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पंजाब में नेताओं के परिवारों की सुरक्षा के लिए बनेगी अलग नीति, बैठक में इस बार पेश होगा प्रस्ताव

पंजाब में नेताओं खासकर मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए लागू नीति में बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार इस मामले में अब संबंधित नेता और उनके परिजनों को अलग-अलग सुरक्षा घेरा मुहैया कराने पर कल फैसला ले सकती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्य की सुरक्षा नीति संबंधी कमेटी की बैठक बुला ली है।

गौरतलब है कि सुरक्षा कमेटी की यह बैठक ऐसे समय में होने जा रही है, जब राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा अपनी ही पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा को प्रदान की गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा वापस लिए जाने के फैसले से सियासी विवाद खड़ा हो गया है। प्रताप बाजवा ने जहां सरकार के फैसले को सियासी बदला लेने वाला बताया है, वहीं सीएम को बाजवा के आरोपों पर सफाई देनी पड़ी है।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह कैप्टन अमरिंदर सिंह

जहरीली शराब: मामले की सीबीआई जांच की मांग, जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई करेगी हाईकोर्ट

पंजाब के तीन जिलों में जहरीली शराब पीने से 118 लोगों की मौत मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दो पूर्व विधायकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस याचिका पर सोमवार को जस्टिस अलका सरीन ने सुनवाई करते हुए कहा कि यह व्यापक जनहित से जुड़ा मामला है, ऐसे में इस याचिका पर जनहित याचिका के तौर पर ही सुनवाई की जा सकती है।

जस्टिस सरीन ने यह याचिका जनहित याचिका के तौर पर सुने जाने के लिए इसे चीफ जस्टिस की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया है। इस पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग को लेकर किला रायपुर के पूर्व विधायक तरसेम जोधां और बलाचौर के पूर्व विधायक हरगोपाल सिंह ने एडवोकेट बलतेज सिद्धू के जरिये उच्च न्यायालय में दायर याचिका में बताया है कि अवैध शराब के बनाने और तस्करी के मामले दो वर्षों से सामने आते रहे हैं, लेकिन पुलिस इन पर कभी भी सख्त कार्रवाई नहीं की है।

याचिकाकर्ता ने एसएएस नगर के लालडू में 14 नवंबर 2018 और 17 मई 2019 सहित लुधियाना के जोधां पुलिस थाने में 13 फरवरी 2020, खन्ना में 22 अप्रैल 2020 और फिर पटियाला के शम्भू में 14 मई 2020 में ऐसे ही मामले में दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए कहा है कि इन मामलों से साफ़ है कि दो वर्षों से यह कारोबार चल रहा है, जिस पर लगाम लगाए जाने की कभी सख्ती से कोशिश ही नहीं की गई है। याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय को बताया कि इस पूरे मामले में कई बड़े रसूखदार शामिल हैं, तभी पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है।

यहां तक कि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के दो बड़े नेता प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो राज्यपाल से मिलकर इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं। दोनों याचिकाकर्ताओं ने भी 7 अगस्त को पंजाब के मुख्य सचिव व अन्य को लीगल नोटिस भेज इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन मुख्य सचिव ने इसे आगे एक्साइज कमिश्नर को भेजते हुए इस पर उचित कार्रवाई के आदेश दे दिए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह तो राज्य का आम नागरिक भी जनता है कि इस गंभीर मामले की एक्साइज कमिश्नर जांच नहीं कर सकता, लिहाजा इस मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरुरी है जो सिर्फ सीबीआई कर सकती है। अब इस याचिका पर चीफ जस्टिस की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
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सैन्य उपकरणों पर पाबंदी, नए युग की शुरूआत, सेना का मनोबल बढ़ेगा, लेकिन गुणवत्ता जरूरी

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाते हुए भारत ने असॉल्ट राइफल, आर्टिलरी गन, राडार, हल्के जंगी हेलीकॉप्टर जैसे 101 रक्षा सामानों के आयात पर रोक लगा दी है। भारत अब अपनी जरूरत के इन सामानों और हथियारों को खुद बनाएगा। भारत सरकार के इस कदम को एक क्रांतिकारी कदम बताया जा रहा है और इससे सेना के रिटायर अधिकारी खासे उत्साहित हैं। वहीं अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि देश अब आत्मनिर्भरता की राह पर है और इससे घरेलू उद्योगों को फायदा मिलने वाला है।

रिटायर कर्नल व सैनिक वेलफेयर बोर्ड के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर मनमोहन सिंह का कहना है कि यह एक सराहनीय व क्रांतिकारी कदम है लेकिन हमें भारतीय सेना के हथियारों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर जोर देकर रखना होगा। भारत अब आर्टिलरी गन, जमीन से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की मिसाइलें, शिप से छोड़ी जा सकने वाली क्रूज मिसाइलें, असॉल्ट राइफल, हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, राडार, बैलेस्टिक हेलमेट, बुलेट प्रूफ जैकेट और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का आयात नहीं करेगा और नई रक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इन्हें अपने देश में ही बनाएगा, इस कदम से सेना के जवानों में उत्साह बढ़ेगा।

सीमा सुरक्षा बल के रिटायर अधिकारी अजीत सिंह का कहना है कि भारत सरकार का यह क्रांतिकारी कदम है। यह एक नये अध्याय की शुरुआत है, जिसका परिणाम पांच साल के भीतर ही दिखने को मिल जाएगा। सैन्य क्षेत्र में कितना ही कुछ है जो अभी बाहर से आता है लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए ऐसा एलान कर दिया, जिससे दुश्मन का कांपना तय है। 
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मजबूत होंगी हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ की डिफेंस इंडस्ट्री, ताकत के साथ रोजगार भी बढ़ेगा

रक्षा मंत्रालय ने 110 सैन्य उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी है। इसी के साथ अगले छह सात साल में घरेलू सैन्य उद्योगों को चार लाख करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे। इससे हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में स्थित स्थानीय डिफेंस इंडस्ट्रीज को भी बड़ा बूस्टअप मिलेगा। रक्षा उत्पाद विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से स्थानीय इंडस्ट्री को न केवल और मजबूती मिलेगी। बल्कि रक्षा उपकरणों में मेक इन इंडिया की ओर बढ़े कदमों से देश की ताकत के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

देखा जाए तो उत्तर भारत में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में रक्षा उत्पाद बनाने की कई महत्वपूर्ण एमएसएमई (लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम) इकाइयां है। कुछेक बड़े उद्योग भी हैं। मगर हरियाणा उत्तर भारत में सबसे ज्यादा रक्षा उत्पाद तैयार करने वाला राज्य है।

हरियाणा के अंबाला, पंचकूला, फरीदाबाद, पलवल, पृथला, बहादुरगढ़, गुरुग्राम व झज्जर में रक्षा उपकरण बनाने वाली कई एमएसएमई इकाइयां मौजूद हैं। जो सरकार की ओर से विभिन्न रक्षा उत्पाद बनाने के लिए अप्रूव हैं। इसी तरह चंडीगढ़ समेत पंजाब के रोपड़, लालड़ू और मोहाली व हिमाचल के बद्दी और सोलन में भी रक्षा उत्पाद बनाने वाले उद्योग स्थापित हैं।
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कैप्टन बोले- बाजवा की सुरक्षा वापस लेना बदला नहीं, वे इसे जन्मसिद्ध अधिकार मान रहे

मेजर जनरल सी. प्रकाश और डॉ. अनिल जैन।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा की सुरक्षा वापस लेने पर उनके द्वारा लगाए बदले के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह 2013 की राज्य की सुरक्षा नीति के अनुसार उन्हें पेश खतरे की समय-समय पर की जाने वाली समीक्षा पर आधारित साधारण प्रक्रिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसी भी व्यक्ति को सही मायनों में जरूरत होने पर सुरक्षा देने से इनकार नहीं करेगी लेकिन बेवजह पुलिस मुलाजिमों को व्यस्त नहीं रखा जा सकता। खासकर उस समय पर जब कोरोना महामारी के दौरान पुलिस बहुत नियंत्रण और दबाव से गुजर रही है।

कैप्टन ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से किए जाने वाले खतरे के मूल्यांकन के मुताबिक पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान कर रही है। 

इस संबंध में बाजवा की शिकायत ओछी और बेमानी है और न ही यह तथ्यों पर आधारित है। बादल परिवार को अधिक खतरे के मद्देनजर गृह मंत्रालय की तरफ से दी जाने वाली जेड प्लस सुरक्षा के अलावा पंजाब पुलिस की तरफ से भी सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। बाजवा और बादलों के मामले में कोई तुलना नहीं हो सकती। बाजवा पर किसी खतरे संबंधी कोई सूचना न होने के कारण वे पंजाब सरकार की सुरक्षा लेने के लिए श्रेणीबद्ध नहीं हैं।
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विशेषज्ञ बोले- आत्मनिर्भर बनना ठीक, लेकिन सैन्य उपकरणों के आयात पर तुरंत पाबंदी लगाना गलत

देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना से जुड़े 101 उपकरणों के आयात पर पाबंदी लगाने की घोषणा की। इसे देश में तैयार करने के फैसले पर सेना से जुड़े विशेषज्ञ अलग-अलग राय दे रहे हैं। पूर्व सैनिक अफसरों के अनुसार, इस समय ऐसा तरह का फैसला लेना गलत है क्योंकि एक तरफ जहां चीन के साथ सीधा विवाद चल रहा है।

वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान से हमारे संबंध जगजाहिर हैं। यही नहीं अब तो बांग्लादेश और नेपाल भी हमें आंखें दिखा रहे हैं। अगर रक्षा उपकरणों का आयात बंद हो जाएगा तो जरूरत पड़ने पर हमारे सैनिक क्या करेंगे। हालांकि लंबे समय के लिए यह योजना ठीक है। 

रिटायर्ड कर्नल मुख्तिायर सिंह कुलार बताते हैं कि सरकार ने 101 उपकरणों के आयात पर तुरंत पाबंदी लगा दी है। सवाल है कि अगर चीन के साथ युद्ध की स्थिति बन गई तो सेना क्या करेगी। जिन उपकरणों को भारत में तैयार किया जाना है, उन्हें एक दिन में तो तैयार नहीं किया जा सकता है। इसके लिए लंबा समय लगेगा। 

सरकार की विदेश नीति इस संबंध में ठीक नहीं है। हां, लंबे समय में आत्मनिर्भर होने की बात करे तो यह सही माना जा सकता है। रिटायर्ड कर्नल कुलार कहते हैं कि इस समय अमेरिका ने भारत को बली का बकरा बना रखा है। बड़े देश अपने हथियार बेचने के लिए इस तरह  के तनाव को बढ़ा रहे हैं। हथियारों की होड़ में हम अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध बिगाड़ रहे हैं।
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पंजाब सचिवालय समेत सरकारी दफ्तरों में कलम छोड़ हड़ताल शुरू, मांगों के लिए लामबंद हुए कर्मी

पंजाब: मोहाली समेत तीन जिलों में चार नई टेस्टिंग लैब शुरू, रोजाना होंगे 20 हजार टेस्ट

पंजाब में लगातार कोरोना का कहर बढ़ रहा है। सरकार ने महामारी को लेकर बेहद गंभीर है। इसी कड़ी में सोमवार को राज्य के तीन जिलों में चार नई कोविड टेस्टिंग लैब की शुरूआत सोमवार को की गई। इसी के साथ पंजाब की रोजाना की टेस्टिंग क्षमता 16 से बढ़कर 20 हजार हो गई है। इन लैबों में अति आधुनिक उपकरण और विशेष स्टाफ तैनात किया है। 

यह जानकारी सोमवार को मेडिकल शिक्षा एवं खोज मंत्री ओपी सोनी और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने दी। इस दौरान वे फेज-5 स्थित पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेटर एंड पंजाब फॉरेसिंक लैब में कोरोना लैब का शुभारंभ करने पहुंचे थे। मंत्री सोनी ने कहा कि देश भर में कोविड केसों में काफी बढ़ोतरी हो रही है।

वहीं, पंजाब इस चुनौती का सामना करने को तैयार है। पंजाब और सेहत के बुनियादी ढांचे और वायरस टेस्टिंग क्षमता को सबसे तेजी से अपग्रेड करने वाले राज्यों में एक है। मंत्री सोनी ने बताया कि मोहाली समेत चार लैब राज्य में शुरू हुई हैं। इनमें कोविड-19 वायरल टेस्टिंग की क्षमता 16 हजार टेस्ट से बढ़ाकर 20 हजार टेस्ट रोजाना हो जाएगी। 
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