चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान और भीषण बाढ़ से हुए नुकसान के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने और नदी के प्राकृतिक बहाव को प्रभावित करने वाले निर्माणों की जांच के लिए कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की है। यह टीम सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की गाइडलाइन के अनुसार मंदाकिनी नदी के तटीय क्षेत्रों में हुए निर्माण और अन्य गतिविधियों की जांच करेगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित मामलों में कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम की कमान मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर को सौंपी गई है। टीम में नगर परिषद चित्रकूट के सीएमओ, नायब तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग के एसडीओ, जल संसाधन विभाग के एसडीओ और नगर परिषद चित्रकूट के सब इंजीनियर को शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि हाल ही में चित्रकूट के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी मंदाकिनी के प्रवाह क्षेत्र में आने वाले सरकारी और गैर-सरकारी अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया था।
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हाई फ्लड लेवल की होगी नए सिरे से पहचान
जांच टीम मंदाकिनी के तटीय क्षेत्रों में मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माण कार्यों की सुप्रीम कोर्ट और NGT की गाइडलाइन के आधार पर जांच करेगी। इसके साथ ही नदी के हाई फ्लड लेवल की भी नए सिरे से पहचान और सीमांकन किया जाएगा। प्रशासन ने 28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ को गंभीरता से लिया है। उस दौरान आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी का निर्धारित हाई फ्लड लेवल 140 मीटर था, जबकि पानी करीब 145.66 मीटर तक पहुंच गया था। इस दौरान हनुमानधारा ब्रिज के बह जाने की जानकारी सामने आई थी। अब हाई फ्लड लेवलको स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाएगा, ताकि भविष्य में नदी के बढ़ते जलस्तर से संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके।
अवैध प्लॉटिंग और जर्जर भवन भी जांच के दायरे में
मंदाकिनी नदी के तटीय क्षेत्र में हुई अवैध प्लॉटिंग की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा जर्जर और कमजोर भवनों को चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नदी किनारे नए निर्माण या पुनर्निर्माण पर रोक लगाने की जरूरत को लेकर भी टीम सर्वे करेगी।
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बताया कि मंदाकिनी नदी से लगे तटीय क्षेत्रों में हाल ही में आई बाढ़ और उससे हुए नुकसान को देखते हुए यह जांच टीम बनाई गई है। उन्होंने कहा कि नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा बनने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माणों की जांच कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।