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परंपरा: गोटमार मेले में चले रिवाज के पत्थर, 1330+ घायल, पांढुर्णा वालों ने छह बजे झंडा तोड़कर जीत हासिल की
Fri, 11 Sep 2026 10:40 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पांढुर्णा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पांढुर्णा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 11 Sep 2026 10:40 PM IST
सार
पांढुर्णा के प्रसिद्ध गोटमार मेले में परंपरा के तहत पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई। हादसे में 1330 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें आठ गंभीर घायलों को नागपुर और 120 को जिला अस्पताल रेफर किया गया। शाम छह बजे पांढुर्णा पक्ष ने झंडा तोड़कर जीत हासिल की।
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पांढुर्णा में गोटमार मेला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शुक्रवार को पांढुर्णा में आयोजित प्रसिद्ध गोटमार मेले में परंपरा के नाम पर हुई पत्थरबाजी ने एक बार फिर खूनी तस्वीर सामने ला दी। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थर बरसाए गए, जिसमें 1330 से अधिक लोग घायल हो गए। इसमें से 8 गंभीर घायलों को नागपुर पहुंचाया गया एवं 120 घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। अंततः शाम 6:00 बजे पांढुर्णा पक्ष ने झंडा तोड़कर जीत हासिल की।
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गोटमार मेले में घायल
- फोटो : अमर उजाला
पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल और स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचाया गया। अचानक शुरू हुई पत्थरों की बौछार के बीच कई लोगों को बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। इस मेले की परंपरा में दोनों पक्षों के बीच झंडे पर कब्जे को लेकर मुकाबला होता है। नदी के बीच लगे झंडे को हासिल करने के लिए खिलाड़ी पत्थर चलाते हैं। वर्षों पुरानी इस परंपरा के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते रहे हैं और कई बार मौतें भी हो चुकी हैं।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाने के बावजूद पत्थरबाजी को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर होने वाले इस आयोजन को हिंसा से मुक्त और सुरक्षित स्वरूप कब दिया जाएगा।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाने के बावजूद पत्थरबाजी को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर होने वाले इस आयोजन को हिंसा से मुक्त और सुरक्षित स्वरूप कब दिया जाएगा।
