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Simranjit Kaur, daughter of Sirasgarh, becomes an Army Lieutenant—representing the third generation; welcomed upon arrival in the village.
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तीसरी पीढ़ी में सिरसगढ़ की बेटी सिमरनजीत कौर बनीं सेना में लेफ्टिनेंट - गांव पहुंचने पर किया स्वागत
मुलाना। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनीं सिरसगढ़ गांव की बेटी सिमरनजीत कौर जब पहली बार वर्दी पहनकर अपने पैतृक गांव पहुंचीं, तो ग्रामीणों ने उनका ऐतिहासिक स्वागत किया। धर्मकांटा से लेकर पूरे गांव तक ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार स्वागत हुआ। इसके बाद उन्होंने दोसड़का स्थित बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया, जहाँ बाबा जसवीर सिंह खालसा ने उन्हें सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया।
सिमरनजीत के परिवार में देशभक्ति और सेना सेवा की एक गौरवशाली परंपरा रही है, जिसे अब तीसरी पीढ़ी के रूप में उन्होंने आगे बढ़ाया है। उनके दादा गुरदयाल सिंह 13 फील्ड रेजिमेंट में गनर रहे, पिता अरविंदर सिंह 193 मीडियम रेजिमेंट से कैप्टन पद से सेवानिवृत्त हैं, और भाई अंशदीप सिंह वर्तमान में 18 सिख रेजिमेंट में देश सेवा कर रहे हैं। उनकी माता सुखविंदर कौर पूर्व शिक्षिका रही हैं। पिता को वर्दी में देखकर ही सिमरनजीत के मन में सेना में जाने का जज्बा जागा था।
कंप्यूटर शिक्षा में उच्च योग्यता हासिल करने वाली सिमरनजीत ने अपनी स्कूली शिक्षा बराड़ा के एंजल पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से बीसीए और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमसीए की डिग्री प्राप्त की। उच्च तकनीकी शिक्षा के बाद उन्होंने सीडीएस परीक्षा पास की और कड़ा प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया।
युवाओं और विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए लेफ्टिनेंट सिमरनजीत कौर ने कहा कि जीवन में हमेशा लक्ष्य ऊंचा रखना चाहिए। यदि व्यक्ति बिना थके, पूरी लगन और अनुशासन के साथ लगातार मेहनत करे, तो प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता और सफलता अवश्य मिलती है।
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