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हरियाणा में मौसम बदला: कई जिलों में अचानक बारिश से मंडियों में भीगा धान, प्रशासन के इंतजामों की खुली पोल

Sun, 11 Oct 2026 02:18 PM IST
Naveen अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा Published by: Naveen Updated Sun, 11 Oct 2026 02:18 PM IST
सार

हरियाणा में बारिश का असर केवल मंडियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेतों में धान की कटाई भी प्रभावित हुई है। खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल पर बारिश का असर पड़ने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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Weather changes in Haryana: Sudden rain across several districts soaks paddy in market yards
मंडियों में धान भीगा - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा में आज दोपहर अचानक मौसम बदलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। कई जिलों में आसमान में काले बादल छाने के बाद हुई बारिश से जिले की लगभग सभी अनाज मंडियों में खुले में पड़ा धान भीग गया। बारिश इतनी अचानक हुई कि मजदूरों को धान को तिरपाल से ढकने तक का समय नहीं मिला। मजदूर बारिश के बीच ही धान को बचाने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन उनकी मेहनत पूरी तरह काम नहीं आई। ऊपर से तिरपाल ढकने के बावजूद नीचे से बारिश का पानी धान तक पहुंचता रहा। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।

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खरीद बंद, मंडियों में जारी थी आवक
यमुनानगर में रविवार को छुट्टी की वजह से मंडियों में धान की खरीद बंद थी, लेकिन रोजाना की तरह धान की आवक जारी रही। किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहे थे। ऐसे में खुले में रखे धान को बारिश से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में फसल भीग गई। अचानक हुई बारिश ने मंडियों में धान को सुरक्षित रखने के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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धान को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लिया गया, लेकिन कई जगह यह व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। मजदूरों ने आनन-फानन में धान के ढेरों को ढकने का प्रयास किया। इसके बावजूद पानी नीचे से धान में समाता रहा। इससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को अब धान को सुखाने और सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी है।
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खेतों में कटाई भी होगी प्रभावित
बारिश का असर केवल मंडियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेतों में धान की कटाई भी प्रभावित हुई है। खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल पर बारिश का असर पड़ने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बारिश के बाद खेतों में नमी बढ़ने से कटाई का काम रुक सकता है। मौसम साफ होने के बाद भी खेतों के सूखने में समय लगेगा। ऐसे में किसानों को अगले दो से तीन दिन तक धान की कटाई में परेशानी आने की आशंका है।

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झज्जर में बदला मौसम

झज्जर में सुबह से ही मौसम बदला हुआ है। सुबह से आसमान में काले बादल छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने भी हल्की बूंदाबांदी और बारिश की संभावना जताई है। यदि बारिश होती है तो मंडी में रखी सैकड़ो क्विंटल बाजरा और धान की फसल भीग सकती है। हालांकि मंडी में शेड के नीचे भी फसल पड़ी हुई है, लेकिन उससे ज्यादा शेड से बाहर खुले में फसल पड़ी हुई है।

करनाल की अनाज मंडियों में बारिश से भीगा धान, खरीद व्यवस्था की खुली पोल

करनाल में रविवार को हुई बारिश से अनाज मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा धान भीग गया। अचानक बदले मौसम और तेज बारिश ने मंडियों में फसल की सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों को अपनी उपज बारिश से बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। इसके बावजूद खुले में पड़ी धान की ढेरियों और बोरियों को भीगने से नहीं बचाया जा सका।

सुबह से आसमान में घने बादल छाए हुए थे। पहले बूंदाबांदी हुई और इसके बाद तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण मंडियों में खुले में रखे धान पर पानी गिरा। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए तिरपाल और शेड का सहारा लेते नजर आए। हालांकि, पर्याप्त ढके हुए स्थान की कमी के चलते धान को सुरक्षित रखने में परेशानी हुई।

अब धान सुखाने की बढ़ेगी चिंता
बारिश में धान भीगने के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम साफ होने पर उन्हें फसल को दोबारा सुखाने की मशक्कत करनी पड़ सकती है। धान में नमी बढ़ने से सरकारी खरीद के दौरान भी परेशानी आने की आशंका है। निर्धारित मानकों के अनुसार नमी नहीं होने पर किसानों को फसल सुखाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

किसानों की मांग है कि मंडियों में धान को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त तिरपाल, शेड और अन्य जरूरी इंतजाम किए जाएं, ताकि मौसम खराब होने पर उनकी मेहनत की कमाई को नुकसान न उठाना पड़े।

नरवाना में तेज बारिश से मौसम हुआ सुहावना, धान की खड़ी फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता

नरवाना में रविवार को मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से ही ठंडक और तेज हवाओं के चलते मौसम बदला हुआ था। करीब 10 बजे आसमान में अचानक अंधेरा छा गया, जिसके बाद लगभग 11 बजे हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई। दोपहर 12:20 बजे के आसपास तेज बारिश होने लगी। बारिश के बाद मौसम एकदम ठंडा हो गया और लोगों को गर्मी से राहत मिली। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का असर भी अलग-अलग देखने को मिला। पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में तेज बारिश हुई, जबकि नया बस स्टैंड क्षेत्र में हल्की बारिश दर्ज की गई। वहीं, नरवाना नई अनाज मंडी में उस समय तक केवल बूंदाबांदी होने और तेज हवाएं चलने की सूचना थी। अचानक बदले मौसम के कारण आसमान में बादल छाए रहे और वातावरण में ठंडक बढ़ गई।

धान की खड़ी फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता
बारिश से जहां आम लोगों को मौसम सुहावना होने से राहत मिली, वहीं खेतों में धान की फसल खड़ी होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिन किसानों की धान की कटाई अभी बाकी है, उनके लिए बारिश परेशानी का कारण बन सकती है। खेतों में खड़ी फसल के दौरान बारिश और तेज हवाओं से फसल प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में किसान मौसम के मिजाज पर नजर बनाए हुए हैं। मंडियों में धान लेकर पहुंचने वाले किसानों और खरीद व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए भी मौसम में बदलाव अहम माना जा रहा है।

मोहड़ा अनाज मंडी में बारिश से भीगा धान, व्यवस्थाओं की खुली पोल

अंबाला कैंट की मोहड़ा अनाज मंडी में रविवार को हुई बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मंडी प्रशासन के पुख्ता दावों की पोल उस समय खुल गई जब खुले आसमान के नीचे पड़ा किसानों का धान पानी में भीग गया।

अचानक शुरू हुई बारिश से बचने के लिए किसानों ने अपनी उपज बचाने की भरपूर जद्दोजहद की। कई किसानों ने खुद के तिरपाल से धान को ढंकने की कोशिश की, तो कुछ ने शेड के नीचे बची-खुची जगह में बोरियां बचाने की भागदौड़ की। इसके बावजूद, अधिकांश किसानों का धान खुले में ही लावारिस हालत में पड़ा रहा। बोरियों के मुंह खुले होने के कारण धान के ढेर पूरी तरह भीग गए।



किसानों का कहना है कि उनकी सूखी हुई फसल अब बारिश के पानी में भीग चुकी है। मौसम साफ होने के बाद उन्हें एक बार फिर से धान सुखाने और फटकने की मशक्कत करनी होगी। इस प्रकार धान के भीगने से उसमें नमी की मात्रा बढ़ेगी, जिससे सरकारी खरीद के दौरान उन्हें नुकसान और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने मंडी प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

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