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यूजीसी बिल के विरोध में सड़क पर उतरा सवर्ण समाज के लोग, VIDEO
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से जारी (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टी्यूसंस रेगुलेशंन 2026 के विरोध में बुधवार को सवर्ण समाज के लोग सड़क पर उतरे। विभिन्न सगठनों ने जिला मुख्यालय पर जुलूस निकाला और धरना प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से इस बिल को वापस लेने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा के बैनरतले समाज के लोगों ने बुधवार को जिला मुख्यालय पर बाइक जुलूस निकाला। जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए नगर भ्रमण करते हुए डीएम कार्यालय पर पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इस दौरान क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि 15 जनवरी को भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर नए बिल को लागू किया गया है। यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाई गई बताई जा रही है और इसमें एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। इसके अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है, जिन्हें शिकायतों की जांच का अधिकार दिया गया है। यह अधिसूचना भारत के संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार (अनुच्छेद 14, 15 एवं 21) की भावना के अनुरूप नहीं है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, किंतु यह अधिसूचना समानता की समग्र अवधारणा को स्थापित करने के स्थान पर केवल एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है। सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण को पूरी तरह नज़रअंदाज करती है। अखिल भारतीय सवर्ण युवा मोर्चा के अध्यक्ष अखिलेश सिंह शांडिल्य ने कहा कि यह कानून सवर्ण समाज के विरूद्ध है। कहा कि यदि हमारी मांग पूरी नहीं होती है तो पूरे भारत को बंद किया जाएगा।
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