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अर्नब तूफान : 24 घंटे में 23 मिमी बरसा पानी, 30 से 40 किमी की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं
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कंदवा क्षेत्र में पानी में लेटी धान की फसल। संवाद
पीडीडीयू नगर। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान अर्नब का असर जिले में दूसरे दिन शुक्रवार भी बना रहा। चौबीस घंटे में जिले में 23 मिमी बारिश हुई। दिन भर 30 से 40 किमी की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं। इससे खेतों में पानी भर जाने से धान की तैयार फसल लोट गई है। खेतों में पानी भर जाने से फसलों के सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। जिस फसल में अभी बालियां निकलनी शुरू हुई हैं, वे फसलें नुकसान से बच सकती हैंं। किसानों के अनुसार जिले में 35 प्रतिशत तक धान की फसल का नुकसान हुआ है। हालांकि प्रशासन अभी क्षति का आकलन कर रहा है।
जिले में 1.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की जाती है। इस वर्ष लगभग 1,05,000 हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई है। जिले में धान की उत्पादकता लगभग 48.87 क्विंटल से लेकर 75-80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। जिन्होंने पहले धान की फसल रोपी थी, उनकी फसल लगभग तैयार है। जिले में दो नवंबर से धान की फसल की खरीदारी की भी तैयारी है। किसान धान की कटाई की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच अर्नब तूफान फसलों पर कहर बनकर बरपा है। शुक्रवार को सुबह से रात तक रुक-रुककर बारिश होती रही। तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में पक कर तैयार धान की फसल गिरकर बिछ गई। कई स्थानों पर कटी हुई फसल पानी में डूब गई है। खेतों में जलभराव से फसल के सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं, कुछ गांवों में कच्चे मकान और झोपड़ियां ढहने से परिवारों के सामने रहने का संकट पैदा हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बृहस्पतिवार से शुक्रवार तक 24 घंटे में 23 मिमी बारिश हुई है। जिले के चहनिया, चकिया, टांडाकला और नियामताबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। चहनिया क्षेत्र में किसानों ने 30 से 40 प्रतिशत तक पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई है। वहीं, टांडाकला क्षेत्र में धान के साथ बाजरा की फसल भी खेतों में गिर गई है। राज्य कृषि व मौसम विभाग के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि आगामी दो नवंबर तक जिले के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। तीन नवंबर से मौसम सामान्य होने के आसार हैं।
उधर, डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने शुक्रवार को खुरुहूजा, सुंदरवन और पड़या गांव पहुंचकर तूफान और बारिश से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से जानकारी लेकर उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों और लेखपालों को प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर क्षति का आकलन करने के लिए निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि किसी भी पात्र प्रभावित का नाम सर्वे से छूटना नहीं चाहिए। नुकसान का आकलन पूरा होते ही नियमानुसार मुआवजा देने की व्यवस्था की जाएगी।
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जिले में 1.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की जाती है। इस वर्ष लगभग 1,05,000 हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई है। जिले में धान की उत्पादकता लगभग 48.87 क्विंटल से लेकर 75-80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। जिन्होंने पहले धान की फसल रोपी थी, उनकी फसल लगभग तैयार है। जिले में दो नवंबर से धान की फसल की खरीदारी की भी तैयारी है। किसान धान की कटाई की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच अर्नब तूफान फसलों पर कहर बनकर बरपा है। शुक्रवार को सुबह से रात तक रुक-रुककर बारिश होती रही। तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में पक कर तैयार धान की फसल गिरकर बिछ गई। कई स्थानों पर कटी हुई फसल पानी में डूब गई है। खेतों में जलभराव से फसल के सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं, कुछ गांवों में कच्चे मकान और झोपड़ियां ढहने से परिवारों के सामने रहने का संकट पैदा हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बृहस्पतिवार से शुक्रवार तक 24 घंटे में 23 मिमी बारिश हुई है। जिले के चहनिया, चकिया, टांडाकला और नियामताबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। चहनिया क्षेत्र में किसानों ने 30 से 40 प्रतिशत तक पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई है। वहीं, टांडाकला क्षेत्र में धान के साथ बाजरा की फसल भी खेतों में गिर गई है। राज्य कृषि व मौसम विभाग के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि आगामी दो नवंबर तक जिले के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। तीन नवंबर से मौसम सामान्य होने के आसार हैं।
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उधर, डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने शुक्रवार को खुरुहूजा, सुंदरवन और पड़या गांव पहुंचकर तूफान और बारिश से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से जानकारी लेकर उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों और लेखपालों को प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर क्षति का आकलन करने के लिए निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि किसी भी पात्र प्रभावित का नाम सर्वे से छूटना नहीं चाहिए। नुकसान का आकलन पूरा होते ही नियमानुसार मुआवजा देने की व्यवस्था की जाएगी।
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