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Despite the orders of Akal Takht, the SAD executive did not accept the resignations of all the leaders
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Amritsar News: अकाल तख्त के आदेशों के बावजूद शिअद कार्यकारिणी ने नहीं स्वीकार किए सभी नेताओं के त्यागपत्र
-सिर्फ सुखबीर सिंह बादल का त्यागपत्र स्वीकार कर अकाल तख्त के आदेशों को अपने अनुसार मान रहे नेता --- पंकज शर्मा अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से दो दिसंबर को जारी हुए आदेशों के बावजूद अकाली दल बादल की कार्यकारिणी ने सभी अकाली नेताओं के त्यागपत्र स्वीकार नहीं किए हैं। सिर्फ अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का ही त्यागपत्र स्वीकार करके अकाली दल के नेताओं को यह बताने की कोशिश की है कि वह अपने अनुसार ही अकाल तख्त साहिब के आदेशों को मानेंगे। अकाली दल बादल कार्यसमिति की ओर से अपने अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का इस्तीफा स्वीकार करने के कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि अकाली नेतृत्व श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को लागू करना तो दूर, उक्त आदेश का पालन करना भी नहीं चाहता। अकाली दल बादल की कार्यकारिणी ने जो फैसले लिए, वे न केवल श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से 2 दिसंबर को दिए गए आदेशों के विपरीत हैं, बल्कि मूल भावनाओं के भी खिलाफ हैं। श्री अकाल तख्त साहिब ने आदेश दिया था कि जिन लोगों ने भी अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल समेत इस्तीफा दिया है, उनका इस्तीफा तीन दिन के अंदर स्वीकार कर लिया जाए और इसकी जानकारी श्री अकाल तख्त साहिब को भेजी जाए, लेकिन शुक्रवार को सिर्फ अध्यक्ष सुखबीर बादल का इस्तीफा ही मंजूर किया गया। अन्य किसी और का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। अकाल तख्त साहिब से स्पष्ट आदेश था कि इन अपराधों के कारण शिरोमणि अकाली दल का नेतृत्व सिख पंथ का राजनीतिक नेतृत्व करने का नैतिक अधिकार खो चुका है। इस मामले में अकाली दल की नई भर्ती के लिए 7 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। आज के फैसलों में श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित 7 सदस्यीय कमेटी को भी तरह नजरअंदाज कर गया। अपनी मर्जी से चहेतों को कार्यभार सौंप दिया गया। अकाल तख्त साहिब के आदेशों पर न तो सात सदस्यों वाली कमेटी की कोई बैठक आयोजित करने संबंधी विचार हुआ और न ही पार्टी के पुनर्गठन संबंधी किसी भी तरह की मेंबरशिप शुरू करने का फैसला लिया गया। यहां तक के माघी के मेले दौरान आयोजित की जाने वाली रैली में किसी अन्य अकाली दल के नेता को न तो बुलाया गया है और नहीं अकाली दलों की एकता के लिए कोई कोशिश करने का फैसला लिया गया है। यहां तक के अकाली दल सुधार लहर के बागी अकाली नेताओं को भी बातचीत करने के लिए कोई फैसला हुआ और न ही उनको माघी रैली में बुलाया गया। सूत्रों से पता चला है कि माघी रैली में ही अकाली दल बादल ग्रुप कुछ प्रस्ताव पारित करके अपने आप को समरथ व शक्ति शाली पेश करने जा रहा है।
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