आदिवासी महिलाओं के सम्मान और अधिकारियों के आचरण को लेकर उमरिया में नया विवाद सामने आया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के घेराव के दौरान एक आदिवासी महिला से कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा में बातचीत किए जाने के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। मामले में समाजसेवी अजय दुबे ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो उमरिया पुलिस अधीक्षक को बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होंने कथित व्यवहार को शर्मनाक बताते हुए कार्रवाई की मांग उठाई है।
मामला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास कोयला खदान के मुद्दे पर हुई चर्चा से जुड़ा बताया जा रहा है। अपनी मांगों को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल में आदिवासी महिलाएं भी शामिल थीं। आरोप है कि पुलिस अधीक्षक से मुलाकात के दौरान एक आदिवासी महिला के साथ बातचीत में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। घटना के बाद संबंधित महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए कथित व्यवहार की निंदा की थी। हालांकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
ये भी पढ़ें: चार महीने से नहीं मिला मानदेय: हजारों महिलाओं का प्रदर्शन,शिवराज के बंगले के सामने घंटों डटी रहीं रसोइया बहनें
एसपी को हटाने की मांग
समाजसेवी अजय दुबे ने अपने ट्विटर हैंडल और फेसबुक पर पोस्ट साझा कर मामले की जांच की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा है कि मामले की जांच हो। यदि यह सच है तो उमरिया एसपी को बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होंने अपनी पोस्ट में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के करीब कोयला खदान के मुद्दे पर स्थानीय आदिवासी महिला से कथित आपत्तिजनक चर्चा का उल्लेख किया।
उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और आरोप सही पाए जाने पर एसपी को पद से हटाने के साथ निलंबित करने जैसी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचित किया गया है। वहीं मामले में शहडोल रेंज के डीआईजी विवेक सिंह ने कहा कि आप हमें वीडियो भेजिए हम दिखवाते हैं।