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बाराबंकी: पराली का पता सैटेलाइट से, तबाह फसलों का सर्वे क्यों नहीं?
बाराबंकी: खेत में पराली जलाने का पता सैटेलाइट से लगाकर किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाती है, तो बाढ़ और बारिश से तबाह हुई फसलों का सर्वे इसी तकनीक से क्यों नहीं कराया जाता? अमर उजाला कार्यालय में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में किसान नेताओं ने यह सवाल उठाते हुए सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने खाद की किल्लत, निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूले जाने और जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी नाराजगी जताई।
भारतीय किसान यूनियन हरपालपुर के जिलाध्यक्ष विक्रांत सैनी, भारतीय किसान यूनियन आजाद के प्रदेश अध्यक्ष सुनील यादव, दशहरी गुट के जिलाध्यक्ष निहाल अहमद, किसान संगठन के केके यादव के जिलाध्यक्ष लवकुश और जिला प्रभारी आफताब आलम समेत कई किसान और किसान संगठनों के पदाधिकारी संवाद में शामिल हुए।
सैटेलाइट से फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग:
किसान नेताओं ने कहा कि पराली जलाने के मामलों में सैटेलाइट से निगरानी कर किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। ऐसे में बाढ़ और बारिश से बर्बाद हुई फसलों का आकलन करने के लिए भी इसी तकनीक का इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि प्रभावित किसानों को मुआवजा मिल सके। किसानों का कहना था कि प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर किसानों को राहत देने के लिए भी सरकार को उतनी ही तत्परता दिखानी चाहिए।
डीएपी चाहिए, किसानों को दी जा रही एनपीके;
किसानों ने खाद की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों को डीएपी की जरूरत है, लेकिन उनकी मांग के अनुरूप खाद नहीं मिल रही है और एनपीके लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि खाद की ओवररेटिंग भी हो रही है। उन्होंने मांग की कि किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराई जाए और निर्धारित दर पर बिक्री सुनिश्चित हो।
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर भी नाराजगी:
किसान नेताओं ने जिला अस्पताल में लंबे समय से हृदय रोग विशेषज्ञ न होने और अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा प्रभावित होने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिला महिला अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि रात में गंभीर मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पाता। मरीजों को रेफर किए जाने के बाद परिजनों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। किसान नेताओं ने सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, जांच सुविधाओं की बहाली और गंभीर मरीजों के बेहतर उपचार की मांग की।
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