आगामी चुनावों के बीच राष्ट्रीय आमजन मोर्चा एवं राष्ट्रीय हिंदू महासभा सहित विभिन्न संगठनों ने यूजीसी रोलबैक महाअभियान और राजस्थान के समग्र विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर जयपुर में प्रेस वार्ता आयोजित की। प्रेस वार्ता को राष्ट्रीय आमजन मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक विजय कौशिक और महिपाल मकराना ने संबोधित किया।
पांच सूत्री मांगों पर समर्थन मांगा, नहीं तो नोटा की अपील
विजय कौशिक ने कहा कि संगठन की ओर से उन प्रत्याशियों और नेताओं को समर्थन दिया जाएगा, जो संगठन की पांच सूत्री मांगों का अपने क्षेत्र में लिखित रूप से समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि समर्थन नहीं मिलने की स्थिति में सवर्ण समाज से नोटा का इस्तेमाल करने की अपील की जाएगी। कौशिक ने कहा कि संगठन चुनाव के दौरान अपने मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच अभियान चलाएगा।
संगठन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
कौशिक के मुताबिक, उनकी प्रमुख मांगों में यूजीसी रोलबैक, एससी/एसटी एक्ट को समाप्त करना, आर्थिक आधार पर आरक्षण, एक देश-एक कानून, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा और EWS व्यवस्था का सरलीकरण शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण छात्रों के हित प्रभावित हो रहे हैं और राजनीतिक फायदे के लिए समाज तथा छात्रों के बीच विभाजन की स्थिति पैदा की जा रही है।
चुनावों में नोटा के पक्ष में अभियान का दावा
उन्होंने कहा कि यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। कौशिक ने जल्द ही दिल्ली कूच की तैयारी करने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले चुनावों के दौरान नोटा के पक्ष में अभियान चलाया जाएगा। संगठन का कहना है कि चुनाव में बहिष्कार के बजाय मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए नोटा का विकल्प चुनना चाहिए।
'हमारी मर्जी से बनेगा जयपुर का मेयर'
महिपाल सिंह मकराना ने कहा, "इस बार मेयर जयपुर हमारी मर्जी से बनेगा और हम चाहेंगे कि जो हमें समर्थन देगा, वही उस गद्दी पर बैठे।" उन्होंने बीकानेर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह शर्म की बात थी कि जिस सांसद और केंद्रीय मंत्री ने एक काला कानून बनाया, वहां सवर्ण समाज के लोग उसे मंच पर बैठाकर उसका भाषण सुन रहे थे और तालियां बजा रहे थे। उन्होंने कहा कि अब समाज जाग चुका है और आगामी चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर ही रहेगा।
विकास की धीमी रफ्तार और बकाया भुगतान पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में राजस्थान के स्थानीय मुद्दों को भी उठाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों द्वारा कार्यकर्ताओं की अनदेखी, विकास कार्यों की धीमी रफ्तार, हजारों करोड़ रुपये के बकाया भुगतान और जयपुर को देश का नंबर वन शहर बनाने का अधूरा सपना जनता में नाराजगी पैदा कर रहा है। संगठन ने इन मुद्दों को लेकर सरकार और राजनीतिक दलों से जवाबदेही की मांग की।
चुनाव बहिष्कार नहीं, नोटा से विरोध दर्ज कराने की अपील
कौशिक ने कहा कि चुनाव का बहिष्कार करने के बजाय मतदाताओं को अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग करते हुए नोटा का विकल्प चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने अब तक विभिन्न राजनीतिक दलों को समर्थन दिया, लेकिन उनके अनुसार जनता को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में नोटा को सरकार और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति विरोध दर्ज कराने का माध्यम बताया गया।
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'नेताओं का गली-गली प्रचार जनता की नाराजगी का संकेत'
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा चुनावों में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं का गली-गली जाकर प्रचार करना जनता की नाराजगी का संकेत है। कौशिक ने कहा कि युवा देश की धरोहर हैं और समाज को बांटने वाली नीतियों का विरोध जारी रहेगा। संगठन ने आगामी चुनावों में अपने मुद्दों को लेकर सक्रिय भूमिका निभाने और मतदाताओं के बीच अभियान चलाने की बात कही।