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Ramesh Baba set out on the *Brahmachal Parikrama*, and it was to that very *gaushala* (cow shelter) that his final procession returned.
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VIDEO: ब्रह्मचल की परिक्रमा करते निकले रमेश बाबा, उसी गौशाला में पहुंचा अंतिम डोला
बरसाना।जिस ब्रज की धूल को रमेश बाबा ने जीवनभर माथे से लगाया, उसी ब्रज की परिक्रमा करते हुए उनकी अंतिम यात्रा पूरी हुई। रस मंडप गहवर वन से अंतिम दर्शन के बाद बाबा का सजा हुआ डोला निकला तो राधे-राधे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। ब्रह्मचल पर्वत की परिक्रमा के दौरान मार्ग में खड़े ब्रजवासियों और अनुयायियों ने बाबा के डोले पर पुष्प अर्पित किए। संत को अंतिम विदाई देते समय कई ब्रजवासियों की आंखें छलक पड़ीं। परिक्रमा पूरी होने के बाद डोला माताजी गौशाला पहुंचा, जहां पवित्र गोष्ठ में अंतिम संस्कार की विधियां शुरू हुईं।
डोला उठा तो छलक पड़ीं ब्रजवासियों की आंखें
बाबा के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रस मंडप से डोला उठने का क्षण हर किसी को भावुक कर गया। जैसे ही डोला ब्रह्मचल की परिक्रमा के लिए आगे बढ़ा, मार्ग में खड़े ब्रजवासियों ने पुष्प अर्पित कर अपने संत को अंतिम प्रणाम किया। किसी के हाथ प्रार्थना में जुड़े थे तो किसी की आंखों से आंसू छलक पड़े। डोले के साथ चल रहे श्रद्धालुओं के मुख से लगातार राधे-राधे के जयकारे गूंजते रहे।
जिस ब्रज की परिक्रमा जीवनभर की, उसी में निकली अंतिम यात्रा
ब्रह्मचल पर्वत की परिक्रमा करते हुए बाबा का डोला आगे बढ़ा तो उनकी पूरी साधना जैसे इस अंतिम यात्रा में सिमट आई। जीवनभर ब्रज सेवा और राधारानी की भक्ति में लीन रहे बाबा की अंतिम यात्रा भी उसी ब्रज की परिक्रमा करते हुए पूरी हुई।
परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह लोग बाबा के अंतिम दर्शन के लिए खड़े रहे। श्रद्धालुओं ने डोले पर पुष्प अर्पित किए और हाथ जोड़कर अंतिम प्रणाम किया। डोला आगे बढ़ता रहा और उसके पीछे श्रद्धालुओं का कारवां चलता रहा।
जिस गौशाला को खड़ा किया, वहीं पहुंचा अंतिम डोला
ब्रह्मचल की परिक्रमा पूरी करने के बाद बाबा का डोला माताजी गौशाला पहुंचा। यही वह धाम है, जिसे रमेश बाबा ने गोसेवा को समर्पित अपना जीवन लगाकर खड़ा किया और गोसेवा का इतिहास रचा। पवित्र गोष्ठ में संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की विधियां शुरू हुईं।
जिस भूमि को रमेश बाबा ने सेवा, साधना और गोवंश संरक्षण का केंद्र बनाया, उसी पवित्र भूमि पर उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए ब्रजवासी और अनुयायी जुटे रहे।
संतों के साथ मंत्री, डीएम-एसएसपी ने भी दी श्रद्धांजलि
रमेश बाबा की अंतिम यात्रा में ब्रज के अनेक संत भी शरीक हुए। संतों और श्रद्धालुओं ने बाबा को अंतिम प्रणाम कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण भी माताजी गौशाला पहुंचे और बाबा को श्रद्धांजलि दी। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने भी बाबा के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
रमेश बाबा की अंतिम यात्रा उसी ब्रज की धरती पर पहुंची, जिसे उन्होंने अपना जीवन, साधना और गोसेवा समर्पित कर दिया था। उनके जाने से ब्रज ने केवल एक संत नहीं, बल्कि गोसेवा और ब्रज साधना की एक विराट परंपरा को विदाई दी।
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