{"_id":"6ad263c6ce580651f20e530e","slug":"mp-row-congress-questions-4-27-crore-ujjain-event-contract-over-6-minute-tender-delay-2026-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमपी में ‘आशीर्वाद का दीया’ पर बवाल! डेडलाइन के 6 मिनट बाद आया टेंडर, फिर भी कंपनी को मिला 4.27 करोड़ का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमपी में ‘आशीर्वाद का दीया’ पर बवाल! डेडलाइन के 6 मिनट बाद आया टेंडर, फिर भी कंपनी को मिला 4.27 करोड़ का काम
Fri, 16 Oct 2026 11:20 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:20 PM IST
सार
उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के टेंडर को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने प्रस्ताव देर से मिलने के बावजूद कंपनी को 4.27 करोड़ रुपये का काम देने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है, जबकि पर्यटन निगम ने प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया है।
विज्ञापन
कांग्रेस प्रदेश महासचिव अमित शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उज्जैन में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। कांग्रेस प्रदेश महासचिव अमित शर्मा का दावा है कि अहमदाबाद की गो बनाना कंपनी ने निर्धारित समय-सीमा के छह मिनट बाद वित्तीय प्रस्ताव भेजा, इसके बावजूद उसे करीब 4.27 करोड़ रुपये का काम सौंप दिया गया। वहीं, मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बताया है।
शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शर्मा ने कहा कि पर्यटन विभाग ने 16 सितंबर 2026 को कार्यक्रम के लिए वित्तीय प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। उनके अनुसार, प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा शाम पांच बजे थी, जबकि गो बनाना का प्रस्ताव शाम 5:21 बजे प्राप्त हुआ। हालांकि, पर्यटन विभाग के ईमेल में समय-सीमा शाम 5:15 बजे दर्ज है और कंपनी के प्रस्ताव से जुड़े ईमेल पर शाम 5:21 बजे का समय है। इस रिकॉर्ड के मुताबिक प्रस्ताव छह मिनट देरी से आया था।
ये भी पढ़ें- भोपाल: सड़क हादसे में ब्रेन डेड हुईं शिवानी शर्मा ने अंगदान से बचाई तीन लोगों की जान, गांव में गार्ड ऑफ ऑनर
विज्ञापन
दो कंपनियों के प्रस्ताव में करीब 3.90 करोड़ का अंतर
शर्मा के मुताबिक, गो बनाना ने करीब 4.27 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया, जबकि दूसरी कंपनी दीपाली डिजाइन की ओर से करीब 8.18 करोड़ रुपये की राशि बताई गई। उन्होंने दोनों प्रस्तावों के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितता की जांच की मांग की। पर्यटन निगम के कार्यादेश में गो बनाना को सबसे कम दर यानी एल-1 के आधार पर चुने जाने का उल्लेख है। कंपनी के खर्च-पत्रक में कलाकारों की प्रस्तुतियों, मंच, ध्वनि-प्रकाश, सजावट और आतिशबाजी सहित कई मदें शामिल हैं। इसमें कवि शैलेश लोढ़ा के कार्यक्रम के लिए 22 लाख, 75 कलाकारों के नृत्य कार्यक्रम के लिए 15 लाख और हवाई आतिशबाजी के लिए 35 लाख रुपये का प्रावधान दर्ज है। यह खर्च-पत्रक बजट का ब्योरा है, अंतिम भुगतान का प्रमाण नहीं।
ये भी पढ़ें- एमपी: दीपावली से पहले चंबल में होगा औद्योगिक सम्मेलन, एक्सप्रेस-वे के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र की तैयारी
प्रदेश के अन्य आयोजनों की जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर हुए दीपोत्सव कार्यक्रमों पर कुल खर्च 100 से 150 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। उन्होंने सभी आयोजनों की निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, बिल और भुगतान की जांच कराने की मांग की। शर्मा ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आशंका जताई कि उज्जैन के कार्यक्रम का अंतिम बिल बढ़ सकता है। ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
ये भी पढ़ें- त्विषा शर्मा केस: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक, प्रतिवादियों से मांगा जवाब
पर्यटन निगम ने कहा- समिति ने चुनी एजेंसी
मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने सफाई दी कि उसकी जिम्मेदारी केवल सांस्कृतिक संध्या आयोजित कराने की थी। मुख्य दीपोत्सव और दीप प्रज्ज्वलन निगम के कार्यक्षेत्र में नहीं थे। निगम के अनुसार, कलेक्टर और संस्कृति संचालनालय से मिले पत्रों के आधार पर उसे मंच, ध्वनि-प्रकाश, सजावट और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की व्यवस्था सौंपी गई थी। निगम ने बताया कि समय की कमी को देखते हुए सक्षम स्तर की मंजूरी के बाद पहले से पंजीकृत एजेंसियों से ईमेल पर वित्तीय प्रस्ताव बुलाए गए। अधिकृत समिति ने प्रस्तावों की जांच की और गो बनाना की दरें सबसे कम पाए जाने पर उसे काम देने की अनुशंसा की। निगम का कहना है कि कार्यादेश समिति की अनुशंसा के आधार पर जारी हुआ और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी।
विज्ञापन
शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शर्मा ने कहा कि पर्यटन विभाग ने 16 सितंबर 2026 को कार्यक्रम के लिए वित्तीय प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। उनके अनुसार, प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा शाम पांच बजे थी, जबकि गो बनाना का प्रस्ताव शाम 5:21 बजे प्राप्त हुआ। हालांकि, पर्यटन विभाग के ईमेल में समय-सीमा शाम 5:15 बजे दर्ज है और कंपनी के प्रस्ताव से जुड़े ईमेल पर शाम 5:21 बजे का समय है। इस रिकॉर्ड के मुताबिक प्रस्ताव छह मिनट देरी से आया था।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- भोपाल: सड़क हादसे में ब्रेन डेड हुईं शिवानी शर्मा ने अंगदान से बचाई तीन लोगों की जान, गांव में गार्ड ऑफ ऑनर
विज्ञापन
दो कंपनियों के प्रस्ताव में करीब 3.90 करोड़ का अंतर
शर्मा के मुताबिक, गो बनाना ने करीब 4.27 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया, जबकि दूसरी कंपनी दीपाली डिजाइन की ओर से करीब 8.18 करोड़ रुपये की राशि बताई गई। उन्होंने दोनों प्रस्तावों के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितता की जांच की मांग की। पर्यटन निगम के कार्यादेश में गो बनाना को सबसे कम दर यानी एल-1 के आधार पर चुने जाने का उल्लेख है। कंपनी के खर्च-पत्रक में कलाकारों की प्रस्तुतियों, मंच, ध्वनि-प्रकाश, सजावट और आतिशबाजी सहित कई मदें शामिल हैं। इसमें कवि शैलेश लोढ़ा के कार्यक्रम के लिए 22 लाख, 75 कलाकारों के नृत्य कार्यक्रम के लिए 15 लाख और हवाई आतिशबाजी के लिए 35 लाख रुपये का प्रावधान दर्ज है। यह खर्च-पत्रक बजट का ब्योरा है, अंतिम भुगतान का प्रमाण नहीं।
ये भी पढ़ें- एमपी: दीपावली से पहले चंबल में होगा औद्योगिक सम्मेलन, एक्सप्रेस-वे के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र की तैयारी
प्रदेश के अन्य आयोजनों की जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर हुए दीपोत्सव कार्यक्रमों पर कुल खर्च 100 से 150 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। उन्होंने सभी आयोजनों की निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, बिल और भुगतान की जांच कराने की मांग की। शर्मा ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आशंका जताई कि उज्जैन के कार्यक्रम का अंतिम बिल बढ़ सकता है। ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
ये भी पढ़ें- त्विषा शर्मा केस: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक, प्रतिवादियों से मांगा जवाब
पर्यटन निगम ने कहा- समिति ने चुनी एजेंसी
मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने सफाई दी कि उसकी जिम्मेदारी केवल सांस्कृतिक संध्या आयोजित कराने की थी। मुख्य दीपोत्सव और दीप प्रज्ज्वलन निगम के कार्यक्षेत्र में नहीं थे। निगम के अनुसार, कलेक्टर और संस्कृति संचालनालय से मिले पत्रों के आधार पर उसे मंच, ध्वनि-प्रकाश, सजावट और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की व्यवस्था सौंपी गई थी। निगम ने बताया कि समय की कमी को देखते हुए सक्षम स्तर की मंजूरी के बाद पहले से पंजीकृत एजेंसियों से ईमेल पर वित्तीय प्रस्ताव बुलाए गए। अधिकृत समिति ने प्रस्तावों की जांच की और गो बनाना की दरें सबसे कम पाए जाने पर उसे काम देने की अनुशंसा की। निगम का कहना है कि कार्यादेश समिति की अनुशंसा के आधार पर जारी हुआ और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी।
