हाड़ौती में इस सीजन में हुई जोरदार बारिश और बाढ़ का असर अब फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है। खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। संभाग के कई जिलों में अभी भी तीन से चार फीट तक पानी जमा हुआ है। जिले के इटावा और खतौली में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं, जहां खेतों में भरा पानी निकल ही नहीं पा रहा है। धान, मक्का, मूंग, सोयाबीन और उड़द जैसी फसलों में कीड़े लग गए हैं, जिससे फसलें नष्ट हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन और मक्का की फसलों को हुआ है।
फसलों के बड़े पैमाने पर खराब होने के बाद भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि इस बार मुआवजा केवल सवा 6 बीघा का न देकर पूरी फसल का मिलना चाहिए। इसमें बीज से लेकर कटाई तक का खर्च शामिल होना चाहिए। भारतीय किसान संघ के प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने बताया कि सोयाबीन का बीज 5 से 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल आता है। बीज, दवा और छिड़काव का खर्च मिलाकर करीब 8 हजार रुपये प्रति बीघा होता है। इसके अलावा जुताई, मजदूरी और अन्य खर्च जोड़कर कुल लागत 20 हजार रुपये प्रति बीघा पहुंच जाती है।
ये भी पढ़ें: Dausa News: लगातार बारिश से फसल चौपट, कर्ज के बोझ से टूटा हौसला, किसान ने फांसी लगाकर की आत्महत्या
किसान नेताओं का कहना है कि अतिवृष्टि की मार झेलने के बावजूद किसानों के हाथ कुछ नहीं बचता। वर्तमान में सरकार मुआवजा राशि के रूप में सवा 6 बीघा सिंचित क्षेत्र पर केवल 17 हजार रुपये देती है। ऐसे में इस बार मांग की जा रही है कि मुआवजा राशि को दोगुना किया जाए और 2 हैक्टेयर की सीमा के बजाय पूरे नुकसान की भरपाई की जाए।