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अदालत: आईएएस पोरवाल और संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, अवमानना मामले में हाईकोर्ट का कड़ा रुख
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 09:54 PM IST
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अवमानना याचिका की जानकारी होने के बावजूद अनावेदक आईएएस अधिकारियों द्वारा परिपालन रिपोर्ट या वकील नियुक्त नहीं किए जाने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल तथा तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। एकलपीठ ने गिरफ्तारी आदेश के निष्पादन की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी को सौंपते हुए दोनों अधिकारियों की 21 सितंबर को व्यक्तिगत उपस्थित सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं।
सागर कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन आफिसर शीला सेन की तरफ से दायर की गई अवमानना याचिका में कहा गया था कि उन्होंने नियमितीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण 90 दिनों में किया जाए। निर्धारित समय अवधि में अभ्यावेदन का निराकरण नहीं होने के कारण उक्त अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका में तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल तथा तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर को अनावेदक बनाया गया था।
वकील तक नियुक्त नहीं किया था
अवमानना याचिका के संबंध में सागर कलेक्टर की तरफ से तीन दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट रजिस्ट्री को पत्र के माध्यम से सूचित किया गया था कि मामले में तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त किया गया है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कलेक्टर द्वारा भेजे गए पत्र से ऐसा लगाता है कि दोनों प्रतिवादी को इस अवमानना याचिका के लंबित होने के बारे में पूरी जानकारी है। उन्होंने किसी वकील को नियुक्त कर पेश होने या अनुपालन रिपोर्ट पेश करने की जहमत नहीं उठाई है। प्रतिवादियों का यह व्यवहार राज्य सरकार के प्रशासन की बहुत खराब स्थिति को दर्शाता है। इसमें उन्होंने अवमानना याचिकाओं के मामले में पूरी तरह से निष्क्रियता अपनाई है। वे केवल कोर्ट की रजिस्ट्री को संपर्क अधिकारी की नियुक्ति के बारे में पत्र लिखते हैं, लेकिन उसके बाद न तो कोई वकील नियुक्त करते हैं और न ही कोई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करते हैं। इसलिए कोर्ट के पास प्रतिवादियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता कविता गुप्ता तथा अधिवक्ता विद्या प्रसाद ने पैरवी की।
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