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Farmers' union camps at Hansi Mandi; corners government over paddy and pearl millet procurement.
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हांसी मंडी में किसान यूनियन का डेरा, धान-बाजरा खरीद को लेकर सरकार को घेरा
हांसी। हांसी की अनाज मंडी में किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान मजदूर यूनियन ने मार्केट कमेटी कार्यालय में डेरा डाल दिया। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कोथ ने बाजरा और धान की सरकारी खरीद व्यवस्था को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की मंडियों में किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए परेशान होना पड़ रहा है और नमी के नाम पर किसानों से मनमाना कट लिया जा रहा है।
सुरेश कोथ ने कहा कि प्रदेश में करीब 98 मंडियों में बाजरे की खरीद के लिए व्यवस्था की गई है, लेकिन उनके अनुसार 97 मंडियों में एफसीआई द्वारा बाजरे की खरीद शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी खरीददारों की बात करती है, जबकि प्राइवेट प्लेयर बाजरा 1800 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास खरीदता है। सरकार की ओर से 600 रुपये भावांतर देने के बाद भी किसान को नुकसान उठाना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार को अगर किसानों की फसल एमएसपी पर खरीदनी है तो सरकारी एजेंसी को सीधे खरीद करनी चाहिए। किसान का प्राइवेट सेलर से कोई लेना-देना नहीं है। किसान अपनी फसल मंडी में लाता है, आढ़ती के माध्यम से तुलाई होती है और जिस सरकारी एजेंसी को खरीद की जिम्मेदारी दी गई है, उसे किसान का पूरा धान खरीदना चाहिए।
सुरेश कोथ ने कहा कि उन्होंने हरियाणा की कई मंडियों का दौरा किया है, लेकिन उनके अनुसार अभी तक किसी भी मंडी में धान की खरीद सुचारू रूप से नहीं हो रही। कई जगह किसानों को यह कहकर इंतजार करवाया जा रहा है कि सेलर नहीं आ रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि सेलर के आने या नहीं आने से किसान का क्या लेना-देना है? सरकार ने किसान का धान खरीदना है। एफसीआई, हैफेड या डीएफएससी जिस भी एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है, वह किसान की फसल खरीदे।
सुरेश कोथ ने आरोप लगाया कि नमी के नाम पर किसानों से 200 से 300 और कई जगह 400 रुपये तक का कट लगाया जा रहा है। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि हरियाणा में नमी के नाम पर किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसान नेता ने कहा कि जब 17 प्रतिशत नमी का नियम बनाया गया था, उस समय धान हाथ से काटा जाता था। आज मशीनों से धान की कटाई होती है, इसलिए नियमों में भी समय के अनुसार बदलाव होना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि धान में नमी की सीमा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जाए। साथ ही मंडियों में डिजिटल कांटे लगाए जाएं और किसानों के धान की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए।सुरेश कोथ ने कहा कि सरकार किसान का धान पहले पूरे रेट पर खरीदे। इसके बाद सरकार चाहे सेलर को दे, चावल बनवाए या कोई अन्य व्यवस्था करे, इससे किसान का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान को अपनी फसल का पूरा भाव मिलना चाहिए और नमी के नाम पर किसी भी प्रकार का अवैध कट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बाजरे को लेकर सुरेश कोथ ने कहा कि इस बार फसल में कोई बड़ी गुणवत्ता संबंधी समस्या नहीं है। पिछले साल बेमौसमी बारिश के कारण बाजरे में नमी और कलर फेड होने की समस्या आई थी, जिसकी वजह से किसानों को 200 से 300 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा।उन्होंने कहा कि इस बार बाजरा बेहतर है और अगर सरकारी एजेंसी की ओर से खरीद का प्रावधान किया गया है तो खरीद शुरू क्यों नहीं हो रही। सुरेश कोथ ने कहा कि अगर हरियाणा की सभी मंडियों में बाजरे की खरीद शुरू नहीं की गई तो किसान संगठन आंदोलन तेज करेगा। उन्होंने किसानों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
वहीं हरियाणा मंडी एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान रामअवतार तायल ने भी किसानों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने मांग की कि धान में नमी की निर्धारित सीमा को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाए और किसानों के धान की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक किसानों की फसल की सरकारी खरीद और उचित भुगतान सुनिश्चित नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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