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भाई के संस्कार से बहन ने किया इनकार, हाथ जोड़कर बोली- मेरे पास समय नहीं; अनाथ आश्रम वालों ने दी मुखाग्नि

Thu, 10 Sep 2026 08:08 PM IST
मयूर शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Published by: मयूर शर्मा Updated Thu, 10 Sep 2026 08:08 PM IST
सार

भाई की मौत की सूचना मिलने पर उनकी बहन पुष्पा रानी अस्पताल पहुंचीं, लेकिन भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने से इन्कार कर दिया। उन्होंने समय नहीं होने और अपनी तबीयत ठीक नहीं होने की बात कही। इसके बाद बाबा फरीद अनाथ आश्रम की कमेटी के सदस्यों ने जुगल किशोर का पिहोवा के स्वर्ग धाम में अंतिम संस्कार किया।

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In Kurukshetra, a sister refused to perform her brother's last rites, saying that I don't have time
जुगल किशोर की फाइल फोटो (दांए) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कुरुक्षेत्र के पिहोवा क्षेत्र में रिश्तों को लेकर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली के उत्तम नगर निवासी 71 वर्षीय जुगल किशोर की चार सितंबर को एलएनजेपी जिला नागरिक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। सूचना मिलने पर उनकी बहन पुष्पा रानी अस्पताल पहुंचीं, लेकिन भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने से इन्कार कर दिया। उन्होंने समय नहीं होने और अपनी तबीयत ठीक नहीं होने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद बाबा फरीद अनाथ आश्रम की कमेटी के सदस्यों ने जुगल किशोर का पिहोवा के स्वर्ग धाम में अंतिम संस्कार किया। बाद में उनकी अस्थियां सरस्वती नदी में विसर्जित की गईं। ऐसे में यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
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10 साल से सरस्वती तीर्थ के पास रह रहे थे जुगल

असल में जुगल किशोर मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर के रहने वाले थे और करीब 10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ के पास रहकर गुजर-बसर कर रहे थे। जुगल किशोर अविवाहित थे। परिवार के बारे में उनकी छोटी बहन पुष्पा रानी की जानकारी थी और वह कभी-कभार उससे मिलने दिल्ली जाते थे। 
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बाबा फरीद अनाथ आश्रम के संचालक बाबा निशान सिंह ने बताया कि करीब दो सप्ताह पहले जुगल किशोर की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद संस्था के सदस्य उन्हें पिहोवा के सरकारी अस्पताल लेकर गए और भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उन्हें एलएनजेपी अस्पताल कुरुक्षेत्र रेफर कर दिया गया।
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इस दौरान आश्रम की ओर से जुगल किशोर की बहन पुष्पा रानी का पता निकालकर उनसे संपर्क किया गया। उन्हें भाई की गंभीर हालत की जानकारी दी गई और अस्पताल आने के लिए कहा गया। चार सितंबर को इलाज के दौरान जुगल किशोर की मौत हो गई।

मौत के बाद अस्पताल पहुंची बहन

बाबा निशान सिंह का कहना है कि जुगल किशोर की मौत की सूचना मिलने के बाद पुष्पा रानी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने भाई का शव देखा। इसके बाद आश्रम कमेटी के सदस्यों ने उनसे भाई के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अपनी देखरेख में करवाने के लिए कहा। पुष्पा रानी ने उनके पास समय न होने और तबीयत का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में रुकने से मना कर दिया। इसके बाद वह अपने एक परिचित के साथ वहां से चली गईं।

''आप ही कर दो संस्कार, आपकी बहुत मेहरबानी होगी''

बाबा निशान सिंह ने बताया कि अंतिम संस्कार को लेकर हुई बातचीत में पुष्पा रानी ने कहा, ...आप ही कर दो संस्कार, आपकी बहुत मेहरबानी होगी। मेरे पास समय नहीं है। मैं रुक नहीं सकती। अगर मैं खुद ठीक होती तो रुक जाती जब उनसे अस्थियां विसर्जित करने के बारे में कहा गया तो उन्होंने इसके लिए भी असमर्थता जताई। इसके बाद आश्रम कमेटी ने ही जुगल किशोर के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली।


आश्रम कमेटी ने किया अंतिम संस्कार

बाबा निशान सिंह का कहना है कि आश्रम कमेटी के सदस्य जुगल किशोर के शव को पिहोवा लेकर आए। यहां स्वर्ग धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद आश्रम की ओर से उनकी अस्थियां सरस्वती नदी में विसर्जित की गईं। वहीं  जुगल किशोर की बहन को भाई की गंभीर हालत की जानकारी देने के लिए काफी प्रयास किए गए थे। भाई की मौत के बाद अस्पताल पहुंचने के बावजूद अंतिम संस्कार में शामिल हुए बिना चले जाने की घटना से उन्हें बेहद दुख हुआ।
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