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Kurukshetra: 1.5 lakh MT of paddy stored in the open gets soaked due to strong winds and rain; laxity in lifting proves costly.
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कुरुक्षेत्र: तेज आंधी-बारिश से खुले में पड़ा डेढ़ लाख एमटी धान भीगा, उठान में ढिलाई पड़ी भारी
कुरुक्षेत्र। जिले में शनिवार देर रात करीब साढ़े आठ बजे फिर अचानक मौसम बदल गया। आंधी के साथ बूंदाबांदी भी शुरू हुई, जिसके साथ ही खुले आसमान के नीचे पड़ा करीब डेढ़ लाख एमटी धान भीगता रहा। मौसम बदलते ही अनाजमंडियों में धान को तिरपालों से ढांपने के प्रयास किए जाते रहे लेकिन तेज आंधी होने के चलते ये प्रयास पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए और अधिकतर धान बारिश में भीगता रहा। वहीं तेज आंधी व बारिश के चलते शहर व अन्य कईं क्षेत्रों से बिजली गुल हो गई और ब्लैक आउट छा गया। धान कटाई शुरू होने के बाद यह तीसरा मौका रहा जब बारिश के चलते धान भीगा। अभी करीब आठ दिन पहले ही 16 अक्टूबर को भारी बारिश हुई थी, जिसमें करीब दो लाख एमटी धान भीग गया था। अभी यह धान भी पूरी तरह से सूख भी नहीं पाया था और न ही इस धान का उठान हो पाया था कि शनिवार को फिर मौसम की मार पड़ गई। इससे पहले सीजन शुरू होने के एक सप्ताह के बाद ही बारिश से धान भीगा था। आठ दिन पहले तेज बारिश से अनाजमंडियों में धान बहने लगा था तो बाद में बड़ी मात्रा में अंकुरित भी हो गया था। उस समय करोड़ों का नुकसान होने की आशंका जताई गई थी लेकिन प्रशासन इससे भी सबक नहीं ले पाया और उठान तेज नहीं हुआ। ऐसे में शनिवार रात हुई बारिश ने फिर प्रशासनिक गंभीरता व तत्परता के साथ प्रबंधों की भी पोल खोल दी। प्रशासनिक ढील व मौसम की मार के आगे किसान बेबस दिखाई दिया। वहीं बारिश से अब रविवार को खरीद व धान कटाई कार्य भी ठप रहने की आशंका बन गई। 16 अक्टूबर को हुई बारिश के बाद मिलर्स ने भी करोड़ों के नुकसान की आशंका जताई थी। यहां तक कि धरने पर उतर आए थे तो भीगा धान उठाने से इंकार कर दिया था। सरकार की ओर से की गई कड़ी मशक्त के बाद ही धान उठान को राजी हुए थे। अब फिर भीगे धान में नुकसान की आशंका बन गई है। बारिश देर रात तक जारी रही।
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