जिला मुख्यालय सीहोर से 59 किलोमीटर दूर आष्टा विकासखंड के नानकपुर गांव में शनिवार को बेहद पीड़ादायक दृश्य सामने आया। गांव की वृद्धा पार्वती बाई (75) की मौत के बाद जब ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे तो उन्हें घुटनों तक कीचड़ और बरसाती नाले से होकर गुजरना पड़ा। श्मशान पर न तो छत थी और न ही कोई दूसरी व्यवस्था। इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई तो ग्रामीण घर से चादर लाकर शव के ऊपर तानकर किसी तरह दाह संस्कार कर पाए।
भीगे शव और ऊपर चादर पकड़े ग्रामीणों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इन तस्वीरों को देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गांव में मृतकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा न होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। नानकपुर गांव की आबादी करीब एक हजार है, लेकिन यहां श्मशान तक जाने का रास्ता सिर्फ कच्ची पगडंडी है, जो बरसात में दलदल और नाले में बदल जाती है। श्मशान पर बैठने तक की जगह नहीं है। जो टीन शेड बना था, उसकी चादरें टूटकर बेकार हो चुकी हैं।
ग्रामीणों की व्यथा
गांव के प्रदीप कुशवाहा, जीवन धनगर, चंदन धनगर और सुदान सिंह कुशवाहा ने बताया कि पार्वती बाई के अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों को बहुत परेशानी हुई। उन्होंने कहा – “ऐसी मुसीबत तो भगवान दुश्मन को भी न दे। कम से कम अंतिम संस्कार तो सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए।” ग्रामीणों का कहना है कि वे कई साल से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। अधिकारी और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। न केवल सड़क-पानी-बिजली की कमी है बल्कि शवदाह स्थल पर छाया तक नहीं मिलती।
ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता वादे करते हैं, लेकिन बाद में गांव की सुध नहीं लेते। अब ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि सम्मानजनक विदाई हर इंसान का हक है और इस हक के लिए वे संघर्ष करेंगे।
प्रशासन और विधायक से की गई शिकायत
ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि देवकरण मालवीय ने बताया कि नानकपुर के श्मशान घाट की समस्या को लेकर प्रशासन और विधायक तक बात पहुंचाई गई है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। आष्टा विधायक गोपाल इंजीनियर ने कहा कि सरपंच का हाल ही में आकस्मिक निधन हो गया था, जिस कारण काम में देरी हुई। उन्होंने बताया कि आष्टा क्षेत्र के लगभग 144 गांवों में से 10-12 गांवों में इस तरह की स्थिति है। इसके लिए जनपद पंचायत के माध्यम से एस्टीमेट तैयार कराए जा रहे हैं और जल्द प्राथमिकता के आधार पर टीन शेड व अन्य जरूरी काम कराए जाएंगे।
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जिले भर की गंभीर स्थिति
नानकपुर अकेला गांव नहीं है। जिले के सौ से ज्यादा गांवों में यही हाल है। जावर तहसील का झिकड़ी गांव, इछावर का दातारनगर और केलापानी जैसे गांवों में भी श्मशान घाट तक जाने का रास्ता दलदल और नालों से होकर गुजरता है। बरसात के दिनों में शव को पन्नी से ढककर या गीली लकड़ियों से दाह संस्कार करना मजबूरी बन जाता है।
जनपद पंचायत आष्टा के सीईओ अमित व्यास ने कहा कि जिन-जिन गांवों में श्मशान घाट से जुड़ी समस्याएं हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही सभी जगहों पर सुधार कार्य कराया जाएगा।
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