बैतूल में कथित धर्मांतरण के मामले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मिशन स्कूल में आयोजित प्रार्थना सभा पर कार्रवाई के बाद अब ईसाई मसीही समाज और मिशनरी से जुड़े लोग भी मुखर हो गए हैं। उन्होंने प्रार्थना सभाओं में किसी भी तरह का व्यवधान डालने पर विरोध दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
दरअसल, बीते रविवार को बैतूल के सदर इलाके में स्थित एक मिशन स्कूल में मसीही समाज की धर्मसभा आयोजित की गई थी। बताया जा रहा है कि इस सभा में ढाई सौ से अधिक गैर-ईसाई लोग भी शामिल हुए थे। इसी दौरान हिंदू संगठनों को सभा की जानकारी मिली और उनके कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। वहां हंगामे की स्थिति बनने के बाद पुलिस ने धर्मसभा से दो पादरियों को हिरासत में लिया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में काफी हंगामा हुआ। अब कार्रवाई के विरोध में ईसाई समुदाय और मिशनरी से जुड़े लोगों ने अपना पक्ष सामने रखा है। मसीही समाज के मिशनरी प्रचारकों का कहना है कि यदि ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाओं में किसी भी तरह का व्यवधान डाला गया तो वे इसका विरोध करेंगे।
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मसीही समाज के लोगों का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, उसका प्रचार-प्रसार करने और धार्मिक गतिविधियां करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। उनका दावा है कि इसी संवैधानिक अधिकार के तहत प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी और इसमें धर्मांतरण जैसी कोई गतिविधि नहीं थी। उनका यह भी कहना है कि जो लोग अपनी इच्छा से प्रार्थना सभा में शामिल होते हैं, उन्हें रोका नहीं जा सकता।
वहीं, हिंदू संगठनों का आरोप है कि मिशन स्कूल की आड़ में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया जा रहा है। इसी आरोप के चलते उन्होंने प्रार्थना सभा का विरोध किया था। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। पुलिस ने दोनों पादरियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, लेकिन आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
बैतूल में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर सामने आ रहे विवाद के बीच दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से तनाव की स्थिति बनी हुई है। मामले में पुलिस और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।