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यमन में फिर भड़का गृहयुद्ध: हूतियों ने सऊदी के साथ आने वाले देशों को दी चेतावनी, क्या-क्या कहा?
Sun, 20 Sep 2026 11:42 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, काहिरा।
पीटीआई, काहिरा।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:42 PM IST
सार
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने सऊदी अरब का साथ देने वाले देशों को कई मोर्चों पर युद्ध की चेतावनी दी है और कहा है कि अमेरिका को निशाना नहीं बनाया जाएगा। हालिया घटनाक्रम ने 2022 के संघर्षविराम के बाद यमन में फिर बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ा दिया है।
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हूती विद्रोहियों की पाकिस्तान और तुर्किये को सीधी चेतावनी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन में फिर बढ़ रहे संघर्ष के बीच सऊदी अरब का साथ देने वाले देशों को चेतावनी दी है। हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में कहा कि अगर कोई देश यमन के खिलाफ सऊदी अरब के साथ सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है तो हूती कई मोर्चों पर युद्ध लड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, 'आज यमन केवल आंतरिक संघर्ष नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध लड़ने में भी सक्षम है।' दावा किया जा रहा है हूतियों ने सीधे-सीधे पाकिस्तान और तुर्किये को चेतावनी दी है। पिछले दिनों सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का समझौता हुआ था।
अमेरिका और हूतियों के बीच क्या बातचीत हुई?
अल-बुखैती ने बताया कि यमन के पश्चिमी तट की ओर हूतियों की तेज बढ़त के बाद अमेरिका ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों से सीधे संपर्क नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान के जरिये बातचीत हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि उनके प्रशासन की हूतियों से बातचीत हुई है।
बाब अल-मंदेब को लेकर हूतियों का क्या कहना है?
अल-बुखैती ने कहा कि हूतियों के सैन्य अभियान का मकसद बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं है। उनका कहना है कि उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से सभी के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। बाब अल-मंदेब से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार का आवागमन होता है। हूतियों के हालिया अभियान में महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कुछ अहम द्वीप उनके नियंत्रण में आए हैं, जिससे उन्हें समुद्री यातायात पर नजर रखने में रणनीतिक बढ़त मिली है।
सऊदी अरब से हूती आखिर क्या चाहते हैं?
अल-बुखैती के मुताबिक, सऊदी अरब जब तक यमन के हूती-नियंत्रित इलाकों की करीब एक दशक पुरानी नाकेबंदी खत्म नहीं करता और लाल सागर के हूती नियंत्रण वाले बंदरगाहों तक जहाजों की पहुंच नहीं देता, तब तक सऊदी अरब पर हूती हमले जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद हूती बातचीत के लिए तैयार होंगे।
यमन में फिर क्यों लौटा गृहयुद्ध?
हूतियों की हालिया बढ़त ने 2022 के उस संघर्षविराम को खत्म कर दिया, जिसने बड़े स्तर पर यमन के गृहयुद्ध को रोक दिया था। यह युद्ध तब शुरू हुआ था जब हूती अपने पहाड़ी गढ़ से आगे बढ़े और उत्तरी व मध्य यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर सना समेत कई इलाकों को अपने नियंत्रण में ले आए। इसके अगले साल सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में युद्ध में हस्तक्षेप किया था।
युद्ध में संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक कम से कम 1.5 लाख लोगों की मौत हुई और यमन अकाल के कगार तक पहुंच गया। अब हूतियों के पश्चिमी तट पर नियंत्रण के बाद अल-बुखैती का दावा है कि शक्ति संतुलन सना में मौजूद हूती प्रशासन के पक्ष में बदल गया है। उनके मुताबिक सऊदी अरब ने अपना सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक कार्ड यानी यमन का पश्चिमी तट खो दिया है।
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- हूती नेताओं के मुताबिक, किसी दूसरे देश के सऊदी के साथ युद्ध में शामिल होने पर संघर्ष का दायरा यमन की सीमाओं से बाहर जा सकता है।
- अल-बुखैती ने दावा किया कि हूतियों के पास एक साथ कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता मौजूद है।
अमेरिका और हूतियों के बीच क्या बातचीत हुई?
अल-बुखैती ने बताया कि यमन के पश्चिमी तट की ओर हूतियों की तेज बढ़त के बाद अमेरिका ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों से सीधे संपर्क नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान के जरिये बातचीत हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि उनके प्रशासन की हूतियों से बातचीत हुई है।
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- एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान ने पिछले सप्ताहांत अमेरिका और हूती प्रतिनिधियों के बीच बैठक की मेजबानी की थी। हालांकि अल-बुखैती ने केवल ओमान के माध्यम से अप्रत्यक्ष संपर्क की पुष्टि की।
- हूतियों ने ट्रंप प्रशासन को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी जहाजों या किसी दूसरे देश के जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे, हालांकि सऊदी अरब को उन्होंने इससे अलग रखा है।
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बाब अल-मंदेब को लेकर हूतियों का क्या कहना है?
अल-बुखैती ने कहा कि हूतियों के सैन्य अभियान का मकसद बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं है। उनका कहना है कि उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से सभी के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। बाब अल-मंदेब से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 12 प्रतिशत व्यापार का आवागमन होता है। हूतियों के हालिया अभियान में महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कुछ अहम द्वीप उनके नियंत्रण में आए हैं, जिससे उन्हें समुद्री यातायात पर नजर रखने में रणनीतिक बढ़त मिली है।
सऊदी अरब से हूती आखिर क्या चाहते हैं?
अल-बुखैती के मुताबिक, सऊदी अरब जब तक यमन के हूती-नियंत्रित इलाकों की करीब एक दशक पुरानी नाकेबंदी खत्म नहीं करता और लाल सागर के हूती नियंत्रण वाले बंदरगाहों तक जहाजों की पहुंच नहीं देता, तब तक सऊदी अरब पर हूती हमले जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद हूती बातचीत के लिए तैयार होंगे।
यमन में फिर क्यों लौटा गृहयुद्ध?
हूतियों की हालिया बढ़त ने 2022 के उस संघर्षविराम को खत्म कर दिया, जिसने बड़े स्तर पर यमन के गृहयुद्ध को रोक दिया था। यह युद्ध तब शुरू हुआ था जब हूती अपने पहाड़ी गढ़ से आगे बढ़े और उत्तरी व मध्य यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर सना समेत कई इलाकों को अपने नियंत्रण में ले आए। इसके अगले साल सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में युद्ध में हस्तक्षेप किया था।
युद्ध में संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक कम से कम 1.5 लाख लोगों की मौत हुई और यमन अकाल के कगार तक पहुंच गया। अब हूतियों के पश्चिमी तट पर नियंत्रण के बाद अल-बुखैती का दावा है कि शक्ति संतुलन सना में मौजूद हूती प्रशासन के पक्ष में बदल गया है। उनके मुताबिक सऊदी अरब ने अपना सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक कार्ड यानी यमन का पश्चिमी तट खो दिया है।