राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व पीएचईडी मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया है। एसीबी द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार को जयपुर स्थित उनके आवास से हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया। बाद में आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने 11 मई 2026 तक एसीबी रिमांड मंजूर किया है।
एसीबी में दर्ज प्रकरण संख्या 245/2024 की जांच में सामने आया कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कम्पनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवैल कम्पनी ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कर विभिन्न टेंडरों में लगाए। आरोप है कि तत्कालीन मंत्री महेश जोशी ने तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, विभागीय अधिकारियों, संवेदकों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर इन फर्मों को करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर दिलवाए।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले में नियमों के विपरीत 50 करोड़ रुपये से अधिक के मेजर प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में साइट विजिट प्रमाण पत्र को अनिवार्य बनाया गया। इससे बोलीदाताओं की पहचान उजागर हुई और कथित रूप से टेंडर पुलिंग को बढ़ावा मिला। एसीबी का दावा है कि इस प्रक्रिया के चलते 30 से 40 प्रतिशत तक ऊंचे टेंडर प्रीमियम स्वीकृत किए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। जिन परियोजनाओं में अनियमितताओं के आरोप हैं, उनकी कुल राशि लगभग 20 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
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प्रकरण में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ इंजीनियर और अधिकारी शामिल हैं। वहीं तीन आरोपी अब भी फरार हैं, जिनके खिलाफ अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। एसीबी ने बताया कि कुछ अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर राहत मिली हुई है।
एसआईटी ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया है। अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में आरोपी से पूछताछ और साक्ष्य संकलन की कार्रवाई जारी है।