मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक इस पूरे मामले को लेकर बालाघाट पहुंच चुके हैं, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग स्थिति को नियंत्रण में रख पाने में कामयाब होता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव पहुंचकर दवाइयां और टीके आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश जारी है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं।
लगातार हो रही मौतों के कारण आदिवासी क्षेत्रों में ग्रामीणों के बीच खौफ का माहौल बन गया है। बालाघाट के बैहर-बिरसा क्षेत्र से एक बार फिर बेहद दुखद खबर सामने आई है। दुर्गम आदिवासी अंचल में बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। साढ़े 10 वर्षीय बैगा आदिवासी बालक गजेंद्र मरकाम की मौत हो गई है। प्रारंभिक जानकारी में उसके मलेरिया से पीड़ित होने की बात सामने आई है, हालांकि मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में मृतकों की संख्या 29 से बढ़कर 30 हो गई है।
पानी, इलाज में देरी और जागरूकता की कमी बनी चुनौती
अभी भी स्थिति यह है कि पीने के पानी की समस्या, समय पर उपचार में देरी और जागरूकता की कमी के कारण हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृत बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की थी।
स्वास्थ्य विभाग के तीन अधिकारियों पर हो चुकी है कार्रवाई
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला द्वारा बालाघाट में पदस्थ स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, टीकाकरण अधिकारी और मलेरिया अधिकारी समेत तीन लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। लोगों को जागरूक करने और स्वास्थ्य व्यवस्था को ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए अभियान भी शुरू किया गया है, ताकि लोग अधिक से अधिक जागरूक हों और उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद स्थिति अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सड़कों पर उतरे लोग
स्थानीय स्तर पर कई लोग धरना-प्रदर्शन कर स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने और समय पर चिकित्सा सुविधाएं गांवों तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को दी जा रही दो लाख रुपये की सहायता राशि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कम से कम प्रति परिवार 25 लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग की है।
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'बेहतर इलाज के साथ पानी की व्यवस्था हो'
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने गांवों में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ पीने के पानी की व्यवस्था दुरुस्त करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में पानी की समस्या गंभीर है और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।