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एक्सप्लेनर: क्या अयोध्या में होगा योगी बनाम अखिलेश, कैसे-क्यों शुरू हुई चर्चा; इस विधानसभा सीट का इतिहास क्या?

Sat, 10 Oct 2026 06:12 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 10 Oct 2026 06:12 PM IST
सार

जिस अयोध्या विधानसभा सीट को लेकर अब योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश को चुनौती दी है, उस पर दो शीर्ष नेताओं के टकराव का हालिया दौर कब शुरू हुआ? अयोध्या विधानसभा सीट का सियासी इतिहास क्या रहा है? भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) का इस सीट पर क्या मुकाबला रहा है? 

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Yogi Adityanath vs Akhilesh Yadav from Ayodhya Challenge UP Assembly Election 2027 know history Assembly Seat
अयोध्या में महामुकाबले की आहट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में ही होने हैं। इससे पहले राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आज (शनिवार) यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलरामपुर में एक रैली के दौरान अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि लड़ाई चेलों से नहीं, बल्कि आमने-सामने से होनी चाहिए। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिस अयोध्या विधानसभा सीट को लेकर अब योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश को चुनौती दी है, उस पर दो शीर्ष नेताओं के टकराव का हालिया दौर कब शुरू हुआ? अयोध्या विधानसभा सीट का सियासी इतिहास क्या रहा है? भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) का इस सीट पर क्या मुकाबला रहा है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- कब से शुरू हुई योगी बनाम अखिलेश के मुकाबले की बात? 

क्या बोले थे अखिलेश यादव?
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को अयोध्या में एक रैली की थी। इसमें अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे दी थी। उन्होंने कहा था, "भाजपा लगातार सर्वे करा रही है, लेकिन हर सर्वे में पीछे छूट रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को अयोध्या में कोई प्रत्याशी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री अगर इतने ही आश्वस्त हैं तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं।"

इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने यही बात दोहराई थी। उन्होंने कहा था, "यह हमारी योगी को राजनीतिक सलाह थी कि जिन्होंने यह कहा हो कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। तो उन्हें यही फैसला लेना चाहिए और अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहिए। अयोध्या ऐसा शहर बनकर उभरता जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाता। लेकिन अयोध्यावासियों के साथ जो अन्याय हुआ है, जो भेदभाव हुआ है, वह साथ भेदभाव का व्यवहार नहीं होना चाहिए। उनके मकान छीने गए, जमीन छीनी गईं, लेकिन बाजारी भाव नहीं दिया गया उन्हें। इसलिए मैंने उन्हें कहा कि अगर वे इतने आश्वस्त हैं तो उन्हें अयोध्या से चुनाव लड़ना चाहिए। यह चुनौती नहीं है, यह सलाह है।"

ये भी पढ़ें: यूपी सियासत: योगी की चुनौती पर अखिलेश का पलटवार, बोले- लोकसभा भूल गए क्या, इस बार जनता घमंड का पानी उतार देगी
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Yogi Adityanath vs Akhilesh Yadav from Ayodhya Challenge UP Assembly Election 2027 know history Assembly Seat
अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला

योगी आदित्यनाथ ने कैसे किया पलटवार?

अखिलेश की इसी सलाह पर आज बलरामपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनौती स्वीकार की और अखिलेश पर पलटवार करते हुए उन्हें ही अयोध्या से उतरने की चुनौती दे डाली। योगी ने कहा, "वे मुझसे कहते हैं कि योगी जी अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखा दो। अरे अखिलेश जी, अयोध्या हमारा पावन धाम है। अयोध्या मैं बार-बार जाता हूं, ताकि उसके विकास में कोई कोताही न हो। उत्तर प्रदेश की पहचान पर किसी तरह का कलंक न लगे। वह हमारी आस्था की स्थली है। चुनाव लड़ने के लिए नहीं, हम वहां समग्र विकास के लिए जाते हैं।"

योगी ने अखिलेश पर तंज कसते हुए आगे कहा, "जिस अयोध्या को तुम चार घंटे बिजली देते थे, जिस अयोध्या को तुमने गंदगी के अंबार में डुबोया था। जिस अयोध्या में जय श्री राम बोलने पर आपकी सरकार ने प्रतिबंध लगाया था। जिस अयोध्या के सामने आपने सिर्फ बैरियर खड़े किए थे। आज वह अयोध्या फिर से त्रेतायुग का स्मरण करा रही है।"

उन्होंने आखिर में चुनौती देते हुए कहा, "मैं आपको ऑफर करता हूं। आइए आप भी अयोध्या से नामांकन करिए और मैं भी अयोध्या से उतरता हूं। चलो एक बार किस्मत आजमा लेते हैं। तय हो जाए। आप भी आइए, मैं भी आता हूं। लड़ाई चेलों से क्यों, लड़ाई तो आमने-सामने होनी चाहिए। इसलिए मैं कह रहा हूं कि आइए आप भी।"

'लोकसभा भूल गए क्या...,' अखिलेश ने फिर क्या दिया जवाब?
योगी की इस चुनौती पर अखिलेश ने भी एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने लिखा, "अयोध्या में ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरों को हराने के लिए हमारा एक युवा ‘पीडीए प्रहरी’ ही काफी है। चोरों को क्लीन चिट देने वाले हिस्सेदार होते हैं। दूध का दूध, पानी का पानी तो हुआ नहीं, इस बार जनता घमंड का सारा पानी उतार देगी। लोकसभा भूल गये क्या? और बाकी कसर अयोध्या की वो माताएं पूरा कर देंगी, जिन्होंने सरेआम दुखी मां का अपमान करते हुए अहंकारियों को देखा है। अपने इंटर्नल सर्वे में आपको ये बात पता चली कि नही कि अयोध्या में आपकी तरफ से कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहता है। पावन स्थलों पर वनस्पतिजीवियों का कोई काम नहीं।"
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Yogi Adityanath vs Akhilesh Yadav from Ayodhya Challenge UP Assembly Election 2027 know history Assembly Seat
अयोध्या में सीट का समीकरण। - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या में क्या रहा है चुनावी इतिहास, भाजपा-सपा का मुकाबला कैसा? 

अयोध्या विधानसभा सीट की बात की जाए तो इसका इतिहास करीब 59 साल पुराना है। यह सीट 1967 में अस्तित्व में आई। मौजूदा समय में यह फैजाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली पांच विधानसभाओं में से एक है। 

1967: अयोध्या के पहले चुनाव में जीती भारतीय जनसंघ
अयोध्या विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1967 में हुआ। इस चुनाव में भारतीय जनसंघ  के बी. किशोर विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार बी. सिंह को 4,305 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बी. किशोर को 21,279 वोट मिले, जबकि बी. सिंह को 16,974 वोट मिले थे। 

1969: अयोध्या में पहली बार जीती कांग्रेस 
1969 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस के विश्वनाथ कपूर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के राम नारायण त्रिपाठी को 3,917 वोटों के अंतर से हराया। विश्वनाथ कपूर को 19,569 वोट मिले, जबकि राम नारायण त्रिपाठी को 15,652 वोट प्राप्त हुए। इस नतीजे के साथ सीट पर भारतीय जनसंघ की शुरुआती जीत के बाद कांग्रेस ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

1974: भारतीय जनसंघ ने की वापसी
इस चुनाव में अयोध्या सीट पर भारतीय जनसंघ ने एक बार फिर वापसी करते हुए जीत दर्ज की। इस चुनाव में बेद प्रकाश अग्रवाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल के श्रीराम द्विवेदी को 283 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया। चुनाव में बेद प्रकाश अग्रवाल को 18,491 वोट मिले, जबकि श्रीराम द्विवेदी को 18,208 वोट प्राप्त हुए। 

1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी जनता पार्टी की सरकार बनी। 

1977: पहली बार जीती जनता पार्टी 
1977 के विधानसभा चुनाव देश में आपातकाल के बाद हुए थे। आपातकाल के बाद राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना और जनता पार्टी ने कई राज्यों में जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश में भी जनता पार्टी को बड़ा समर्थन मिला।

इस माहौल का असर अयोध्या विधानसभा सीट पर भी दिखा। चुनाव में जनता पार्टी के जय शंकर पांडेय विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के निर्मल कुमार खत्री को 416 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जय शंकर पांडेय को 24,247 वोट मिले, जबकि निर्मल कुमार खत्री को 23,831 वोट प्राप्त हुए।  

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Yogi Adityanath vs Akhilesh Yadav from Ayodhya Challenge UP Assembly Election 2027 know history Assembly Seat
अयोध्या विधानसभा सीट पर पार्टियों का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
1980: कांग्रेस (आई) ने दर्ज की जीत
1980 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर कांग्रेस (आई) ने जीत हासिल की। इस चुनाव में निर्मल कुमार विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार  श्री भगवान जायसवाल को 21,786 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में निर्मल कुमार को 33,095 वोट मिले, जबकि श्री भगवान जायसवाल को 11,309 वोट प्राप्त हुए। इस चुनाव में कांग्रेस (आई) की जीत ने अयोध्या सीट पर कांग्रेस की वापसी कराई।

1985: कांग्रेस ने बरकरार रखी बढ़त
1985 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर  लगातार दूसरी बार सीट पर जीत हासिल की। यहां से कांग्रेस के सुरेंद्र प्रताप सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के जय शंकर पांडेय को 7,383 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सुरेंद्र प्रताप सिंह को 21,475 वोट मिले, जबकि जय शंकर पांडेय को 14,092 वोट प्राप्त हुए। 

1989: पहली बार जनता दल जीती चुनाव
इस विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर पहली बार जनता दल ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में जनता दल के जय शंकर पांडेय विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को 9,073 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जय शंकर पांडेय को 31,899 वोट मिले, जबकि लल्लू सिंह को 22,826 वोट प्राप्त हुए।

1991: अयोध्या में भाजपा ने पहली बार दर्ज की जीत
इस चुनाव अयोध्या की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहे। राम मंदिर आंदोलन के दौर में यहां भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा था। इसी चुनाव में भाजपा के लल्लू सिंह ने अयोध्या विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने जनता पार्टी के जय शंकर पांडेय को 30,400 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में लल्लू सिंह को 49,206 वोट मिले, जबकि जय शंकर पांडेय को 18,806 वोट प्राप्त हुए।

इस जीत के साथ अयोध्या सीट पर भाजपा के लंबे राजनीतिक दबदबे की शुरुआत हुई।

Yogi Adityanath vs Akhilesh Yadav from Ayodhya Challenge UP Assembly Election 2027 know history Assembly Seat
अयोध्या सीट के विजेताओं का रिकॉर्ड। - फोटो : अमर उजाला
1993: भाजपा के लल्लू सिंह ने दोहराई जीत
1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अयोध्या सीट पर अपनी जीत दोहराई। इस चुनाव में लल्लू सिंह लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जय शंकर पांडेय को 9,238 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में  लल्लू सिंह को 58,587 वोट मिले, जबकि जय शंकर पांडेय को 49,349 वोट प्राप्त हुए। वहीं, कांग्रेस के सुरेंद्र प्रताप सिंह 8,389 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1996: भाजपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
1996 के विधानसभा चुनाव में भी अयोध्या सीट पर भाजपा के लल्लू सिंह लगातार तीसरी बार विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जय शंकर पांडेय को 21,195 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लल्लू सिंह को 59,658 वोट मिले, जबकि जय शंकर पांडेय को 38,463 वोट प्राप्त हुए।

2002: भाजपा और लल्लू सिंह की जीत का सिलसिला जारी
2002 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर भाजपा के लल्लू सिंह ने एक बार फिर जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के अभय सिंह को 17,860 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लल्लू सिंह को 51,289 वोट मिले, जबकि अभय सिंह को 33,429 वोट प्राप्त हुए। वहीं समाजवादी पार्टी के वेद प्रकाश गुप्ता 31,936 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2007: लल्लू सिंह ने लगातार पांचवीं बार जीता चुनाव
इस चुनाव में अयोध्या सीट पर भाजपा के लल्लू सिंह ने लगातार पांचवीं  बार जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू को 5,741 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लल्लू सिंह को 58,493 वोट मिले, जबकि इंद्र प्रताप तिवारी को 52,752 वोट प्राप्त हुए।

इस जीत के साथ लल्लू सिंह ने 1991, 1993, 1996, 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों में लगातार पांच बार जीत हासिल की। इस तरह उन्होंने अयोध्या सीट पर भाजपा के लंबे दबदबे को कायम रखा।

2012: समाजवादी पार्टी ने रोका भाजपा का विजय रथ 
2007 के बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में अयोध्या सीट पर राजनीतिक समीकरण बदल गया। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के लल्लू सिंह को 5,405 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सपा के तेज नारायण पांडेय को 55,262 वोट मिले, जबकि लल्लू सिंह को 49,857 वोट प्राप्त हुए।

इस नतीजे के साथ लल्लू सिंह की लगातार पांच चुनावों की जीत का सिलसिला टूट गया और समाजवादी पार्टी ने अयोध्या सीट पर कब्जा कर लिया।

Yogi Adityanath vs Akhilesh Yadav from Ayodhya Challenge UP Assembly Election 2027 know history Assembly Seat
अयोध्या सीट का 2022 का नतीजा। - फोटो : अमर उजाला
2017: भाजपा ने फिर हासिल की सीट
2017 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर भाजपा ने वापसी की। इस चुनाव में भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता को मैदान में उतार और वे विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय को 50,440 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में वेद प्रकाश गुप्ता को 1,07,014 वोट मिले, जबकि तेज नारायण पांडेय को 56,574 वोट प्राप्त हुए। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद बज्मी सिद्दीकी 39,554 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस जीत के साथ भाजपा ने 2012 में गंवाई सीट फिर से हासिल कर ली।

2022: वेद प्रकाश गुप्ता ने लगातार दूसरी बार दर्ज की जीत
2022 के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा। इस चुनाव में भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता ने समाजवादी पार्टी के तेज नारायण पांडेय को 19,990 वोटों के अंतर से हराया। चुनवा में वेद प्रकाश गुप्ता को 1,13,414 वोट मिले, जबकि तेज नारायण पांडेय को 93,424 वोट प्राप्त हुए। वहीं बहुजन समाज पार्टी के रवि प्रकाश 17,706 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
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