कथित रूप से रेत निकालने के लिए खोदे गए गहरे पोखर में डूबने से तीन मासूम बच्चों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। तीखी इमली–लखनकोट क्षेत्र में हुए इस दर्दनाक हादसे में 9 वर्षीय लवकुश पिता राजा चौहान की मौत हो गई, जबकि तलाश के बाद सगे भाई राजवीर और यशराज के शव भी बरामद हुए। दोनों भाइयों के पिता का नाम गोविंद बताया गया है। एक ही हादसे में तीन बच्चों की मौत से तीन परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
एक-दूसरे का हाथ थामे मिले भाई
तलाश के दौरान राजवीर और यशराज के शव एक ही जगह मिले। सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों सगे भाई एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए थे। यह दृश्य हादसे की भयावहता को बयां करता है। जिन बच्चों की जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी, उनकी मौत ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है। जानकारी के अनुसार, हादसा रविवार दोपहर करीब 3:30 से 4 बजे के बीच हुआ। लवकुश को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने प्राथमिक परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में दोनों भाइयों के शव भी बरामद हुए।
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गड्ढा खोदने वालों की जवाबदेही तय हो
रेत निकालने के लिए गहरे गड्ढे खोदे जाने और उन्हें किस स्थिति में छोड़ा गया था, अब यह जांच का अहम विषय है। यदि पोखर के आसपास सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड या अन्य जरूरी इंतजाम नहीं थे, तो सवाल उठना लाजिमी है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां क्यों नहीं बरती गईं। क्या गड्ढा खोदने वालों ने सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया था? क्या रेत निकालने की अनुमति थी? क्या काम पूरा होने के बाद गड्ढे को सुरक्षित किया गया था? इन सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना चाहिए। तीन बच्चों की मौत के बाद केवल संवेदना जताना पर्याप्त नहीं है; घटना के कारणों और जिम्मेदारी की पड़ताल जरूरी है।
प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल
इस हादसे ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि क्षेत्र में ऐसा गहरा और खतरनाक पोखर मौजूद था, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे? क्या संबंधित अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था? यदि सुरक्षा में कोई कमी थी, तो उसे दूर क्यों नहीं किया गया? फिलहाल, प्रशासनिक लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए निष्पक्ष जांच के जरिए यह तय किया जाना चाहिए कि सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां किसकी थीं और उनका पालन हुआ या नहीं। जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
तीन मौतें, अब कार्रवाई का इंतजार
यह हादसा खुले और गहरे गड्ढों से पैदा होने वाले खतरे की गंभीर चेतावनी है। प्रशासन को क्षेत्र के ऐसे सभी गड्ढों का निरीक्षण कराना चाहिए, जहां लोगों और बच्चों के लिए खतरा हो सकता है। जरूरत के अनुसार सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड और अन्य जरूरी इंतजाम किए जाने चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन मासूमों की जान जाने के बाद क्या जिम्मेदारी तय होगी? क्या गड्ढा खोदने वालों की भूमिका और संबंधित विभागों की निगरानी की निष्पक्ष जांच होगी? क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
तीन परिवारों का यह अपूरणीय नुकसान वापस नहीं भरा जा सकता, लेकिन निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और प्रभावी सुरक्षा उपाय भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने की दिशा में जरूरी कदम हो सकते हैं। मामले में कलेक्टर नीतू माथुर से भी चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि पहले यहां पर एक कुआं था, जिसे आसपास वालों ने मछली पालने के लिए बड़ा कर दिया। हालांकि अधिकारी को भेज कर इसकी जांच कराई जा रही है, यहां से रेत निकल जा रही थी या नहीं।