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जालंधर में पंजाब सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
पंजाब सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच बकाया महंगाई भत्ते (डीए), पे-कमिशन के बकाये और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अपनी लंबित मांगों को लेकर पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन (PSMSU) ने राज्यभर में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को जालंधर सहित विभिन्न स्थानों पर कर्मचारियों ने सरकार और मुख्यमंत्री के पुतले फूंककर रोष प्रदर्शन किया। इसके साथ ही यूनियन ने 5 और 6 नवंबर को राज्यभर में 'कलम छोड़ो-कंप्यूटर बंद' हड़ताल करने का ऐलान किया है। पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन के बैनर तले विभिन्न विभागों के क्लेरिकल कर्मचारियों ने एकजुट होकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पिछले करीब पौने पांच वर्षों से कर्मचारियों को केवल आश्वासन दे रही है, जबकि उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
कर्मचारियों के मुताबिक, 18 नवंबर 2022 को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने संबंधी नोटिफिकेशन जारी किया गया था, लेकिन अभी तक कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा 17 जुलाई 2020 और 15 जनवरी 2015 के पत्रों को रद्द करने तथा कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग भी लंबित है।कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उनका 13 फीसदी महंगाई भत्ता (डीए) और पे-कमिशन का बकाया अभी तक सरकार की तरफ लंबित है। यूनियन के अनुसार, 3 नवंबर को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के पक्ष में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। नेताओं का दावा है कि अदालत ने सरकार को डीए और पे-कमिशन का बकाया 10 दिनों के भीतर 6 प्रतिशत ब्याज सहित एकमुश्त जारी करने के निर्देश दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष कर रहे हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। यूनियन ने घोषणा की है कि 5 और 6 नवंबर को पंजाब के सभी सरकारी विभागों का क्लेरिकल स्टाफ पूरी तरह हड़ताल पर रहेगा। इस दौरान कर्मचारी कलम छोड़कर और कंप्यूटर बंद रखकर अपना विरोध दर्ज करवाएंगे। सरकारी कार्यालयों में दफ्तरी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारी नेताओं ने आम जनता से अपील की है कि संभावित परेशानी से बचने के लिए इन दो दिनों में सरकारी कार्यालयों में आने से परहेज करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के साथ मांगों को लेकर कोई ठोस समझौता होने पर ही हड़ताल वापस लेने पर विचार किया जाएगा।कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों के हक का पैसा यानी डीए और पे-कमिशन का बकाया जारी नहीं कर रही, जबकि दूसरी योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं किया तो 2027 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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