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Mandi News: नौकरी का झांसा देकर सात लाख लेने वाले को रकम लौटाने के आदेश
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सिविल जज कोर्ट नंबर-2 मंडी की अदालत ने कुलदीप के खिलाफ डिक्री पारित की
नौकरी का झांसा देकर लिए सात लाख रुपये लौटाने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नौकरी दिलाने का झांसा देकर सात लाख रुपये लेने के करीब दस साल बाद अदालत ने रकम लौटाने के आदेश दिए हैं। सिविल जज कोर्ट नंबर-2, मंडी की अदालत ने मस्त राम की ओर से दायर वसूली के दावे को स्वीकार करते हुए प्रतिवादी कुलदीप शर्मा के खिलाफ सात लाख रुपये की मनी डिक्री पारित की है। अदालत ने मुकदमा दायर करने की तारीख से रकम की अदायगी तक नौ प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देने और मुकदमे का खर्च वहन करने के भी आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार वादी मस्त राम निवासी रायसन, जिला कुल्लू, सेवानिवृत्त केंद्रीय कर्मचारी हैं। 28 जून 2016 को फतेह चंद उन्हें कुलदीप शर्मा के पास लेकर गया। वादी के अनुसार कुलदीप शर्मा ने खुद को एक कंपनी का निदेशक बताते हुए चक्की नाला में परियोजना शुरू होने और वादी तथा उसके दोनों बेटों को रोजगार दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद कंपनी के काम के लिए तत्काल सात लाख रुपये की मांग की गई। फतेह चंद ने इस रकम की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
रकम जुटाने के लिए मस्त राम ने अपनी जमीन बेचने का करार किया और आठ लाख रुपये में से सात लाख रुपये बतौर अग्रिम प्राप्त किए। 28 जून 2016 को उन्होंने कुलदीप शर्मा को सात लाख रुपये नकद दिए। इस लेनदेन को लेकर लिखित समझौता भी किया गया था। वादी के बेटे पवन कुमार ने बाद में कुलदीप की दुकान पर करीब डेढ़ साल तक काम किया, लेकिन न तो रोजगार दिलाने का वादा पूरा हुआ और न ही सात लाख रुपये वापस किए गए। अदालत में दोनों प्रतिवादी पेश नहीं हुए, जिसके बाद उन्हें एकतरफा कर दिया गया। वादी ने खुद के अलावा धर्मचंद और पवन कुमार को गवाह के रूप में पेश किया। अदालत ने 28 जून 2016 के लिखित समझौते में सात लाख रुपये प्राप्त करने की स्वीकारोक्ति और गवाहों की गवाही को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी नंबर-1 ने रकम वापस नहीं की और वादी का दावा उपलब्ध साक्ष्यों से साबित हुआ। इसके आधार पर अदालत ने सात लाख रुपये की मनी डिक्री पारित करते हुए निर्धारित ब्याज और मुकदमे का खर्च भी अदा करने के आदेश दिए।
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नौकरी का झांसा देकर लिए सात लाख रुपये लौटाने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नौकरी दिलाने का झांसा देकर सात लाख रुपये लेने के करीब दस साल बाद अदालत ने रकम लौटाने के आदेश दिए हैं। सिविल जज कोर्ट नंबर-2, मंडी की अदालत ने मस्त राम की ओर से दायर वसूली के दावे को स्वीकार करते हुए प्रतिवादी कुलदीप शर्मा के खिलाफ सात लाख रुपये की मनी डिक्री पारित की है। अदालत ने मुकदमा दायर करने की तारीख से रकम की अदायगी तक नौ प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देने और मुकदमे का खर्च वहन करने के भी आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार वादी मस्त राम निवासी रायसन, जिला कुल्लू, सेवानिवृत्त केंद्रीय कर्मचारी हैं। 28 जून 2016 को फतेह चंद उन्हें कुलदीप शर्मा के पास लेकर गया। वादी के अनुसार कुलदीप शर्मा ने खुद को एक कंपनी का निदेशक बताते हुए चक्की नाला में परियोजना शुरू होने और वादी तथा उसके दोनों बेटों को रोजगार दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद कंपनी के काम के लिए तत्काल सात लाख रुपये की मांग की गई। फतेह चंद ने इस रकम की जिम्मेदारी लेने की बात कही।
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रकम जुटाने के लिए मस्त राम ने अपनी जमीन बेचने का करार किया और आठ लाख रुपये में से सात लाख रुपये बतौर अग्रिम प्राप्त किए। 28 जून 2016 को उन्होंने कुलदीप शर्मा को सात लाख रुपये नकद दिए। इस लेनदेन को लेकर लिखित समझौता भी किया गया था। वादी के बेटे पवन कुमार ने बाद में कुलदीप की दुकान पर करीब डेढ़ साल तक काम किया, लेकिन न तो रोजगार दिलाने का वादा पूरा हुआ और न ही सात लाख रुपये वापस किए गए। अदालत में दोनों प्रतिवादी पेश नहीं हुए, जिसके बाद उन्हें एकतरफा कर दिया गया। वादी ने खुद के अलावा धर्मचंद और पवन कुमार को गवाह के रूप में पेश किया। अदालत ने 28 जून 2016 के लिखित समझौते में सात लाख रुपये प्राप्त करने की स्वीकारोक्ति और गवाहों की गवाही को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी नंबर-1 ने रकम वापस नहीं की और वादी का दावा उपलब्ध साक्ष्यों से साबित हुआ। इसके आधार पर अदालत ने सात लाख रुपये की मनी डिक्री पारित करते हुए निर्धारित ब्याज और मुकदमे का खर्च भी अदा करने के आदेश दिए।
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