मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के विरुद्ध साइक्लोनर टीम की कार्रवाई एक बार फिर जोधपुर रेंज में चर्चा का विषय बनी है। पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार के निर्देशन में चलाई गई तीन अलग-अलग कार्रवाइयों में देशभर से 1,20,000 के इनामी पांच दुर्दांत और वांछित अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इन अभियानों को ऑपरेशन सगरवंशी, ऑपरेशन शकीरा और ऑपरेशन दंश नाम दिया गया था।
ऑपरेशन सगरवंशी: गोवा के तटीय इलाके से दबोचा गया 50 हजार का इनामी भागीरथ
बता दें कि बाड़मेर जिले के गुड़ामालाणी थाना क्षेत्र का निवासी भागीरथराम पुत्र गोर्धनराम, जो वर्षों से फरार चल रहा था, को साइक्लोनर टीम ने गोवा से गिरफ्तार किया। भागीरथ पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार, हत्या के प्रयास, वाहन चोरी व धोखाधड़ी सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये आरोपी सात साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंकता फिर रहा था। इसने तीन राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में वांछित भागीरथराम की तलाश राजस्थान पुलिस के साथ-साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी कर रही थी। छह जिलों बाड़मेर, बालोतरा, अजमेर, फलोदी, जोधपुर और जालौर में उसके खिलाफ केस दर्ज हैं।
नशे के धंधे से गोवा तक पहुंचा
भागीरथ ने मादक पदार्थों से कमाए पैसे गोवा में शराब के कारोबार में लगाए और तीन दुकानों की खरीद के साथ पूरे परिवार को वहीं बसा लिया। लेकिन उसका नेटवर्क सक्रिय रहा। वह हर दो-तीन महीने में गुड़ामालाणी आकर अपने पुराने धंधे को मैनेज करता रहा। भागीरथ के अनुसार, उसने पहले मेहनत-मजदूरी की, मुंबई और सूरत में रोजगार किया, लेकिन पत्नी और ससुरालवालों की अपेक्षाओं और तानों के चलते वह नशे के कारोबार में उतर गया। उसका बहनोई और साला इस धंधे में पहले से सक्रिय थे, जिन्होंने उसे तस्करी के गुर सिखाए।
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हीरे घिसने वाला बना समाज का ‘घुन’
सूरत में छह साल तक हीरे तराशने वाला भागीरथ, नशे के धंधे में उतरकर समाज के ‘हीरों’ को नशे के दलदल में धकेलता रहा। भागीरथ अब तक का पहला ऐसा किंगपिन निकला, जिसने तीन राज्यों मध्यप्रदेश, झारखंड और मणिपुर में अपने धंधे का जाल फैलाया था। मणिपुर से अफीम की खेप ट्रकों में कैविटी बनाकर राजस्थान लाता था। बताया जा रहा है कि गोवा में एक नई शराब दुकान के सौदे के लिए भागीरथ के आने की सूचना मुखबिर ने दी। SGPDA मार्केट, मर्मुगाओ में दस्तावेज तैयार कराते वक्त उसे धर दबोचा गया।
सहयोगी दिनेश भी गिरफ्तार
भागीरथ की निशानदेही पर धोरीमन्ना निवासी दिनेश पुत्र मांगाराम को भी गिरफ्तार किया गया, जिस पर 10,000 का इनाम घोषित था। दिनेश एक बीएड कॉलेज चलाता था और अपराधियों को शरण, संसाधन और सतर्कता देता था। वह साइक्लोनर टीम की हर हलचल पर नजर रखता था। उस पर पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं।
ऑपरेशन शकीरा: जोधपुर ग्रामीण का बड़ा सौदागर पकड़ा गया
इसी समय, साइक्लोनर टीम ने जोधपुर ग्रामीण के बिलाड़ा क्षेत्र के राकेश मतवाला पुत्र ओमप्रकाश को भी गिरफ्तार किया। उस पर मादक पदार्थ तस्करी, हथियार कानून और वाहन चोरी के कई प्रकरण दर्ज थे और ₹20,000 का इनाम घोषित था। संगीत प्रेमी राकेश मतवाला का ऑपरेशन उसके नाम के अक्षरों से प्रेरित होकर शकीरा नाम दिया गया, क्योंकि वह लोगों को नशे में 'झूमने' पर मजबूर कर देता था। बताया जा रहा है कि कापरड़ा के खेजड़ली क्षेत्र में अपने खेत में बनी कोठी को सुरक्षित ठिकाना बना रखा था। साइक्लोनर टीम ने मोटरसाइकिलों पर पहुंचकर अचानक घेराबंदी की और उसे टेबल के नीचे छिपे हुए दबोच लिया।
चोर-चोर मौसेरे भाई: सुनील उर्फ रोबिन भी गिरफ्तार
राकेश की गिरफ्तारी के बाद पकड़ा गया सुनील विश्नोई, जो खुद भी 10,000 का इनामी बदमाश निकला। वह सांचौर के लक्ष्मण देवासी हत्याकांड में वांछित था। उसने नाम बदलकर रोबिन रख लिया था और दिनेश सारण की बहन को ‘धर्म बहन’ बनाकर उसके फार्महाउस पर फरारी काट रहा था। सुनील और राकेश एक-दूसरे को अपनी असली पहचान छिपाकर दोस्त बने हुए थे।
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ऑपरेशन दंश: बालोतरा से दबोचा गया 30 हजार का इनामी दिनेश
तीसरे मोर्चे पर, साइक्लोनर टीम ने बालोतरा निवासी दिनेश पुत्र बाबूलाल को भी धर दबोचा। वह पिछले 16 साल से नशे के धंधे में सक्रिय था लेकिन अब तक खुद को मासूम साबित करने में सफल रहा। बीबीए पास दिनेश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था लेकिन गलत संगत के चलते अपराध की राह पर चल पड़ा। दिनेश एक रिटायर्ड थानेदार का दामाद है और पुलिस को लंबे समय तक गुमराह करता रहा। गिरफ्तारी के वक्त वह घर के एक बंद कमरे में छिपा मिला। उसके खिलाफ दर्ज केसों में हत्या का प्रयास, मारपीट, आर्म्स एक्ट और परीक्षा घोटाले जैसे संगीन मामले शामिल हैं।
पुलिस महानिरीक्षक का बयान
आईजी विकास कुमार ने बताया कि साइक्लोनर टीम की ये तीनों कार्रवाइयां मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध सशक्त संदेश हैं। पुलिस अब केवल अपराधियों के पीछे नहीं भाग रही, बल्कि उनकी जड़ें उखाड़ने में लगी है।