरोध की कोई वजह नहीं है।

हुक्के की गुड़गड़ के बीच लगी चौपाल, अखबारों की खबरों के साथ चलती रही चर्चा
हुक्के की गुड़गुड़ के बीच सर्दी की धूप में सड़क किनारे किसानों की चौपाल लगी थी। यहां पर अखबारों की खबरों की बीच आंदोलन पर गरमागरम चर्चा चलती रही। सरकार के बातचीत के बीच लगी चौपाल में बड़ा मसला उसके नतीजे पर था। हालांकि, वहां मौजूद ज्यादातर किसान आशंका जता रहे थे कि बातचीत आज भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचेगी।

कंगना रणौत की दिखी प्रदर्शनस्थल पर फोटो
सिंघु बार्डर पर अपने ट्विट से विवाद आई कंगना रणौत की तस्वीर में बृहस्पतिवार को देखी गई। कई युवाओं ने फिल्म की अभिनेत्री की रोती हुई तस्वीर का पोस्टर हाथ में ले रखा था। इस पर सशुल्क प्रमोशन के कॉल करें लिखा हुआ था। युवाओं का कहना था कि कंगना पैसा लेकर प्रमोशन करती हैं। साथ ही कहा कि वह बॉर्डर पर आएं, हमारे प्रदर्शन को प्रमोट करें और हम इसका पैसा भी देंगे।

टोपी बनी प्रदर्शनकारी किसानों की पहचान, सजी दुकान
गाजीपुर बार्डर पर हरी व सफद रंग की टोपी किसानों की पहचान बन गई है। इसे देखते हुए प्रदर्शन स्थल पर दुकानें भी सज गई हैं। दस-दस रुपये में टोपियां दूर दराज से आए किसानों को बेची जा रही थी। वहीं, बिल्ला भी पांच रुपये में मिल रहा था। दिलचस्प यह कि मौके पर तैनात पुलिसकर्मी टोपियों से ही किसान प्रदर्शनकारियों की पहचान कर रहे थे। दूसरी तरफ गरम कपड़े की दुकानें भी प्रदर्शन स्थल पर लगी थी। 100-150 रुपये के बीच गरम साल की बिक्री किसानों को की जा रही थी। गाजीपुर फ्लाईओवर के नीचे इस तरह की छोटी-छोटी दुकानें दिन भर सजी दिखी।
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किसान आंदोलन के चलते दिल्ली की छोटी-बड़ी सीमाएं सील, हर तरफ चौकसी बढ़ी

किसान आंदोलन
कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली से सटी कई छोटी-बड़ी सीमाओं को सील कर दिया गया है और कइयों पर आवाजाही सीमित कर दी गई है। सरकार के साथ कल चौथे चरण की नाकाम वार्ता के बाद दिल्ली की सीमाओं पर चौकसी भी बढ़ा दी गई है। 



इसी क्रम में एनएच 24 पर गाजीपुर बॉर्डर बंद कर दिया गया है। गाजियाबाद से दिल्ली आने वाले ट्रैफिक को पूरी तरह से रोक दिया गया है। दिल्ली आने वाले लोगों को अप्सरा बॉर्डर से गुजरने की सलाह दी गई है। 

आंदोलन को ध्यान में रखते हुए सिंघु, लामपुर, औचंदी, साफियाबाद, पियाओ मनियारी और सबोली बॉर्डर भी सील कर दिये गए हैं। एनएच 44 पर दोनों तरफ से आवाजाही बंद है। 

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार टिकरी और झरौंदा बॉर्डर भी सील हैं। झटीकरा और बदोसराय बॉर्डर केवल दोपहिया और हल्के वाहनों के लिए खुला है। 

गुरुवार को दिन भर रही अफरा-तफरी
गुरुवार को भी किसान आंदोलन की वजह से मुकरबा चौक से सिंघु बॉर्डर तक बसों का आवागमन बंद होने की वजह से करीब 20 किलोमीटर के दायरे में पूरे दिन अफरा-तफरी का माहौल रहा। दोपहर के वक्त डीटीसी व कलस्टर बसें जैसे ही जीटीके डिपो से आगे बढ़ी, आगे रास्ता बंद होने की वजह से दूसरे रूटों से होकर कुछ बसें अलीपुर तक पहुंची।

दोपहर बाद केवल स्पेशल ड्यूटी की बसों को छोड़कर बाईपास तक के लिए कोई भी बस सेवा नहीं थी। इस वजह से शाम पांच से रात करीब 8 बजे तक यात्रियों को दिल्ली की तरफ लौटने में भी काफी खर्च करने के बाद भी 8-10 किलोमीटर या उससे भी अधिक पैदल चलना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि पिछले एक हफ्ते से किसानों का आंदोलन चल रहा है, लेकिन बसों के रूट डायवर्ट होने या बंद होने की पूर्वसूचना नहीं दी गई थी। पूरे दिन हजारों यात्रियों की इस परेशानी के लिए कोई जिम्मेवारी लेने वाला भी नहीं। 

जीटी करनाल रोड पर बुधवार तक बसें रूट डायवर्ट किए जाने के बाद भी करीब एक किलोमीटर पहले तक जा रही थीं। सीमाएं सील हैं, फिर भी दिल्ली से आने जाने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। 

घंटों पैदल चलने के बाद भी नहीं पहुंच सके समय पर
कुंडली से पैदल आ रहे मोहित ने बताया कि उसे कश्मीरी गेट जाना है। लेकिन बस सेवा बंद होने की वजह से ऑटो चालक भी पांच गुना से अधिक किराया वसूल रहे हैं। गुरुग्राम में काम करने वाले विजय ने बताया कि दो घंटे के इंतजार के बाद भी जब नहीं मिली तो पैदल ही निकल पड़े। पुरानी दिल्ली से ट्रेन में यात्रा के लिए समय पर नहीं पहुंच सके। 

रास्ते में अपने परिवार के साथ सामान लेकर भी कई लोग दिखे। थक जाने पर पेड़ के पास रुककर थोड़ा आराम कर फिर आगे बढ़े, लेकिन हिम्मत जवाब देने लगी तो मजबूरन अधिक खर्च करने के बाद भी ऑटो के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। आउटर रिंग रोड पर भी पहुंचने पर रात करीब आठ बजे भी जाम की वजह से वाहन रेंगते नजर आए, लेकिन करीब तीन किलोमीटर के बाद बसों का आवागमन सामान्य हुआ। हालांकि सामान्य दिनों की अपेक्षा बसों की संख्या कम रही। 

पांच गुना खर्च तक भी गंतव्य तक पहुंचने में देरी 
बॉर्डर से पहले ही बसों के रूट डायवर्ट कर दिए गए थे। इस वजह से यात्रियों को ऑटो, ई रिक्शा, कैब की सवारी से थोड़ी राहत मिली। इस दौरान भी सड़क पर भारी जाम की वजह से यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में डेढ़ घंटे तक की देरी हुई। हालांकि लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में तीन से पांच गुना अधिक रुपये खर्च करने पड़े।

रूट में परिवर्तन, आगे भी यात्रियों को करना पड़ सकता है मुश्किलों का सामना 
इक्का दुक्का बसें अगर चली भी थी जो अलीपुर से पहले यू टर्न लेकर बख्तावरपुर, बुराड़ी, जहांगीर पुरी होते हुए आजादपुर पहुंची। इस वजह से जीटी करनाल मार्ग स्थित सिंघू, सिंघोला, टीकरी खुर्द, खामपुर, बकौली व हरियाणा की तरफ से आने वाले हजारों बस यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक आंदोलन के मद्देनजर सुरक्षा के लिहाज से बसों के रूट बदले गए हैं। रोजाना हर घंटे हालात पर निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के मुताबिक आगे भी रूटों में परिवर्तन किया जा सकता है।

 
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दिल्ली में हर चौथे व्यक्ति को लगेगा कोरोना का टीका, पहले चरण की तैयारी पूरी

दिल्ली में पहले चरण में हर चौथे व्यक्ति को कोरोना वायरस का टीका लगेगा। वैक्सीन आने से पहले सरकार ने सभी प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली हैं। राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में टीके का भंडारण किया जाएगा और मोहल्ला से लेकर पॉलीक्लीनिक तक में टीकाकरण चलेगा। पहले चरण में दिल्ली की कुल आबादी में से 20 से 25 फीसदी को टीकाकरण के लिए चयनित किया जाएगा। 



दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वैक्सीन को लेकर सभी तैयारियां केंद्र सरकार के निर्देश पर की जा रही हैं। केंद्र ने देश में 25 से 30 करोड़ लोगों का समूह बनाकर सबसे पहले टीका लगाने का फैसला लिया है। इसके तहत बीते अक्तूबर माह में समूह बनाने के निर्देश मिले थे। इसे लेकर यह फैसला लिया गया है कि पहले चरण में 20 से 25 फीसदी आबादी को सबसे पहले टीका लगना जरूरी है। 

क्योंकि दूसरे राज्यों की तुलना में दिल्ली के अधिकतर लोग जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां जैसे मधुमेह, बीपी, कैंसर, हार्ट, किडनी, लिवर रोग इत्यादि से ग्रस्त हैं। दिल्ली की कुल आबादी करीब दो करोड़ है। इस हिसाब से दिल्ली में 40 से 50 लाख लोगों को टीका लगना जरूरी है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी तरह के चिकित्सीय संस्थानों की संख्या करीब 745 है। एक दिन में यहां 10 लाख से भी अधिक लोगों को टीका लगाया जा सकता है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के सभी व्यक्तियों को कोरोना वायरस का टीका लगाने की जरूरत नहीं है। हालांकि दिल्ली सरकार इस फैसले से संतुष्ट नहीं है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अगर सभी को टीका नहीं मिलता है तो कम से कम 20 से 25 फीसदी को टीका लगना ही चाहिए।  

टीकाकरण की सभी तैयारियां पूरी
वहीं एक अन्य अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में टीकाकरण के पहले चरण की तैयारी पूरी हो चुकी है। चूंकि दिल्ली में पहले भी इंद्रधनुष, रुबेला, पोलिया जैसे टीकाकरण कार्यक्रम संचालित हो चुके हैं। ऐसे में जमीनी स्तर पर पहले से ही सरकार की तैयारियां हैं। रहा सवाल कर्मचारियों का तो दिल्ली सरकार के साथ साथ नगर निगम के कर्मचारियों, आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कर्मचारियों को भी इस कार्य में लगाया जा सकता है। 

दरअसल दिल्ली सरकार का कहना है कि टीका मिलने के दो से तीन हफ्ते में ही पूरी दिल्ली को कोरोना वायरस का टीका लगाया जा सकता है। इसके पीछे सबसे बड़ी सफलता चिकित्सीय बुनियादी ढांचे की है। दिल्ली के पास मोहल्ला क्लीनिक और पर्याप्त मात्रा में पॉलीक्लिनिक होने से यह आसान हो सकता है। खुद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन कह चुके हैं कि दिल्ली के सभी लोगों को कोरोना वायरस का टीका मिलना चाहिए। हालांकि टीका को लेकर सभी निर्देश केंद्र सरकार को ही तय करने हैं लेकिन दिल्ली सरकार का मानना है कि टीका आने के बाद दिल्ली का हर व्यक्ति उसका अधिकार रखता है। 

इसलिए तीन हफ्ते में पूरी दिल्ली को लग सकता है टीका
चिकित्सीय सेवाओं को लेकर दिल्ली में बुनियादी ढांचे की कमी नहीं है। केंद्र सरकार के चार बड़े अस्पताल एम्स, सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के अलावा 37 दिल्ली सरकार के अस्पताल हैं। इनके अलावा नगर निगम के तीन बड़े अस्पताल हैं। इनके अलावा 200 से अधिक मोहल्ला क्लीनिक, 24 पॉलीक्लीनिक, 180 डिस्पेंसरी, 105 होम्योपैथी, 44 आयुर्वेद और 22 यूनानी चिकित्सा की डिस्पेंसरी हैं। 24 मोबाइल हेल्थ क्लीनिक के साथ साथ 50 उप स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। इन सभी जगह टीकाकरण के लिए शिविर लगाया जाता है तो एक दिन में करीब 10 लाख से अधिक लोगों को टीका लगाया जा सकता है। 

क्यों जरूरी है सभी को टीका?
दिल्ली सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि राजधानी में अब तक 9 हजार से भी ज्यादा लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। सभी 11 जिलों में अब तक साढ़े पांच हजार से ज्यादा कंटेनमेंट जोन बनाए जा चुके हैं। दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या भी 5.75 लाख से अधिक है। ऐसे में अगर कंटेनमेंट जोन को ही कवर करें तो दिल्ली में कम से कम 10 लाख लोग टीका के लिए योग्य हैं। सीरो सर्वे के अब तक के परिणामों से स्पष्ट है कि दिल्ली की करीब एक चौथाई आबादी संक्रमण के दायरे में आ चुकी है। इन्हीं आंकड़ों के मद्देनजर दिल्ली के हर व्यक्ति को कोरोना का टीका लगना जरूरी है।

इन्हें मिलेंगी प्राथमिकता
  • सरकारी और निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मचारी
  • मधुमेह, बीपी, कैंसर, हार्ट, किडनी और लिवर जैसी बीमारियों से ग्रस्त मरीज
  • 55 से अधिक उम्र के लोग 
  • दस साल से कम उम्र के बच्चे
  • गर्भवती महिलाएं
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- कोरोना जांच नतीजे 24 घंटे में मोबाइल पर देने की कोशिश करे सरकार

कोरोना मरीजों की जांच के नतीजे उनके मोबाइल पर 24 घंटे के भीतर देने की दिशा में दिल्ली सरकार कोशिश करे। इसके अलावा कोरोना जांच और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान पर अधिक ध्यान दे। यह बात हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कोरोना संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कही। वहीं दिल्ली सरकार ने जवाब दाखिल कर स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली या उसके कुछ हिस्सों में नाइट कर्फ्यू लगाने पर विचार नहीं किया जा रहा।
 
दिल्ली सरकार ने कहा कि नाइट कर्फ्यू लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए हर प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं सभी प्राइवेट अस्पतालों को एलईडी स्क्रीन पर नोडल अधिकारी के नाम व फोन नंबर के अलावा रिक्त कोविड बेड की संख्या दर्शाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति  हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए जांच और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान पर ध्यान केन्द्रित किया जाए। इतना ही नहीं यदि जांच के नतीजे अब भी 24 घंटे के अंदर नहीं आ रहे हैं तो इस पर गौर किए जाने की जरूरत है। अदालत ने दिल्ली सरकार से ये भी कहा कि कोरोना की जांच के नतीजे मोबाइल फोन पर देने की कोशिश करें।  

दिल्ली सरकार ने खंडपीठ के हाल ही में पूछे गए नाइट कर्फ्यू संबंधी सवाल के जवाब में कहा कि दिल्ली में फिलहाल स्थिति में सुधार हो रहा है, ऐसे में नाइट कर्फ्यू लगाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि सरकार ने प्रतिबंधित गतिविधियों में 31 दिसंबर तक किसी भी प्रकार की छूट न देने का निर्णय किया है। इतना ही नहीं किसी प्रकार की नई गतिविधियों की भी इजाजत नहीं होगी।

अदालत अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के मरीजों की संख्या पुन: बढ़ने पर चिंता जताते हुए जांच बढ़ाने व रिपोर्ट जल्द प्रदान करने की मांग की है। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि हेल्पलाइन 1031 पर 115 लोग काम कर रहे हैं और नवंबर माह में उस पर 10817 कॉल आई। कुछ काल का जवाब नहीं दिया जा सका क्योंकि बात करते समय वह कट गई। उन्होंने संक्रमण को रोकने के लिए सामाजिक दूरी, मास्क इत्यादि लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों से बैठक की जा रही है।

दिल्ली सरकार व पुलिस के चालान से करीब  45 करोड़ मिले
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के अलावा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा रही है। इस कड़ी में तय नियमों का उल्लंघन करने वाले 2,37,907 लोगों के चालान कर दिल्ली सरकार ने 17 करोड़ 93 लाख 82 हजार 917 रुपये जुर्माने के रूप में वसूले हैं। वहीं दिल्ली पुलिस ने भी 5,47,394 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 27 करोड़ 68 लाख 35 हजार 900 रुपये का जुर्माना लगाया है।
 
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देश के 10 सर्वश्रेष्ठ थानों में दिल्ली का एक भी नहीं, मणिपुर का नोंगपोक सेकमाई पहले स्थान पर

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को देश के जिन दस सर्वश्रेष्ठ पुलिस थाने की घोषणा की है उनमें मणिपुर के थौबाल जिले का नोंगपोक सेकमाई थाना देश में पहले स्थान पर है। सूची में दूसरे स्थान पर तमिलनाडु के सलेम सिटी का सुरामंगलम और अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले का खरसांग थाना तीसरे स्थान पर है। टॉप टेन में मुरादाबाद का कांठ थाना भी शामिल है मगर दिल्ली का एक भी थाना इस सूची में जगह नहीं बना पाया है। 

गृह मंत्रालय ने देश के 16,671 थानों में से 10 सर्वश्रेष्ठ थानों को चुना है। इस सूची में चौथे स्थान पर छत्तीसगढ़ का झिलमिल (भैया थाना), गोवा का सांगुएम पांचवें, अंडमान निकोबार द्वीप समूह का कालीघाट छठे, सिक्किम का पाकयोंग सातवें, मुरादाबाद का कांठ आठवें, दादरा नगर हवेली का खानवेल नौवें और तेलंगाना के करीमनगर का थाना जमीकुंटा दसवें स्थान पर है। 

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार प्रत्येक वर्ष कामकाज के लिहाज से देशभर के दस सर्वश्रेष्ठ थानों की सूची जारी करती है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इससे इन पुलिस थानों को और बेहतर काम करने का प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही अन्य थानों में बेहतर करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा होती है। दस बेहतरीन थानों के चयन में उनके कामकाज, सेवा देने की गुणवत्ता और पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए तकनीकों के इस्तेमाल जैसी 19 कसौटियों पर परखा जाता है।


 
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दिल्ली-एनसीआर की हवा में हल्का सुधार, आज और कल बिगड़ सकता है माहौल

हवा की गति बढ़ने व अन्य मौसमी अनुकूल परिस्थितियों की वजह से बृहस्पतिवार को दिल्ली-एनसीआर की हवा में हल्का सुधार दर्ज किया गया है। इस कड़ी में राजधानी की हवा का स्तर पिछले 1 दिन के मुकाबले 32 अंकों की गिरावट के साथ बहुत खराब श्रेणी में बना रहा। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में शामिल शहर बहुत खराब श्रेणी के दर्जे में रहे।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, बृहस्पतिवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 341 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यह 373, मंगलवार को 367, सोमवार को 318, रविवार को 256, शनिवार को 236, शुक्रवार को 137, बृहस्पतिवार को 302 रहा था।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, पिछले 24 घंटों में दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज हुई है। इस कड़ी में पिछले 24 घंटे में 249 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई, जिसकी प्रदूषण में हिस्सेदारी 2 फीसदी रही। एक दिन पहले यह 316 घटनाओं के साथ 3 फीसदी थी।

सफर के अनुसार, प्रदूषण के जिम्मेदार तत्वों पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर में पिछले 24 घंटों में कमी आई है। इस कड़ी में पीएम 10 का स्तर 270 और पीएम 2.5 का असर 170 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। इससे एक दिन पहले पीएम 10 का स्तर 334 और पीएम 2.5 का स्तर 196 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था। 

हवा की गति में वृद्धि होने की वजह से पर प्रदूषित तत्वों को छंटने में मदद मिली है। यही वजह है कि बृहस्पतिवार को हवा का स्तर में सुधार दर्ज हुआ है। अगले दो दिनों में हवा का स्तर बहुत खराब श्रेणी में और बिगड़ सकता है। इसके बाद आगामी 6 दिसंबर को हवा के स्तर में सुधार होने की संभावना है।

दिल्ली- एनसीआर की हवा में भी हुआ सुधार 
पिछले दिनों के मुकाबले दिल्ली-एनसीआर के शहरों में शामिल गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद की हवा में भी हल्का सुधार हुआ है। एक दिन पहले जहां गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा की हवा गंभीर श्रेणी में थी बृहस्पतिवार को यह बहुत खराब श्रेणी में रही है।

दिल्ली- एनसीआर के आंकड़े
नोएडा 360
गुरुग्राम 316
ग्रेटर नोएडा 358
गाजियाबाद 377
फरीदाबाद 336 
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