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यूपी में 'लंपी' की दस्तक: खतरनाक वायरस की चपेट में आए गोवंश, बचाने के पशुपालक जरूर करें ये काम

Sat, 19 Sep 2026 12:06 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 19 Sep 2026 12:06 PM IST
सार

आगरा में गोवंशीय मवेशियों में लंपी त्वचा रोग के मामले बढ़ने से चिंता बढ़ी है। संक्रमित मवेशी के संपर्क और रक्त चूसने वाले कीटों से दूसरे पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। विशेषज्ञों ने संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग रखने और स्वस्थ मवेशियों का टीकाकरण कराने की सलाह दी है।
 

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Lumpy Skin Disease Raises Concern, Experts Advise Vaccination and Isolation
लंपी से पीड़ित गोवंश का टीकाकरण करती पशुपालन विभाग की टीम। स्रोत : विभाग - फोटो : Department

विस्तार

 आगरा में गोवंशीय मवेशियों में लंपी त्वचा रोग के मामले बढ़ रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के पशुपालन विशेषज्ञ धर्वेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि लंपी स्किन डिजीज वायरस से होने वाला यह विषाणुजनित रोग मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी, चिंचड़ और जूं जैसे रक्त चूसने वाले कीटों तथा संक्रमित पशुओं के संपर्क से फैलता है। सीमेन, प्लेसेंटा और दूषित पानी-आहार से भी संक्रमण की आशंका रहती है।
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उन्होंने बताया कि रोग के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, आंख-नाक से पानी आना तथा सिर, गर्दन और जननांगों के आसपास कठोर गांठें और सूजन शामिल हैं। गंभीर स्थिति में गांठों में घाव, कमजोरी, वजन व दूध उत्पादन में कमी, लंगड़ापन, सांस लेने में परेशानी और निमोनिया हो सकता है। चौहान ने संक्रमित मवेशियों को स्वस्थ मवेशियों से तत्काल अलग रखने की सलाह दी है। बीमार मवेशी के चारा-पानी की अलग व्यवस्था करने के साथ उसका अनावश्यक आवागमन रोकना चाहिए। पशुशाला को साफ और सूखा रखने, नियमित विसंक्रमण तथा मच्छर-मक्खी और चिंचड़ नियंत्रण करना चाहिए। इसके अलावा, नए मवेशियों को कुछ समय अलग रखकर निगरानी में रखने की सलाह दी गई है।

 
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नीम-तुलसी के साथ ग्वारपाठा और हल्दी से तैयार होगा जेल
धर्वेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि त्वचा के घावों की सहायक देखभाल के लिए नीम, तुलसी, ग्वारपाठा और हल्दी से जेल तैयार किया जा सकता है। एक लीटर पानी में 400-500 ग्राम नीम और 50-100 ग्राम तुलसी उबालकर पानी आधा होने तक पकाएं। ठंडा कर छानने के बाद इसमें 300-400 ग्राम ग्वारपाठे का गूदा और पांच चम्मच हल्दी मिलाएं। घाव साफ करने के बाद इसे सुबह-शाम बाहरी रूप से लगाया जा सकता है। यह केवल सहायक देखभाल है। गंभीर स्थिति में पशु चिकित्सक से उपचार कराना जरूरी है।

 
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खुले में ना करें मृत पशुओं का निस्तारण
मृत पशु का खुले में न करें निस्तारण पशुपालन विशेषज्ञ बताते हैं कि लंपी से मृत मवेशी का शव खुले में नहीं फेंकना चाहिए। प्रशासन और पशुपालन विभाग के सहयोग से करीब 1.5 मीटर गहरे गड्ढे में चूना व नमक डालकर शव का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए। पशुशाला, वाहन और संक्रमित सामग्री को भी उचित विसंक्रमक से साफ करना चाहिए।

 

चार माह से अधिक उम्र के स्वस्थ पशुओं का कराएं टीकाकरण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके पांडेय ने बताया कि चार माह से अधिक उम्र के स्वस्थ गोवंशीय मवेशियों का पशुपालन विभाग की सलाह के अनुसार टीकाकरण कराया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार रिंग वैक्सीनेशन भी कराया जा सकता है। टीकाकरण के बाद प्रतिरक्षा विकसित होने में करीब 14 से 21 दिन लग सकते हैं। लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से तत्काल संपर्क कर उपचार कराएं।
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