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मंडी: अनाथ-बेसहारा बच्चों के लिए बनी सरकार की ढाल, पढ़ाई से लेकर अपने घर तक मिल रही मदद
माता-पिता का साया खो चुके और बेसहारा बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना अहम सहारा बन रही है। योजना के तहत बच्चों को शिक्षा, जेब खर्च, उच्च अध्ययन और कौशल विकास के साथ अपने घर का सपना पूरा करने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जा रही है। करसोग उपमंडल में 23 पात्र लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए तीन लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है।
करसोग उपमंडल के 23 पात्र लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए कुल तीन लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा रही है। यह राशि चार किस्तों में जारी की जाती है। पात्र लाभार्थियों को अब तक दो किस्तें जारी की जा चुकी हैं। इससे उन बच्चों और युवाओं को अपने आशियाने का सपना पूरा करने की उम्मीद मिली है, जिनके लिए कभी अपना घर बनाना मुश्किल था।
घर निर्माण की सहायता पाने वाले लाभार्थियों में चमन लाल, बॉवी, पीतांबर, उत्तम चंद, पूनम शर्मा, अनु कुमारी, देशराज, मनीष खन्ना, भूपेंद्र कुमार, राजेंद्र, जगदीश, मोनिका, बृज लाल, सुनील दत्त, दिनेश कुमार, संजीव कुमार, संजय कुमार, पुष्पराज, दिनेश, यशवंत, हिम चंद, मनीष कुमार और ललित कुमार शामिल हैं।
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना का उद्देश्य अनाथ और बेसहारा बच्चों को आर्थिक मदद देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत पात्र बच्चों की पढ़ाई, उच्च शिक्षा, जेब खर्च और कौशल विकास के लिए सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। घर की सुविधा मिलने से ऐसे लाभार्थियों को भविष्य में स्थायी सुरक्षा का भरोसा भी मिल रहा है।
लाभार्थी मनीष कुमार ने बताया कि पहले भविष्य को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन योजना के माध्यम से पढ़ाई के साथ जेब खर्च और घर निर्माण के लिए भी सहायता मिल रही है। इससे उन्हें यह भरोसा मिला है कि वे अकेले नहीं हैं।
संजय कुमार ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका भी अपना घर हो सकता है। योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। पीतांबर समेत अन्य लाभार्थियों ने भी कहा कि सरकार की ओर से मिल रही सहायता उनके लिए परिवार के सहारे जैसी है।
लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार जताते हुए कहा कि योजना ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने, आगे बढ़ने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि वे मेहनत और शिक्षा के दम पर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
करसोग में योजना का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। आर्थिक सहायता के साथ बच्चों और युवाओं में सुरक्षा तथा आत्मविश्वास की भावना मजबूत हो रही है। योजना के जरिए सरकार ऐसे बच्चों के लिए अभिभावक की भूमिका निभाने का प्रयास कर रही है, ताकि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण कोई बच्चा अपने सपनों से समझौता न करे।
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