{"_id":"6ab9652b71f3b6f4f500da85","slug":"the-plaintiff-could-not-provide-evidence-of-having-been-injured-in-the-attack-mandi-news-c-90-1-ssml1045-215172-2026-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: हमले में घायल होने का सबूत नहीं दे सका वादी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: हमले में घायल होने का सबूत नहीं दे सका वादी
विज्ञापन
2.50 लाख मुआवजे का दावा खारिज
घटना के समय का एमएलसी पेश नहीं किया
दिव्यांगता को 2014 की घटना से जोड़ने का प्रमाण नहीं मिला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हमले में घायल होने और बाद में दिव्यांगता का दावा कर 2.50 लाख रुपये मुआवजा मांगने वाले भीम सिंह को अदालत से राहत नहीं मिली। वरिष्ठ सिविल जज, मंडी की अदालत ने पर्याप्त चिकित्सीय और अन्य साक्ष्य के अभाव में भीम सिंह बनाम शेर सिंह का मुआवजा वाद खारिज कर दिया। भीम सिंह ने आरोप लगाया था कि 21 मई 2014 की रात शेर सिंह दराट लेकर उसके घर के आंगन में घुसा और सिर और बाएं हाथ पर चोटें पहुंचाईं। उसका दावा था कि चोटों के कारण वह करीब एक साल तक काम नहीं कर सका और उसकी आय प्रभावित हुई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना के तुरंत बाद तैयार एमएलसी रिकॉर्ड पर साबित नहीं किया गया और उपचार करने वाले डॉक्टर को भी गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। किसी स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी की गवाही भी नहीं हुई। बाद में जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों को 2014 की घटना से जोड़ने वाला पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला। अदालत ने कहा कि वादी चोटों और दिव्यांगता का शेर सिंह की कथित कार्रवाई से सीधा संबंध साबित नहीं कर सका।
विज्ञापन
घटना के समय का एमएलसी पेश नहीं किया
दिव्यांगता को 2014 की घटना से जोड़ने का प्रमाण नहीं मिला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हमले में घायल होने और बाद में दिव्यांगता का दावा कर 2.50 लाख रुपये मुआवजा मांगने वाले भीम सिंह को अदालत से राहत नहीं मिली। वरिष्ठ सिविल जज, मंडी की अदालत ने पर्याप्त चिकित्सीय और अन्य साक्ष्य के अभाव में भीम सिंह बनाम शेर सिंह का मुआवजा वाद खारिज कर दिया। भीम सिंह ने आरोप लगाया था कि 21 मई 2014 की रात शेर सिंह दराट लेकर उसके घर के आंगन में घुसा और सिर और बाएं हाथ पर चोटें पहुंचाईं। उसका दावा था कि चोटों के कारण वह करीब एक साल तक काम नहीं कर सका और उसकी आय प्रभावित हुई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटना के तुरंत बाद तैयार एमएलसी रिकॉर्ड पर साबित नहीं किया गया और उपचार करने वाले डॉक्टर को भी गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। किसी स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी की गवाही भी नहीं हुई। बाद में जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्रों को 2014 की घटना से जोड़ने वाला पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला। अदालत ने कहा कि वादी चोटों और दिव्यांगता का शेर सिंह की कथित कार्रवाई से सीधा संबंध साबित नहीं कर सका।
विज्ञापन