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VIDEO: लखनऊ में बेटी के लिए पिता का संघर्ष, एनटीए से वार्ता आज
आईएससी बारहवीं की मेधावी व दृष्टिबाधित छात्रा सारा मोइन के कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट अंडरग्रेजुएट (सीयूईटी यूजी) में शामिल हो सके लिए इसके लिए मंगलवार को सारा के पिता मोइन अहमद ने अमर उजाला के कैमरे पर बात की। उन्होंने कहा कि मेरा सपना है कि मेरी बेटी इस परीक्षा में शामिल हो सके इसके लिए परीक्षा लेने वाली एजेंसी एनटीए को सुविधा देनी चाहिए।
सारा मोइन परीक्षा में शामिल हो सके इसके लिए नॉन विजुअल डेस्कटॉप एक्सेस (एनवीडीए) स्क्रीन-रीडिंग सॉफ्टवेयर और रिफ्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले से लैस लैपटॉप कंप्यूटर की जरूरत होगी। साथ ही सुलभ डिजिटल प्रारूप में प्रश्न पत्र और ऑन-स्क्रीन सामग्री भी उपलब्ध करानी होगी। पिता का का कहना है कि उन्हें परीक्षा के प्रत्येक घंटे के लिए 30 मिनट का अतिरिक्त समय भी चाहिए। यह सुविधा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दिशानिर्देशों के तहत नियम में है।
इस साल सारा ने पास की है परीक्षा
सारा मोइन ने इसी साल बारहवीं आईएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की है। उसे अंग्रेजी में 98, इतिहास में 97, भूगोल में 100, मनोविज्ञान में 96 और मास मीडिया व कम्युनिकेशन में 100 फीसदी अंक मिले हैं। उन्होंने अपनी परीक्षाओं में विशेष सहायक प्रौद्योगिकी (एटी) सेटअप का उपयोग किया, जिसे काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) ने अनुमोदित किया था। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 17 शिक्षा में समान अवसर की बात करती है।
आज होगी एनटीए से ऑनलाइन वार्ता
सारा के पिता ने बताया कि इस संबंध में सारा के पिता ने बताया कि एनटीए की ओर से मंगलवार को उनके पास फोन आया है। जिसके बाद बुधवार को सुबह 11 बजे ऑनलाइन वार्ता का आश्वासन दिया गया है। सारा के पिता ने बताया कि यदि ऑनलाइन वार्ता में समस्या दूर नहीं होती है तो अगली सुनवाई मई को भी होनी है। पिता ने बताया कि सारा की ओर से भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्रालय में भी शिकायत भेजी गई है।
अभी एनटीए के पास ये है व्यवस्था
सीयूईटी की परीक्षा ऑनलाइन होती है। इसमें कंप्यूटर पर ही सवाल पढ़कर जवाब देने होते हैं। दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को सीयूईटी की ओर से राइटर लाने की अनुमति है, लेकिन जो विद्यार्थी देख न पाने के साथ-साथ सुन भी नहीं पाते हैं उनके लिए समस्या है। सारा की स्थिति यही है।
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