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Goddess Singhvahini, enshrined amidst dense forests, is an ancient idol dating back to the Kalachuri period.
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नवरात्रि विशेष: घने जंगलों के बीच विराजमान मां सिंहवाहिनी, कलचुरी काल की प्राचीन प्रतिमा है खास पहचान
घने जंगलों के बीच स्थित प्राचीन देवी मंदिर, मां के दर्शन की लालसा और पीढ़ियों से चली आ रही पूजा की परंपरा। शहडोल जिले के जैतपुर क्षेत्र के भटिया गांव में स्थित मां सिंहवाहिनी देवी मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं। नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। प्राचीन प्रतिमा और मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं इस धाम को खास पहचान देती हैं।
कलचुरी काल की मानी जाती है प्रतिमा
भटिया स्थित मां सिंहवाहिनी मंदिर में स्थापित देवी की प्रतिमा को 9वीं-10वीं शताब्दी का माना जाता है। यह काल क्षेत्र में कलचुरी राजवंश के प्रभाव से जुड़ा रहा है। मंदिर की प्राचीनता इसे धार्मिक महत्व के साथ ऐतिहासिक पहचान भी देती है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, पहले यह इलाका घने जंगलों से घिरा था और देवी का स्थान मिट्टी से ढंका हुआ था। मिट्टी से ढंके होने के कारण इस स्थान का नाम भटिया पड़ने की बात भी कही जाती है। हालांकि, इस जनश्रुति की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
मनोकामना लेकर पहुंचते हैं भक्त
स्थानीय लोगों में मान्यता है कि मां सिंहवाहिनी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर में सुबह से रात तक भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है। धार्मिक अनुष्ठान और माता के जयकारों से मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहता है।
तीन पीढ़ियों से जारी है पूजा की परंपरा
मंदिर में पूजा-अर्चना की परंपरा भी इसकी खास पहचान है। शहडोल जिला प्रशासन की पर्यटन वेबसाइट के अनुसार, वर्ष 1933 में पुजारी शिवप्रसाद द्विवेदी ने यहां पूजा की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद रामसुंदर द्विवेदी और अब कैलाश द्विवेदी पूजा-अर्चना कर रहे हैं। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा मंदिर की धार्मिक विरासत को आगे बढ़ा रही है।
भटिया का मां सिंहवाहिनी मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां प्राचीन प्रतिमा, प्राकृतिक वातावरण और स्थानीय आस्था का संगम देखने को मिलता है। नवरात्र के दौरान यह धाम आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना रहता है।
पुजारी श्लोक द्विवेदी ने बताया कि मां सिंहवाहिनी का यह दरबार प्राचीन काल से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। नवरात्र के दौरान दूर-दूर से भक्त मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु मां से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। श्रद्धालु रामकृष्ण सिंह ने बताया कि मां सिंहवाहिनी के दरबार में दर्शन करने से मन को शांति मिलती है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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