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VIDEO : Villagers said in Amar Ujala Samvad 80 percent of farmers do farming in village
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VIDEO : अमर उजाला संवाद में बोले ग्रामीण, 80 प्रतिशत किसान गांव में करते हैं खेती, फिर भी गांव को नगर निगम के अंदर कर दिया
बल्लभगढ़ के गांव सोतई में मंगलवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें गांव वासियों का कहना है कि उनके गांव में 80 प्रतिशत किसान खेती करते हैं। उसके बावजूद उनके गांव को नगर निगम के अंदर कर दिया गया है। इसको लेकर उन्होंने न्यायालय में भी अपील की हुई है जिसका फैसला अभी आना बाकी है। वहीं कुछ गांव वासियों का यह भी कहना है उनका गांव में चाहे पार्षद हो या सरपंच हो बस उनके गांव की समस्या का समाधान होना चाहिए। अब ना तो गांव उनका सरपंच के अंदर आता है, ना ही अभी तक कोई पार्षद बना है। जिसकी वजह से गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।
गांव सोतई निवासी धर्म राज, पुष्पेंद्र, छज्जुराम, सुभाष, ओम प्रकाश, सुमेर सिंह ने बताया कि उनके गांव की सबसे मुख्य समस्या आईएमटी से गांव सोतई को आने वाली मुख्य सड़क जर्जर हो चुकी है। जिसके कारण उसे सड़क पर काफी बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। रात के समय गड्ढे दिखाई नहीं देते जिसकी वजह से दोपहिया वाहन हर रोज हादसे का शिकार हो रहे हैं। इस समस्या को लेकर कई बार उपायुक्त से लेकर एसडीएम तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इस सड़क का निर्माण नहीं किया गया। जिसकी वजह से गांव आने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। यहीं नहीं रात के समय अंधेरा होने की वजह से भी गड्ढे दिखाई नहीं देते हैं। अगर इस सड़क पर स्ट्रीट लाइट को लगवा दिया जाए, तो वाहन चालक अपनी सुरक्षा खुद कर सकते हैं।
गांव में नहीं है सफाई व्यवस्था
नगर निगम की ओर से गांव की सफाई के लिए तीन कर्मचारियों को नियुक्त किया गया, लेकिन वह कर्मचारी महीने में दो से तीन बार ही आते हैं। जिसकी वजह से गांव में जगह-जगह सीवर ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बह रहा है। इसके अलावा गांव की फिरनी पर कूड़े का ढेर लगा हुआ है। जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी होती है। इस समस्या को लेकर भी उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को ही बार अवगत कराया है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
गांव में नहीं है कोई भी स्वास्थ्य केंद्र
गांव के बुजुर्ग लोगों का कहना है कि गांव में कोई भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने की वजह से उनका उपचार के लिए आईएमटी स्वास्थ्य केंद्र पर जाना पड़ता है। जो कि उनके गांव से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर है। इसके अलावा अगर कोई गंभीर बीमारी होती है। तो उनको बल्लभगढ़ सरकारी अस्पताल या बी के अस्पताल जाना पड़ता है। उनके गांव में भी एक छोटा स्वास्थ्य केंद्र खोलना चाहिए।
बंदरों से हैं परेशान
बंदरों की वजह से गांव के लोगों ने छत पर जाना बंद कर दिया है। इसके अलावा बच्चों ने घरों के बाहर भी खेलना बंद कर दिया है। क्योंकि बंदरों के झुंड एकदम से उनके ऊपर हमला कर देते हैं और वह गंभीर रूप से घायल होते हैं। गर्मी के दिनों में बाहर सोते थे, लेकिन बंदरों के कारण उन्होंने बाहर सोना बंद कर दिया। क्योंकि बंदर सोते हुए व्यक्ति पर ही हमला कर देते थे। उनके गांव में अभी तक करीब दो दर्जन से अधिक लोग बंदर के शिकार हो चुके हैं।
गांव वासियों से बातचीत
गांव में सफाई नहीं होने की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। लोगों को खुद पैसे देकर सफाई करवानी पड़ती है। - दयानंद, गांव वासी
बंदरों की वजह से गांव वासी काफी परेशान है। कई बच्चों को अपना शिकार भी बना चुके है। - धर्म राज रावत, गांववासी
मुख्य सड़क जर्जर होन की वजह से दुपहिया वाहनों को हादसा होन का डर लगा रहता है। - छज्जुराम, गांववासी
सरपंच के समय लोग कह कर काम करवा लेते थे लेकिन अब अधिकारियों को कहने के बाद भी काम नहीं हो रहे है। - सुभाष शास्त्री, गांववासी
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